मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना को मंजूरी, पशुपालकों के लोन पर ब्याज का बोझ होगा खत्म
पशुपालकों को बैंक लोन पर 100% ब्याज सब्सिडी मिलेगी, तीन साल में योजना पर 160 करोड़ से ज्यादा खर्च

पटना। बिहार सरकार ने पशुपालकों और डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत पात्र पशुपालकों को बैंक से मिलने वाले ऋण के ब्याज पर 100 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। यानी लाभुक को लोन की मूल रकम चुकानी होगी, जबकि ब्याज का भार सरकार उठाएगी।
पशुपालकों को लोन पर मिलेगी पूरी ब्याज सब्सिडी
सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना है। योजना के तहत पशुपालक बैंक से ऋण लेकर डेयरी से जुड़ा काम शुरू या उसका विस्तार कर सकेंगे। ब्याज पर 100 फीसदी सब्सिडी मिलने से लोन लेने वाले लाभुकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में पशुपालन को रोजगार के विकल्प के रूप में बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
गाय और भैंस खरीदने में मिलेगी मदद
जानकारी के मुताबिक योजना के तहत लाभुक तीन उन्नत नस्ल की गाय या दो भैंस खरीदने के लिए बैंक ऋण का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसका सीधा उद्देश्य दूध उत्पादन बढ़ाना और पशुपालकों की आमदनी के लिए डेयरी गतिविधियों को मजबूत करना है।
तीन साल के लिए सरकार ने मंजूर की राशि
सरकार ने मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना के लिए तीन साल की अवधि में 160 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की मंजूरी दी है। यह राशि ब्याज सब्सिडी समेत योजना के क्रियान्वयन में इस्तेमाल की जाएगी।
कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास पर भी जोर
कैबिनेट ने सिर्फ पशुपालकों के लिए ऋण योजना को ही मंजूरी नहीं दी है, बल्कि कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास से जुड़ी 8 परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं के लिए 126.07 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही 500 नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाने और डेयरी से जुड़ी सुविधाओं को विकसित करने की योजना है।
दूध उत्पादन और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने की कोशिश
इन फैसलों को एक साथ देखें तो सरकार का फोकस पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर है। ब्याज सब्सिडी से पशुपालकों के लिए बैंक ऋण लेना आसान हो सकता है, जबकि डेयरी परियोजनाओं और नई दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार से दूध के संग्रह और कारोबार की व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश होगी।



