Land for Job Scam: लालू प्रसाद यादव पर सीबीआई और ईडी की जीच तेज, रेलवे नौकरियों के बदले जमीन का खेल
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 41 लोगों पर भ्रष्टाचार-साजिश के आरोप लगाए; 2004-09 रेल मंत्री काल का मामला
Land for Job Scam: लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव समेत कुल 41 लोगों पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने इसे एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट बताया है।
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप डी की नौकरियां बिना विज्ञापन और पारदर्शी प्रक्रिया के दी गईं। बदले में उम्मीदवारों या उनके परिवार वालों से पटना और अन्य जगहों पर जमीनें बहुत कम कीमत पर ली गईं या गिफ्ट कराई गईं। ये जमीनें लालू परिवार के सदस्यों या उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम हुईं।
सीबीआई ने इस मामले की जांच की। जांच में पता चला कि पटना में करीब 1 लाख 5 हजार वर्ग फीट जमीन महज 26 लाख रुपये में ली गई जबकि उसकी बाजार कीमत 4 करोड़ 39 लाख रुपये से ज्यादा थी। ईडी ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनाया और दावा किया कि यह घोटाला 600 करोड़ रुपये तक फैला है।
कोर्ट ने आदेश में साफ कहा कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। वे और उनका परिवार एक क्रिमिनल एंटरप्राइज की तरह काम कर रहे थे। सार्वजनिक नौकरियों को जमीन हासिल करने के सौदे के रूप में इस्तेमाल किया गया। कोर्ट ने लालू परिवार की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी।
अब इस मामले में नियमित ट्रायल चलेगा। गवाहों की जांच होगी और सबूतों के आधार पर अंतिम फैसला आएगा। कोर्ट ने 41 आरोपियों पर आरोप तय किए जबकि 52 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। इनमें से कुछ रेलवे अधिकारी भी शामिल थे। कुल 103 आरोपियों में से 5 की मौत हो चुकी है।
जमीन किसने दी और किसे मिली नौकरी
जांच एजेंसियों के अनुसार कई लोगों ने जमीन देकर अपने परिवार वालों को रेलवे में नौकरी दिलवाई। कुछ मुख्य उदाहरण इस प्रकार हैं।
संजय राय पटना के रहने वाले हैं। उन्होंने 2008 में 3,375 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी के नाम की। बदले में उनके परिवार के दो सदस्यों को रेलवे में नौकरी मिली।
किशुन देव राव भी पटना से हैं। उन्होंने भी 2008 में 3,375 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी को दी। उनके परिवार के तीन सदस्यों को मुंबई जोन में नौकरी मिली।
हजारी राय पटना के हैं। उन्होंने 2007 में 9,527 वर्ग फीट जमीन एके इंफोसिस्टम को दी। उनके दो भतीजों को रेलवे में नौकरी मिली।
किरण देवी पटना की रहने वाली हैं। उन्होंने 2007 में 80,905 वर्ग फीट जमीन मीसा भारती को दी। उनके बेटे को मुंबई में नौकरी मिली।
लाल बाबू राय पटना से हैं। उन्होंने 1,360 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी को दी। उनके बेटे को नौकरी मिली।
बृज नंदन राय गोपालगंज के हैं। उन्होंने 3,375 वर्ग फीट जमीन दी जो बाद में हेमा यादव को ट्रांसफर हुई। हृदयानंद चौधरी को रेलवे में नौकरी मिली।
विशुन देव राय सिवान के हैं। उन्होंने भी 3,375 वर्ग फीट जमीन दी जो बाद में हेमा यादव को ट्रांसफर हुई। ललन चौधरी के पोते को पश्चिमी रेलवे में नौकरी मिली।
ये सभी जोन मुंबई, कोलकाता, जबलपुर, जयपुर और हाजीपुर जैसे रेलवे जोनों में थे।
Land for Job Scam: जांच कैसे आगे बढ़ी
सीबीआई ने 2022 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की। जांच में कई फाइलें और रजिस्ट्री रिकॉर्ड खंगाले गए। पहली चार्जशीट में सात आरोपी थे। बाद में दूसरी चार्जशीट में आरोपी बढ़कर 78 हो गए। ईडी ने अलग से मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। राष्ट्रपति ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दी।
कोर्ट ने कहा कि यह एक बड़ी साजिश थी। रेलवे की नौकरियां सौदेबाजी का माध्यम बनीं। अब ट्रायल शुरू होगा। लालू परिवार इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील कर सकता है।



