CBSE पाठ्यक्रम में मैथिली को मिली आधिकारिक जगह, 2026-27 सत्र से छात्रों को मिलेगा नया विकल्प

पटना/नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने मैथिली भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है। यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। इस फैसले को मिथिला क्षेत्र की भाषा, संस्कृति और पहचान के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री Jayant Chaudhary द्वारा सांसद Gopal Ji Thakur को भेजे गए आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि CBSE ने माध्यमिक स्तर पर मैथिली को विषय के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया है।
पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और मातृभाषा आधारित शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से एक है।
CBSE Academic वेबसाइट पर भी दिखा मैथिली पाठ्यक्रम
CBSE Academic की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026-27 के सेकेंडरी करिकुलम में मैथिली को भाषा विषयों की सूची में शामिल किया गया है। इससे साफ है कि बोर्ड स्तर पर इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले सत्र से छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं के साथ मैथिली चुनने का विकल्प भी मिलेगा।
NCERT भी तैयार कर रहा अध्ययन सामग्री
आधिकारिक पत्र के अनुसार, NCERT भारतीय भाषाओं में शिक्षा सामग्री और अनुवाद कार्य पर लगातार काम कर रहा है।
- कक्षा 5 तक मातृभाषा आधारित शिक्षा पर जोर
- भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद
- क्षेत्रीय भाषाओं को स्कूल शिक्षा से जोड़ने की पहल
- नई शिक्षा नीति के तहत बहुभाषी शिक्षा मॉडल को बढ़ावा जैसे कदमों पर काम किया जा रहा है।
सम्राट चौधरी ने X पर जताई खुशी
बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने इस फैसले का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि CBSE पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल किया जाना “मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव के लिए गर्व का विषय” है।
उन्होंने इसे “ऐतिहासिक” और “अत्यंत सराहनीय” कदम बताते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का मजबूत माध्यम बनेगा।
मिथिला क्षेत्र में खुशी का माहौल
मैथिली भाषा को CBSE पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद मिथिलांचल क्षेत्र में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। लंबे समय से सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों द्वारा इसकी मांग उठाई जा रही थी।



