Darbhanga Rape-Murder Case: प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की, बोले- बिहार में बेटियां असुरक्षित, कानून व्यवस्था चरमरा गई है
प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की, बोले- बिहार में बेटियां असुरक्षित, कानून व्यवस्था चरमरा गई। पुलिस पर दमन का आरोप।
Darbhanga Rape-Murder Case: बिहार के दरभंगा जिले में एक छह वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की दिल दहलाने वाली घटना ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। इस मामले में जन सुराज पार्टी के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने बिहार सरकार की कानून व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं और प्रशासन पूरी तरह से अराजकता की स्थिति में है। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि बिहार में बढ़ते अपराधों और महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया, जिसके चलते पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी, लेकिन इसने नए विवादों को जन्म दे दिया है।
बिहार में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, और यह मामला उसकी एक दर्दनाक मिसाल है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025 में दर्ज हुए मामलों में से कई में न्याय की प्रक्रिया धीमी रही है, जिससे पीड़ित परिवारों का विश्वास प्रशासन पर कम होता जा रहा है। दरभंगा जैसा जिला, जो शिक्षा और संस्कृति के लिए जाना जाता है, अब ऐसी घटनाओं से बदनाम हो रहा है। प्रशांत किशोर का हस्तक्षेप इस मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है, खासकर जब राज्य में चुनावी माहौल गर्म है और कानून व्यवस्था एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
घटना की पृष्ठभूमि
यह दुखद घटना दरभंगा के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुंदरपुर इलाके में घटी। छह साल की मासूम बच्ची घर से खेलते हुए लापता हो गई थी, और बाद में उसका शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई, जिसके बाद हत्या की धाराएं जोड़ी गईं। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन स्थानीय समुदाय में गुस्सा इतना बढ़ गया कि विरोध प्रदर्शन होने लगे। प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग की और आरोप लगाया कि पुलिस शुरुआत में लापरवाही बरत रही थी।
इस तरह की घटनाएं बिहार में नई नहीं हैं। राज्य में ग्रामीण इलाकों में बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गरीबी, शिक्षा की कमी और सामाजिक असमानता ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती हैं। दरभंगा, जो मिथिला क्षेत्र का हिस्सा है, वहां पारंपरिक मूल्यों की मजबूत पकड़ है, लेकिन आधुनिक चुनौतियां जैसे बेरोजगारी और माइग्रेशन इन मूल्यों को प्रभावित कर रही हैं। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है, क्योंकि पीड़ित परिवार ने शिकायत की कि शुरुआती घंटों में पुलिस ने ठीक से कार्रवाई नहीं की। बाद में, जब मामला मीडिया में उछला, तो तेजी आई।
बिहार पुलिस के आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में राज्य में बच्चों के खिलाफ अपराधों में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में, इस मामले ने पूरे राज्य में बहस छेड़ दी है कि क्या सरकार पर्याप्त कदम उठा रही है? महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं कागजों पर तो अच्छी लगती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की कमी साफ नजर आती है। इस घटना के बाद, स्थानीय एनजीओ ने भी आवाज उठाई है और मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की जाए।
प्रशांत किशोर का दौरा और परिवार से मुलाकात
जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर 11 फरवरी 2026 को पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिवार के सदस्यों से बातचीत की, उनकी व्यथा सुनी और गहरा दुख व्यक्त किया। किशोर ने कहा कि वे न केवल भावनात्मक समर्थन देने आए हैं, बल्कि न्याय की लड़ाई में हर संभव मदद करेंगे। परिवार ने उन्हें बताया कि घटना के बाद से वे डर के साए में जी रहे हैं और न्याय की उम्मीद कम हो रही है।
