Cyber Fraud: लोन की लालच में इन 10 फर्जी एप को भूलकर भी न करें इंस्टॉल, विदेशी ताकतें चुरा रही हैं आपका डेटा
साइबर यूनिट ने 10 फर्जी लोन ऐप्स की पहचान की, विदेशी ताकतें चुरा रही हैं डेटा, 30-40% कटौती के साथ धमकी और सोशल शेमिंग, तुरंत अनइंस्टॉल करें
Cyber Fraud: डिजिटल इंडिया के इस दौर में स्मार्टफोन से लोन लेना भले ही आसान हो गया हो, लेकिन इसी आसानी की आड़ में साइबर ठगों ने एक खतरनाक जाल बिछा रखा है। साइबर यूनिट ने एक बड़ा खुलासा करते हुए 10 ऐसे फर्जी लोन एप की पहचान की है जिन्हें विदेशी शत्रुतापूर्ण संस्थाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है। ये एप न केवल आम नागरिकों की निजता के लिए खतरा हैं बल्कि देश की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद चिंताजनक बताए गए हैं।
ये हैं वो 10 खतरनाक फर्जी लोन एप
साइबर यूनिट ने जिन 10 फर्जी लोन एप की पहचान की है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
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दिया क्रेडिट एप
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रुपेनेक्स एप
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फंड एक्सेस एप
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बेचराजी डिजिटल बही एप
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ओकलोन-पर्सनल लोन एप
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केयरपे-सिंपल लोन्स एंड फास्ट कैश एप
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क्रेडिब्लून एप
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रुपी लेक-लाइन क्रेडिट एप
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ईज फंड एप
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मनीडाक एप
इन एप को प्लेस्टोर पर 4.4 से 4.6 स्टार की ऊंची रेटिंग दिखाई जा रही है और हजारों रिव्यूज भी लिखे गए हैं जो पूरी तरह फर्जी हो सकते हैं।
कैसे काम करता है ठगी का यह खतरनाक जाल?
गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर अपराध समन्वय केंद्र की जांच में सामने आया है कि इन एप के पीछे विदेशी संस्थाएं सक्रिय हैं। ठगी की शुरुआत सोशल मीडिया और इंटरनेट पर दिखाए जाने वाले उन आकर्षक विज्ञापनों से होती है जो बिना किसी दस्तावेज के महज चंद मिनटों में लोन देने का वादा करते हैं।
जैसे ही कोई व्यक्ति इन एप को इंस्टॉल करता है, वह अनजाने में अपनी पूरी फोन कॉन्टैक्ट लिस्ट, गैलरी, लोकेशन और निजी संदेशों का एक्सेस इन साइबर ठगों को दे देता है। यह सारा डेटा तुरंत विदेशी सर्वरों पर भेज दिया जाता है।
लोन देने से पहले ही काट लेते हैं 30-40 फीसदी
इन एप की लोन प्रक्रिया भी पूरी तरह धोखाधड़ी पर आधारित है। ये एप सात से पंद्रह दिनों की बेहद छोटी अवधि के लिए लोन देते हैं और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लोन की राशि का 30 से 40 फीसदी पहले ही काट लिया जाता है। यानी अगर किसी ने 10 हजार रुपये का लोन लिया तो उसके खाते में केवल 6 से 7 हजार रुपये ही पहुंचते हैं, लेकिन चुकाना पूरे 10 हजार ही होते हैं।
पीड़ित का सच्चा उदाहरण
मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले रंजन यादव ने पिछले साल जुलाई में रुपेनेक्स एप से 10 हजार रुपये का लोन लिया था। लोन मिलने से पहले ही 40 प्रतिशत राशि काट ली गई। समय पर किस्त नहीं चुकाने पर उनके रिश्तेदारों को फोन कर धमकाया गया। इस मामले में पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
सोशल शेमिंग है सबसे घातक हथियार
भुगतान में जरा सी भी देरी होने पर विदेशी कॉल सेंटर्स से धमकियों का तांता शुरू हो जाता है। पीड़ित के फोन से चुराई गई कॉन्टैक्ट लिस्ट का उपयोग कर उनके परिजनों और दोस्तों को कॉल किया जाता है। सबसे खतरनाक तरीका यह है कि पीड़ित की तस्वीरों को मॉर्फ कर अश्लील बना दिया जाता है और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर वसूली की जाती है। यह डिजिटल हफ्ता वसूली का एक नया और खतरनाक तरीका बन चुका है।
बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि किसी भी एप से लोन लेने से पहले सेबी और आरबीआई (RBI) की आधिकारिक वेबसाइट पर उस एप या कंपनी का पंजीकरण जरूर जांचें। हमेशा केवल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित और पंजीकृत संस्थाओं से ही लोन लेना चाहिए। किसी भी अनजान एप को अपनी गैलरी, कॉन्टैक्ट लिस्ट या लोकेशन का एक्सेस देने से बचें।
अगर किसी भी फर्जी एप के जरिए ठगी का शिकार हों तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, डेटा और पैसे बचाने की उतनी ही अधिक संभावना रहेगी।
Cyber Fraud: निष्कर्ष
फर्जी लोन एप का यह जाल केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की मानसिक शांति, सामाजिक प्रतिष्ठा और निजता को भी गहरी चोट पहुंचाता है। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी लुभावने विज्ञापन के झांसे में न आएं और लोन लेने के लिए हमेशा बैंक या किसी विश्वसनीय वित्तीय संस्था से ही संपर्क करें।



