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Makar Sankranti 2026: 15 जनवरी को मनाया जाएगा मकर संक्रांति का पर्व, तिल दान और माघ स्नान का खास महत्व

उत्तरायण का पर्व, तिल दान-माघ स्नान का खास महत्व; शुभ मुहूर्त और वर्जित कार्य

Makar Sankranti 2026: इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी 2026 को गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य और ज्योतिष आचार्य पंडित भरत उपाध्याय ने भविष्य पुराण, दीपिका ग्रंथ, अनंतभट्ट, अपरार्क और बौधायन धर्मसूत्र जैसे शास्त्रीय ग्रंथों के आधार पर यह तिथि तय की है।

मकर संक्रांति की तिथि कैसे तय हुई?

आचार्य भरत उपाध्याय के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो संक्रांति का समय महत्वपूर्ण होता है। भविष्य पुराण में कहा गया है कि यदि सूर्य प्रदोष या अर्धरात्रि के समय मकर राशि में प्रवेश करता है, तो स्नान-दान अगले दिन किए जाते हैं।

दीपिका ग्रंथ में भी आधी रात के पहले या बाद संक्रांति होने पर निकटवर्ती दिन को पवित्र माना गया है। अनंतभट्ट के अनुसार, अगर संक्रांति आधी रात से पहले हो तो पहले दिन की अंतिम पांच घड़ी और अगर बाद में हो तो दूसरे दिन की शुरुआती पांच घड़ी पुण्यकाल होती है।

अपरार्क और बौधायन धर्मसूत्र में भी सूर्यास्त, प्रदोष या अर्धरात्रि में संक्रांति होने पर दोनों दिन पुण्यदायी बताए गए हैं। इन सभी शास्त्रीय नियमों के आधार पर 15 जनवरी 2026 को प्रातः सूर्योदय के बाद मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।

माघ मास में तिल दान का विशेष महत्व

मकर संक्रांति से माघ मास की शुरुआत होती है। इस महीने तिल दान का बहुत महत्व है। नारद पुराण के अनुसार, माघ स्नान के दौरान अग्नि तापना (अग्नि के पास बैठकर ताप लेना) पूरी तरह वर्जित है।

आचार्य ने बताया कि प्रतिदिन तिल और शर्करा का दान करना चाहिए। इसमें तीन भाग तिल और एक भाग शर्करा मिलाकर दान दिया जाता है।

तिल से कई कार्य करने से पापों का नाश होता है। इनमें शामिल हैं

– तिल से स्नान
– तिल का उबटन
– तिल से हवन
– तिल का तर्पण
– तिल का भोजन
– तिल का दान

स्नान के बाद शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान माधव (विष्णु) की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद विधिपूर्वक हवन करना और एक समय भोजन करने का विधान है।

मकर संक्रांति के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

आचार्य पंडित भरत उपाध्याय ने बताया कि मकर संक्रांति और पूरे माघ मास में अग्नि तापना वर्जित है। साथ ही इस दिन शरीर पर तेल का अभ्यंग (तेल मालिश या लेपन) भी नहीं करना चाहिए। इन नियमों का पालन करने से पर्व का पूरा पुण्य फल मिलता है।

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति उत्तरायण का पर्व है। इस दिन सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है। यह पर्व फसल, खुशहाली और नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। लोग खिचड़ी, तिल के लड्डू, रेवड़ी और गजक बनाकर खाते हैं और दान करते हैं।

गंगा, प्रयागराज, हरिद्वार जैसे पवित्र स्थलों पर माघ स्नान की भीड़ रहती है। लोग सुबह स्नान कर दान-पुण्य करते हैं। जो लोग इस पर्व को विधि-विधान से मनाते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, धन और सुख की प्राप्ति होती है।

15 जनवरी 2026 को सभी लोग इस पावन पर्व को खुशी और श्रद्धा के साथ मनाएं। तिल दान, स्नान और पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आएगी।

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