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Patna News: पटना नगर निगम में बड़ा फैसला, विज्ञापन संशोधन विनियम 2025 पारित, ई-निविदा से एजेंसी चयन, मनमानी पर 200% जुर्माना, राजस्व नुकसान पर लगाम

नगर निगम ने विज्ञापन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए संशोधन विनियम पारित किया, ई-निविदा से एजेंसी चयन, मनमानी पर 200% जुर्माना, 70-120 करोड़ राजस्व बचत की उम्मीद

Patna News: पटना नगर निगम ने शहर की विज्ञापन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को होटल मौर्य में आयोजित चतुर्थ विशेष बैठक में महापौर सीता साहू की अध्यक्षता में पटना नगर निगम विज्ञापन (संशोधन) विनियम 2025 के प्रारूप पर विस्तृत चर्चा के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह विनियम बिहार नगरपालिका क्षेत्र विज्ञापन नियमावली 2023 और उसके संशोधन 2025 के प्रावधानों पर आधारित है। नए नियमों से निगम को प्रतिवर्ष 70 से 120 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान पर रोक लगाने की उम्मीद है। पिछले 10 वर्षों में अनुमानित 840 से 1440 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है, जिसे अब रोका जा सकेगा।

यह फैसला अवैध होर्डिंग्स, मनमानी दरों और अनियमित वसूली की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए लिया गया है। बैठक में पार्षदों ने पुराने डिफाल्टरों से सख्त वसूली, अवैध संरचनाओं को हटाने और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग की। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि सभी सुझावों को शामिल कर 10 दिनों में अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद इसे राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

विनियम पारित होने की पृष्ठभूमि

पटना नगर निगम क्षेत्र में विज्ञापन शुल्क की वसूली 2014 से प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है। अवैध होर्डिंग्स और यूनिपोल के कारण न केवल राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है बल्कि सड़क सुरक्षा और शहरी सौंदर्य भी प्रभावित हो रहा है। 22 मामले न्यायालय में लंबित हैं। 7 फरवरी को 10वीं साधारण बैठक में पार्षदों ने असहमति जताई थी, जिसके बाद विशेष बैठक बुलाई गई। पार्षद विनय कुमार पप्पू ने 20 वर्षों के राजस्व का श्वेतपत्र जारी करने की मांग की, जबकि सतीष गुप्ता ने पुराने डिफाल्टरों पर सख्ती की बात कही।

बिनोद कुमार ने सार्वजनिक परिसंपत्तियों पर विज्ञापन दर तय करने पर जोर दिया। इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी ने पुलिस चौकी और ट्रैफिक पोस्ट के विज्ञापनों पर भी नजर रखने की मांग की। डॉ. आशीष कुमार सिन्हा ने जोन के भौतिक सत्यापन और सब-जोन निर्धारण के साथ जुर्माने को स्पष्ट करने पर बल दिया।

नए नियमों की मुख्य विशेषताएं

नए विनियम में विज्ञापन की व्यवस्था को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. बड़े होर्डिंग्स/यूनिपोल

  2. सार्वजनिक सुविधा स्थल (बस शेल्टर, पार्क आदि)

  3. वाहन-आधारित विज्ञापन

  4. स्व-विज्ञापन

इनके अलावा किसी अन्य प्रकार के विज्ञापन की अनुमति नहीं होगी।

  • चयन प्रक्रिया: एजेंसी का चयन ई-निविदा के माध्यम से होगा।

  • शुल्क: पंजीकरण शुल्क तीन वर्ष के लिए 1.5 लाख रुपये और नवीकरण के लिए 60 हजार रुपये निर्धारित किया गया है।

  • जुर्माना: मनमानी या नियम उल्लंघन पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगेगा।

  • न्यूनतम दर: सार्वजनिक स्थलों और निजी भूमि/भवन पर विज्ञापन दर कम से कम 50 रुपये प्रति वर्ग फुट होगी।

  • प्रतिबंधित सामग्री: अश्लील, सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वाली, नशीले पदार्थों (शराब, तंबाकू), हिंसा या हथियारों को प्रोत्साहित करने वाली और कानूनी रूप से निषिद्ध वस्तुओं का प्रचार शामिल है। अवैध होर्डिंग्स पर पूर्ण रोक लगेगी।


विज्ञापन प्रबंधन इकाई का गठन

बैठक में सर्वसम्मति से विज्ञापन प्रबंधन इकाई गठित करने का निर्णय लिया गया। यह इकाई निगम क्षेत्र में सभी विज्ञापनों की देखरेख, अनुमति प्रक्रिया, राजस्व संग्रह और अवैध विज्ञापनों पर नियंत्रण करेगी। प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होगी।

रेलवे की तर्ज पर अब मेट्रो और एयरपोर्ट परिसरों में लगे विज्ञापनों से भी निगम 25 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा। वर्तमान में रेलवे स्टेशनों से यह शुल्क मिल रहा है।

ई-निविदा पर पार्षदों का विरोध

पार्षदों ने छोटे कार्यों के लिए ई-निविदा का एकस्वर विरोध किया। उन्होंने पुरानी निविदा व्यवस्था बहाल करने की मांग की। महापौर ने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर मंत्री और मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी।

Patna News: उद्देश्य और अपेक्षित लाभ

विनियम का मुख्य उद्देश्य अवैध होर्डिंग्स पर नियंत्रण, राजस्व वृद्धि, सड़क सुरक्षा, दुर्घटनाओं में कमी और शहरी सुंदरीकरण है। पारदर्शी प्रक्रिया से मनमानी खत्म होगी और निगम की आय बढ़ेगी। इससे शहर की छवि बेहतर होगी और यातायात व्यवस्था सुधरेगी।

पार्षदों ने नए वित्तीय वर्ष से क्रियान्वयन की मांग की। नगर आयुक्त ने कहा कि सुझावों को शामिल कर अंतिम प्रारूप जल्द जारी होगा। यह फैसला पटना को अधिक सुव्यवस्थित और राजस्व संपन्न शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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