प्रशांत किशोर, जो पहले कई राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बना चुके हैं, अब जन सुराज के माध्यम से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं। उनका यह दौरा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे लगातार राज्य सरकार की कमियों को उजागर कर रहे हैं। मुलाकात के दौरान, किशोर ने परिवार को आश्वासन दिया कि वे इस मामले को विधानसभा और अन्य मंचों पर उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में अपराध पीड़ितों को सहायता पहुंचाने में सरकार विफल साबित हो रही है।
इस मुलाकात ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बैटोरी। कई यूजर्स ने किशोर के कदम की सराहना की, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया। लेकिन, पीड़ित परिवार के लिए यह एक उम्मीद की किरण साबित हो सकती है, क्योंकि किशोर का प्रभाव बिहार की राजनीति में बढ़ रहा है।
सरकार पर तीखा हमला: बेटियां असुरक्षित
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं और प्रशासन अराजकता की स्थिति में है। किशोर ने आरोप लगाया कि अपराध होने पर सरकार पीड़ितों की मदद करने के बजाय, न्याय मांगने वालों पर ही कार्रवाई करती है। उन्होंने प्रदर्शनों के बाद पुलिस की गिरफ्तारियों का जिक्र किया और कहा कि इससे डर का माहौल बन रहा है।
बिहार में कानून व्यवस्था एक लंबे समय से विवादास्पद मुद्दा रहा है। विपक्षी दल लगातार आरोप लगाते हैं कि नीतीश कुमार सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है। किशोर ने कहा कि दो घटनाएं हुई हैं- एक बच्ची की हत्या और दूसरी न्याय मांगने वालों पर दमन। यह बयान राज्य की राजनीति को गर्मा सकता है, खासकर जब 2025 के चुनावों के बाद सरकार की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में अपराध दर ऊंची होने का कारण पुलिस बल की कमी और भ्रष्टाचार है। एनसीआरबी रिपोर्ट बताती है कि राज्य में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिसकर्मियों की संख्या राष्ट्रीय औसत से कम है। ऐसे में, किशोर का हमला सरकार को असहज कर सकता है।
पुलिस की कार्रवाई और विवाद
घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन प्रदर्शनों के दौरान छह लोगों को हिरासत में लिया गया। किशोर ने आरोप लगाया कि पुलिस की छापेमारी से इलाके में डर फैल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि न्याय की मांग करने वालों को ही निशाना बनाया जा रहा है।
यह विवाद एससी/एसटी एक्ट से जुड़ा भी बताया जा रहा है, जहां एक गांव के कई लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई कानूनी है, लेकिन विपक्ष इसे सामूहिक दंड बताता है। बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार सक्रिय है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने से जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में स्वतंत्र जांच एजेंसी को शामिल किया जाए।
बिहार में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की स्थिति
बिहार में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। राज्य में हर साल हजारों मामले दर्ज होते हैं, लेकिन दोषसिद्धि दर कम है। 2025 में, बच्चों के खिलाफ अपराधों में 20 प्रतिशत वृद्धि हुई। कारणों में सामाजिक असमानता, लिंग भेदभाव और शिक्षा की कमी शामिल हैं।
सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं, जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, लेकिन क्रियान्वयन में कमी है। एनजीओ रिपोर्ट्स बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान की जरूरत है। इस घटना ने फिर से मांग उठाई है कि पॉक्सो एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
इस मामले ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। विपक्षी दल जैसे आरजेडी ने सरकार को घेरा है। किशोर का हस्तक्षेप जन सुराज को मजबूत कर सकता है। मंत्री प्रकाश ने कहा कि न्याय होगा, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बना रहा है।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है, जहां लोग सुरक्षा पर चिंता जता रहे हैं।
Darbhanga Rape-Murder Case: न्याय की उम्मीद
पीड़ित परिवार अब न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। किशोर का समर्थन उम्मीद जगाता है, लेकिन असली चुनौती सिस्टम में सुधार है। बिहार को सुरक्षित बनाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है। यह घटना एक चेतावनी है कि अगर सुधार नहीं हुए, तो ऐसी त्रासदियां जारी रहेंगी।



