महिला सुरक्षा पर CM सम्राट चौधरी से मिलीं शांभवी चौधरी, तेज कार्रवाई और स्पीडी ट्रायल की उठी मांग
CM सम्राट चौधरी ने महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दिया कार्रवाई का भरोसा

पटना: बिहार में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर सांसद शांभवी चौधरी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान महिला सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। शांभवी चौधरी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में जल्द कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
महिलाओं के खिलाफ अपराध पर तेजी से हो कार्रवाई
मुलाकात के दौरान महिलाओं और बेटियों से जुड़े अपराधों को लेकर विशेष तौर पर चर्चा हुई। शांभवी चौधरी ने कहा कि किसी भी महिला के साथ अपराध होने के बाद उसे न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़े, इसके लिए पुलिस और प्रशासन को तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मामलों की जांच जल्द पूरी करने के साथ-साथ गंभीर अपराधों में स्पीडी ट्रायल कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि अपराधियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होने से पीड़ितों को न्याय मिलने का रास्ता आसान होगा।
मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
सांसद ने महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया। इसमें महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई, प्रभावी जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग रखी गई।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा से जुड़े सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
हर जिले में कैंप लगाकर सुनी जाएंगी महिलाओं की समस्याएं
मुख्यमंत्री की ओर से बताया गया कि बिहार के सभी जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों की ओर से कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में महिलाएं अपनी समस्याएं और सुरक्षा से जुड़े मामले अधिकारियों के सामने रख सकेंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों को स्थानीय स्तर पर सुनना और जरूरत के अनुसार जल्द कार्रवाई करना है। इससे महिलाओं को अपनी समस्याओं के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिल सकती है।
बेटियों को सुरक्षित माहौल देने पर जोर
शांभवी चौधरी ने साफ कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उनका जोर ऐसे माहौल पर है, जहां महिलाएं और बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करते हुए शिक्षा, रोजगार और अपने दूसरे लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ सकें।



