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Shani Dev Remedies: शनि देव की साढ़ेसाती और ढैय्या से बचने के उपाय, ये खास फूल दिलाएंगे छुटकारा

नीले गुड़हल, नीला कमल, काले तिल व जामुन फूल चढ़ाएं; शनिवार पूजा से शनि कृपा, कष्ट दूर

Shani Dev Remedies: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के समय में व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं। लेकिन कुछ खास फूलों से शनि देव की पूजा करने से इन कष्टों से राहत मिल सकती है। आइए जानते हैं कौन से फूल शनि देव को सबसे प्रिय हैं।

शनि देव की साढ़ेसाती क्या होती है?

साढ़ेसाती वह अवधि होती है जब शनि ग्रह किसी व्यक्ति की राशि से पहले, उसी राशि में और उसके बाद की राशि में गोचर करता है। यह अवधि साढ़े सात साल की होती है। इस दौरान व्यक्ति को आर्थिक परेशानी, नौकरी में दिक्कत, स्वास्थ्य समस्या और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ सकता है।

ढैय्या की अवधि ढाई साल की होती है। जब शनि देव चौथे या आठवें घर में गोचर करते हैं तो ढैय्या लगती है। इस समय भी जीवन में तनाव और मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

नीले फूल शनि देव को सबसे प्रिय

नीले रंग का महत्व

शनि देव को नीला रंग बेहद पसंद है। इसलिए नीले रंग के फूल चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। शनिवार के दिन शनि मंदिर में नीले फूल अर्पित करने से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है।

ज्योतिषियों के अनुसार नीले गुड़हल के फूल शनि देव को बेहद पसंद हैं। अगर आपके घर के आसपास नीले गुड़हल का पौधा है तो इसके फूल तोड़कर शनिवार को शनि मंदिर में चढ़ाएं। इससे शनि दोष दूर होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

नीले कमल के फूल का प्रयोग

नीले कमल का फूल भी शनि देव की पूजा में विशेष माना जाता है। यह फूल दुर्लभ होता है लेकिन अगर मिल जाए तो इसे जरूर चढ़ाना चाहिए। नीले कमल से शनि देव की आराधना करने से भाग्य में सुधार होता है और करियर में तरक्की मिलती है।

काले फूलों का महत्व

शनि देव को काले रंग से भी जुड़ाव है। काले रंग के फूल चढ़ाने से भी शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि काले फूल प्रकृति में कम मिलते हैं, लेकिन गहरे बैंगनी या काले रंग के फूल चढ़ाए जा सकते हैं।

काले तिल के फूल

काले तिल शनि देव को अत्यंत प्रिय हैं। शनिवार को काले तिल से शनि देव की पूजा करनी चाहिए। तिल के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। तिल दान करने से शनि का कोप शांत होता है।

जामुन के फूल की पूजा

शास्त्रों में जामुन के फूलों का भी उल्लेख है। जामुन के पेड़ को शनि देव से जुड़ा माना जाता है। शनिवार के दिन जामुन के फूल तोड़कर शनि देव को अर्पित करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।

पीपल के फूल का महत्व

पीपल का पेड़ भी शनि देव को प्रिय है। पीपल में लगने वाले छोटे फूलों को शनिवार को शनि मंदिर में चढ़ाया जा सकता है। पीपल की परिक्रमा करना और जल चढ़ाना भी शुभ होता है।

बैंगनी रंग के फूल

बैंगनी या गहरे रंग के फूल भी शनि देव को चढ़ाए जा सकते हैं। कटहल के फूल, बैंगनी गुलाब या बैंगनी रंग के अन्य फूल शनिवार को अर्पित करने चाहिए।

फूल चढ़ाने की सही विधि

शनि देव को फूल चढ़ाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। फूल ताजे और साफ होने चाहिए। टूटे या मुरझाए फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। शनिवार के दिन सुबह स्नान करके शुद्ध होकर पूजा करनी चाहिए।

अन्य उपाय भी करें साथ में

तेल का दान

शनिवार को सरसों या तिल के तेल का दान करना चाहिए। गरीबों को काले कपड़े, काले उड़द और तेल दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।

हनुमान जी की आराधना

शनि देव के कोप से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ भी करना चाहिए। मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिर जाना शुभ होता है। हनुमान जी शनि देव के प्रकोप से रक्षा करते हैं।

शनि मंत्र का जाप

शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का नियमित जाप करना चाहिए। शनिवार के दिन इस मंत्र का 108 बार जाप करने से शनि दोष में कमी आती है।

Shani Dev Remedies: सावधानियां भी हैं जरूरी

शनि देव की पूजा करते समय कुछ सावधानियां रखनी चाहिए। लाल रंग के फूल शनि देव को कभी नहीं चढ़ाने चाहिए। लाल रंग मंगल ग्रह से जुड़ा है और शनि-मंगल में शत्रुता मानी जाती है।

पूजा करते समय मन में नकारात्मक विचार नहीं रखने चाहिए। शनि देव से हमेशा सच्चे मन से प्रार्थना करनी चाहिए। झूठ बोलने और गलत काम करने से शनि देव नाराज होते हैं।

शनि देव हैं कर्म फल के देवता

शनि देव कर्म के देवता हैं। अच्छे कर्म करने वालों को वे हमेशा फल देते हैं। फूलों से पूजा करने के साथ-साथ अपने कर्मों को भी सुधारना जरूरी है। नियमित पूजा, दान और अच्छे कर्म से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम किया जा सकता है।

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