PUSU Election 2026: पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई का ऐतिहासिक दबदबा, शांतनु शेखर बने अध्यक्ष, खुशी कुमारी महासचिव
NSUI के शांतनु शेखर अध्यक्ष, खुशी कुमारी महासचिव; ABVP को झटका, निर्दलीय भी चमके
PUSU Election 2026: बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटना विश्वविद्यालय (पीयू) के छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने शानदार प्रदर्शन किया है। 28 फरवरी 2026 को हुए मतदान के बाद देर रात घोषित परिणामों में एनएसयूआई ने सेंट्रल पैनल के प्रमुख पदों पर कब्जा जमाया। अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के शांतनु शेखर और महासचिव पद पर खुशी कुमारी ने जीत हासिल की, जबकि अन्य पदों पर एबीवीपी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने सफलता पाई। यह चुनाव एनएसयूआई के लिए ऐतिहासिक रहा, क्योंकि अध्यक्ष पद पर उनकी यह पहली बड़ी जीत मानी जा रही है।
परिणामों की घोषणा के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह की लहर दौड़ गई। छात्रों ने विजेताओं का जोरदार स्वागत किया, जबकि हारने वाले प्रत्याशियों के समर्थक निराश दिखे। कुल मिलाकर यह चुनाव छात्र राजनीति में बदलाव का संकेत देता है, जहां युवा मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं।
चुनाव की पृष्ठभूमि और मतदान प्रक्रिया
पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ (पीयूएसयू) चुनाव 2026 के लिए मतदान 28 फरवरी को सुबह 8:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक चला। विश्वविद्यालय के 11 संबद्ध कॉलेजों में कुल लगभग 20,000 पात्र मतदाताओं में से 37.84 प्रतिशत ने वोट डाले। यह प्रतिशत पिछले वर्ष से कम रहा, जहां 45.21 प्रतिशत मतदान हुआ था। कारणों में होली की छुट्टियां और छात्रों का घर जाना शामिल बताया जा रहा है।
सबसे ज्यादा मतदान पटना वीमेंस कॉलेज में 53.03 प्रतिशत रहा, जबकि मगध महिला कॉलेज में सबसे कम 21.72 प्रतिशत। मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। सभी बूथों पर पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, पटना साइंस कॉलेज में दोपहर करीब 12:55 बजे हवाई फायरिंग की घटना हुई, जिसमें एक मोटरसाइकिल सवार ने हवा में गोलियां चलाईं और भाग गया। इससे छात्रों में थोड़ी अफरा-तफरी मची, लेकिन स्थिति जल्द नियंत्रित हो गई। पटना कॉलेज में बैलेट पेपर पर नाम की गलती को लेकर भी कुछ हंगामा हुआ। कुल 41 उम्मीदवार सेंट्रल पैनल के पांच पदों के लिए मैदान में थे, जबकि काउंसलर पदों के लिए 45 प्रत्याशी।
मतगणना शाम 5 बजे से कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स में शुरू हुई और देर रात तक चली। छह राउंड की गिनती के बाद परिणाम घोषित किए गए। कुलपति प्रो. नमिता सिंह ने विजेताओं को प्रमाण पत्र सौंपे और उम्मीद जताई कि नए पदाधिकारी छात्रों और विश्वविद्यालय के हित में काम करेंगे।
प्रमुख पदों पर विजेता और वोटों का ब्योरा
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अध्यक्ष पद: एनएसयूआई के शांतनु शेखर ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 2896 वोट मिले। निकटतम प्रतिद्वंद्वी छात्र जदयू के प्रिंस कुमार को 1400 वोट मिले, जबकि एबीवीपी की अनुष्का कुमारी 924 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। शांतनु की यह जीत एनएसयूआई के लिए मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि पिछले कई दशकों में अध्यक्ष पद पर उनका कब्जा नहीं था।
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महासचिव पद: एनएसयूआई की खुशी कुमारी ने 2164 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। छात्र राजद के प्रत्युष राज 1611 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। खुशी की जीत ने एनएसयूआई को सेंट्रल पैनल में मजबूत स्थिति दी।
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उपाध्यक्ष पद: निर्दलीय प्रत्याशी शिफत फैज ने 1571 वोटों के साथ जीत हासिल की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी आयुष हर्ष को 1503 वोट मिले। शिफत की जीत ने चुनाव में निर्दलीय ताकत को दिखाया।
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संयुक्त सचिव पद: एबीवीपी के अभिषेक कुमार ने 2143 वोटों से बाजी मारी। एनएसयूआई के मो. मुनव्वर आजम को 1751 वोट मिले।
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कोषाध्यक्ष पद: एबीवीपी के हर्ष वर्धन ने 1519 वोटों के साथ जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1429 वोट मिले।
पांच प्रमुख पदों में दो महिलाओं (खुशी कुमारी और शिफत फैज) और तीन पुरुषों का वर्चस्व रहा, जो छात्र राजनीति में लैंगिक संतुलन का संकेत है।
एनएसयूआई की जीत के पीछे क्या कारण?
एनएसयूआई की इस जीत को छात्रों के बीच बढ़ती जागरूकता और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की सक्रियता से जोड़ा जा रहा है। शांतनु शेखर और खुशी कुमारी ने अभियान में छात्रों की सुरक्षा, बेहतर सुविधाएं, सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस की मांग और लड़कियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। कई छात्रों ने कहा कि एनएसयूआई ने जमीनी स्तर पर काम किया और वादों से ज्यादा कार्रवाई पर जोर दिया। सोशल मीडिया पर भी एनएसयूआई समर्थकों ने जीत को ‘परिवर्तन की दस्तक’ बताया।
एबीवीपी ने पिछले चुनावों में मजबूत प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार अध्यक्ष और महासचिव पद गंवाए। अन्य संगठनों जैसे छात्र जदयू, छात्र राजद और निर्दलीयों को भी झटका लगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन और भविष्य की उम्मीदें
कुलपति प्रो. नमिता सिंह ने सभी पदाधिकारियों से अपील की कि वे छात्र हित में काम करें। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ विश्वविद्यालय और छात्रों के बीच पुल का काम करता है। नए पदाधिकारियों को चुनौतियां कम नहीं हैं, जैसे कैंपस में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, परीक्षा सुधार, हॉस्टल सुविधाएं और खेलकूद को बढ़ावा देना।
यह चुनाव बिहार की छात्र राजनीति में नया अध्याय खोल सकता है। एनएसयूआई की जीत से युवा कांग्रेस को मजबूती मिली है, जबकि अन्य संगठन अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकते हैं। पटना विश्वविद्यालय के छात्र अब उम्मीद कर रहे हैं कि नए नेतृत्व से उनके मुद्दों का समाधान होगा।
परिणामों के बाद विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण माहौल है। विजेताओं ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि वे सभी छात्रों के लिए काम करेंगे।
PUSU Election 2026: परिणाम एक नज़र में
| पद | विजेता | संगठन | प्राप्त वोट |
| अध्यक्ष | शांतनु शेखर | NSUI | 2896 |
| महासचिव | खुशी कुमारी | NSUI | 2164 |
| उपाध्यक्ष | शिफत फैज | निर्दलीय | 1571 |
| संयुक्त सचिव | अभिषेक कुमार | ABVP | 2143 |
| कोषाध्यक्ष | हर्ष वर्धन | ABVP | 1519 |



