Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप-ऐश्वर्या तलाक मामला, 24 फरवरी को पटना फैमिली कोर्ट में तीसरी मध्यस्थता, सुलह या नया विवाद?
पटना फैमिली कोर्ट में तीसरी मध्यस्थता, सुलह या तलाक? अनुष्का एंगल ने बढ़ाई जटिलता, लालू परिवार में हलचल।
Tej Pratap Yadav: बिहार की राजनीति में लालू-राबड़ी परिवार से जुड़ा एक मामला फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार यह सियासत से ज्यादा पारिवारिक और कानूनी जंग की वजह से चर्चा में है। तेज प्रताप यादव और उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय के बीच चल रहा तलाक का विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पटना फैमिली कोर्ट में 24 फरवरी 2026 को इस मामले की अहम सुनवाई होने वाली है, जहां तीसरी बार मध्यस्थता की कोशिश की जाएगी। क्या रिश्ता बच पाएगा या कानूनी लड़ाई और तेज होगी? यह सवाल इन दिनों हर किसी के मन में है।
यह विवाद 2018 से चला आ रहा है, जब दोनों का विवाह महज छह महीने बाद ही तनावपूर्ण हो गया था। अब अदालत के समक्ष आरोप-प्रत्यारोप, गुजारा भत्ता, आवास और निजी रिश्तों से जुड़े दावे सब कुछ टेबल पर है। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी, कानूनी स्थिति और आने वाली सुनवाई में क्या हो सकता है।
विवाह से तलाक तक का सफर
तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय का विवाह 12 मई 2018 को पटना में बड़े धूमधाम से हुआ था। राजनीतिक परिवार होने के कारण यह शादी काफी चर्चा में रही। लेकिन महज छह महीने बाद नवंबर 2018 में तेज प्रताप ने तलाक की याचिका दाखिल कर दी। ऐश्वर्या ने भी घरेलू हिंसा और अन्य आरोप लगाते हुए जवाबी दावे पेश किए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर इल्जाम लगाए, जिससे मामला जटिल होता गया।
फैमिली कोर्ट में शुरुआती सुनवाई के बाद मामला पटना हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने ऐश्वर्या की रिव्यू पिटीशन खारिज करते हुए हस्तक्षेप से इनकार किया और छह महीने में मामले को निपटाने का निर्देश दिया। लेकिन समयसीमा बीत चुकी है और मामला अब भी लंबित है। प्रिंसिपल जज सुनील दत्त पांडेय अब तीसरी बार दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए बुला रहे हैं।
दो बार असफल रही मध्यस्थता, इस बार क्या होगा?
पिछले दो प्रयासों में मध्यस्थता नाकाम रही। पहली बैठक पटना के एक चिड़ियाघर में और दूसरी एक बड़े होटल में हुई थी। दोनों बार कोई सहमति नहीं बन पाई। अब अदालत ज्यादा गंभीर रुख अपनाते हुए तीसरी मध्यस्थता की कोशिश कर रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आखिरी मौका हो सकता है। अगर इस बार भी सुलह नहीं हुई तो तलाक की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समाधान निकालने का स्पष्ट निर्देश दिया है। लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐश्वर्या ने सास राबड़ी देवी पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था, जबकि तेज प्रताप तलाक पर अड़े हुए हैं। अगर पर्याप्त साक्ष्य नहीं पेश हुए तो याचिका खारिज भी हो सकती है। वहीं, अगर वैवाहिक संबंधों से बाहर रिश्तों के आरोप साबित हुए तो मामला नया मोड़ ले सकता है।
गुजारा भत्ता और आवास को लेकर विवाद
फैमिली कोर्ट ने पहले ही ऐश्वर्या को अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। ऐश्वर्या ने एसके पुरी इलाके में सुविधायुक्त फ्लैट और डेढ़ लाख रुपये मासिक भत्ता की मांग की है। गोला रोड स्थित फ्लैट को लेकर भी दोनों पक्षों में विवाद रहा है। तेज प्रताप की ओर से इन मांगों का विरोध किया जा रहा है। अदालत इन मुद्दों पर भी अंतिम फैसला सुना सकती है।
अनुष्का यादव एंगल ने बढ़ाई हलचल
मई 2025 में सोशल मीडिया पर अनुष्का यादव के साथ तेज प्रताप की तस्वीर वायरल हुई थी। पोस्ट में 12 साल पुराने रिश्ते का दावा किया गया। बाद में तेज प्रताप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिश्ते से इनकार किया। इसके बाद अनुष्का के मां बनने और बेटी ‘उज्जैनी’ के जन्म की खबर ने नया विवाद खड़ा कर दिया। हालांकि तेज प्रताप ने स्पष्ट कहा है कि उनका न अनुष्का से कोई रिश्ता है और न ही बच्ची से।
यह एंगल तलाक मामले को और जटिल बना रहा है। अदालत में इन दावों का असर पड़ सकता है, खासकर अगर कोई कानूनी सबूत पेश किया गया।
24 फरवरी की सुनवाई
पटना फैमिली कोर्ट में 24 फरवरी को होने वाली सुनवाई इस मामले का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अगर मध्यस्थता सफल हुई तो दोनों पक्षों में समझौता हो सकता है। लेकिन अगर बात नहीं बनी तो तलाक की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में निजी आरोपों के साथ-साथ राजनीतिक दबाव भी काम कर रहा है।
लालू यादव परिवार के लिए यह स्थिति नाजुक है। एक तरफ सियासी छवि, दूसरी तरफ पारिवारिक मुद्दे। तेज प्रताप और ऐश्वर्या दोनों ही इस जंग में अकेले नहीं हैं पूरे परिवार की नजर इस कोर्टरूम पर है।
Tej Pratap Yadav: क्या कहते हैं कानूनी जानकार?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि तलाक के मामलों में आपसी सहमति सबसे बेहतर रास्ता होता है। लेकिन अगर आरोप-प्रत्यारोप साबित नहीं हुए तो कोर्ट याचिका खारिज कर सकती है। दूसरी ओर, अगर कोई पक्ष मजबूत सबूत पेश कर दे तो फैसला उसके पक्ष में जा सकता है। 24 फरवरी की सुनवाई से पहले दोनों पक्षों को अपनी तैयारी मजबूत रखनी होगी।
यह मामला सिर्फ एक तलाक का नहीं रहा, यह बिहार की सियासत, परिवार और अदालत के बीच का एक जटिल संग्राम बन चुका है। आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ आएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल सभी की निगाहें पटना फैमिली कोर्ट पर टिकी हैं।



