Patna University Election: पटना विश्वविद्यालय का चुनावी ड्रामा, प्रशासन का यू-टर्न, 28 फरवरी को ही मतदान का फैसला
पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में यू-टर्न, स्थगन के बाद 28 फरवरी को ही मतदान, शिक्षकों के विरोध और कुलपति के फैसले के बाद अंतिम घोषणा
Patna University Election: पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को लेकर पिछले दो दिनों से जो प्रशासनिक अस्थिरता बनी हुई थी, उसे अब समाप्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यू-टर्न लेते हुए 28 फरवरी को ही मतदान कराने का निर्णय लिया है, जिससे छात्र संगठनों में हलचल मच गई है।
शनिवार को शुरू हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
शनिवार को पटना विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव को लेकर हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। इस दौरान छात्रों के अमर्यादित व्यवहार और शिक्षकों से मारपीट की घटनाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनाव स्थगित करने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से चुनाव स्थगित करने का पत्र जारी कर दिया गया।
इस घटना के पीछे पिछले दो-तीन दिनों में छात्रों के लगातार बदसलूकी को कारण बताया गया। हालांकि, इसके कुछ देर बाद ही विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. वीरेंद्र कुमार पासवान और फिर कुलपति प्रो. नमिता सिंह ने पूर्व निर्धारित तिथि 28 फरवरी को ही चुनाव कराने की बात कही।
7:48 बजे स्थगित करने का पत्र, फिर मिनटों में बदला फैसला
शनिवार शाम 7:48 बजे पटना विश्वविद्यालय संकायाध्यक्ष, छात्र कल्याण (डीन) प्रो. योगेंद्र कुमार वर्मा ने पत्र जारी कर चुनाव स्थगित कर दिया। पत्र में कहा गया कि “पिछले कुछ दिनों में विश्वविद्यालय परिसर में अमर्यादित एवं अप्रत्याशित घटनाएं हुईं।”
प्रो. योगेंद्र कुमार वर्मा ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि 18 फरवरी को पटना वीमेंस कॉलेज परिसर में छात्रों के एक गुट द्वारा बिना अनुमति अनाधिकृत प्रवेश कर नारेबाजी करना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन था। इसके अलावा, भारी मात्रा में बैनर और पोस्टर का प्रयोग करके समय से पूर्व ही चुनाव प्रचार शुरू कर दिया गया था।
साइंस कॉलेज की घटना: निर्णायक मोड़
शनिवार को पटना साइंस कॉलेज में जो हुआ, उसने प्रशासन के लिए स्थिति गंभीर कर दी। छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने कक्षा में घुसकर चुनाव प्रचार करने का प्रयास किया। जब अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष ने इसका विरोध किया, तो छात्रों ने उनके साथ मारपीट की।
इस घटना के बाद शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया। शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव प्रो. शेखर के नेतृत्व में शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल कुलपति से मिला और उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि दोषी छात्रों पर जल्द से जल्द कार्रवाई नहीं की जाती है, तो पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में कोई भी शिक्षक शामिल नहीं होंगे।
शिक्षकों के विरोध के बाद प्रशासन का निर्णय
शिक्षकों के कड़े रुख के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद उड़ी। प्रो. Shekhar ने कहा, “यदि इन छात्र गुंडों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती है, तो हम किसी भी चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे।” इस बयान के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया था।
जब स्थगित चुनाव की सूचना पर प्रत्याशियों ने कुलपति से मिलने का प्रयास किया, तो कुलपति प्रो. नमिता सिंह ने फोन पर प्रत्याशियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके आग्रह पर 28 फरवरी को ही चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है।
51 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला
पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में इस बार पांच केंद्रीय पदों के लिए कुल 51 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं। इसके अलावा, आठ काउंसलर पदों के लिए नौ उम्मीदवारों ने भी नामांकन किया है, जिससे चुनावी मैदान काफी रोचक हो गया है।
मुख्य रूप से चुनावी मैदान में सक्रिय संगठन:
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आईसा (AISF)
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एसएफआई (SFI)
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एआईवाईएफ (AIFY)
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एनएसयूआई (NSUI)
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एबीवीपी (ABVP)
तकनीकी प्रक्रियाएं और अंतिम तैयारी
28 फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी है। अब अंतिम चरण में मतदान की तैयारी की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम करने का निर्णय लिया है। सभी कॉलेज वार्डन को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्र संगठनों के साथ बैठक कर शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए सहयोग करें। इसके अलावा, परीक्षा भवन और आर्ट्स कॉलेज परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे।
Patna University Election: एक नई शुरुआत का संकेत
पटना विश्वविद्यालय के इस चुनावी ड्रामा ने कई सबक दिए हैं। पहले चुनाव स्थगित होने से छात्र संगठनों में राहत की लहर थी, लेकिन शिक्षकों के विरोध और प्रशासनिक यू-टर्न ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। अब 28 फरवरी को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि छात्र राजनीति का स्वरूप क्या होगा।



