The Family Man Season 3 Review: मनोज बाजपेयी की स्पाई थ्रिलर का धमाकेदार रिटर्न, लेकिन पुरानी चमक गायब
उत्तर-पूर्व भारत को बैकग्राउंड बनाकर इंटरनेशनल हथियार डीलिंग पर फोकस, लेकिन पारिवारिक ड्रामा का बैलेंस बिगड़ा।

The Family Man Season 3 Review: प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई द फैमिली मैन सीजन 3 ने दर्शकों को फिर से सिकंदर तिवारी की दुनिया में ले जाकर उत्साहित कर दिया है। मनोज बाजपेयी की अगुवाई में राज एंड डीके की यह स्पाई थ्रिलर सीरीज़ उत्तर-पूर्व भारत को बैकग्राउंड बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित है। 7 एपिसोड वाली यह सीरीज़ इंटरनेशनल हथियार डीलिंग और हाई-स्टेक कांस्पिरेसी को उकेरती है, लेकिन परिवारिक ड्रामा का तड़का कम होने से कहानी असंतुलित लगती है। रिव्यू में प्लॉट का ओवरव्यू बिना स्पॉयलर के दिया गया है, ताकि आप खुद देख सकें।
प्लॉट ओवरव्यू: उत्तर-पूर्व का टेंशन, लेकिन फैमिली ड्रामा कम
सीजन 3 उत्तर-पूर्व भारत के संवेदनशील मुद्दों पर फोकस करता है। सिकंदर तिवारी (मनोज बाजपेयी) अपनी खुफिया दुनिया में लौटते हैं, लेकिन कहानी ज्यादातर नेशनल सिक्योरिटी के ’90ml नीट’ पर टिकी है। पहले सीज़न की तरह फैमिली ड्रामा (60ml) और सिक्योरिटी (30ml) का बैलेंस गायब है। इंटरनेशनल आर्म्स डीलिंग और कांस्पिरेसी के बीच सिकंदर की जिंदगी उलझती है, लेकिन फैमिली एंगल कमजोर रहता है। कहानी धीरे-धीरे बोरिंग हो जाती है, जैसे गले में जलती शराब बिना नशे के। उत्तर-पूर्व सेटिंग और कॉन्फ्लिक्ट्स पाटाल लोक सीजन 2 से मिलते-जुलते लगते हैं।
स्टार कास्ट का जादू, लेकिन स्टोरी कमजोर
सीरीज़ की सबसे बड़ी ताकत इसका एन्सेम्बल कास्ट है, जो ‘कंपलीट एक्टिंग शॉप’ जैसा लगता है। मनोज बाजपेयी सिकंदर के रूप में फिर से कमाल करते हैं, लेकिन हताश और हार मानते दिखते हैं, जो पहले सीज़न की जीत वाली इमेज से अलग है। जयदीप अहलावत रुक्मा के रूप में विलेन बने हैं, जो हाथीराम चौधरी से अलग लेकिन पावरफुल है। निम्रत कौर मीरा के रूप में लंदन सेट सीन में धारदार डायलॉग देती हैं, जो मेल चरित्र को नीचा दिखाता है। अन्य कलाकार जैसे विजय सेतुपति, गुल पनाग, शरीब हाशमी, प्रियामणि, निम्रत कौर, जुगल हंसराज, आदित्य श्रीवास्तव, दिलीप ताहिल, विपिन शर्मा, सीमा बिस्वास, दर्शन कुमार, श्रेया धनवंतरि, अश्लेषा ठाकुर और वेदांत सिन्हा सभी शानदार हैं। हर कलाकार अकेले ही कहानी संभाल सकता है।
कमजोरियां: कहानी का असंतुलन, क्लाइमेक्स का फ्लॉप
सीरीज़ की कमजोरी इसकी कहानी और बैलेंस है। पहले सीज़न का फैमिली-सिक्योरिटी कॉकटेल (60ml फैमिली, 30ml सिक्योरिटी) गायब है। यहां 90ml सिक्योरिटी है, जो बिना नशे के गले जलाती है। सिकंदर की स्क्रीन टाइम 40% से कम, फैमिली सीन गायब। डायलॉग्स में ‘मुझे पता नहीं’ ज्यादा, जो कन्फ्यूजिंग लगता है। राज एंड डीके (सुमन कुमार के साथ) ने कास्ट को बर्बाद कर दिया। कहानी क्लिशे और दोहरावपूर्ण है। क्लाइमेक्स सबसे खराब, बिना रेजोल्यूशन के। उत्तर-पूर्व सेटिंग पाटाल लोक सीजन 2 जैसी लगती है, जहां जयदीप अहलावत का रोल दोहराया गया।
रेटिंग: 1/5
सीरीज़ कास्ट के बावजूद कहानी से निराश करती है। पहले सीज़न की चमक गायब। दर्शक सिकंदर की जीत देखना चाहते हैं, लेकिन हार देखकर बोर हो जाते हैं। देखें अगर कास्ट का फैन हैं, लेकिन उम्मीदें कम रखें।



