Bihar Politics: जदयू-राजद में चंदा विवाद पर भड़की आग, सुनील सिंह का बड़ा दावा- 27 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी से जदयू को मिले 24 करोड़, तबादला-पोस्टिंग पर भी सनसनीखेज आरोप
सुनील सिंह का बड़ा दावा- 27 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी से जदयू को 24 करोड़ चंदा, तबादला-पोस्टिंग पर भी सनसनीखेज आरोप
Bihar Politics: बिहार की सियासत में महागठबंधन के दो प्रमुख सहयोगी दलों जदयू और राजद के बीच शराब कंपनियों से चंदा लेने के मुद्दे पर खुला घमासान छिड़ गया है। जदयू के मुख्य प्रवक्तक नीरज कुमार द्वारा राजद पर लगाए गए आरोपों के जवाब में राजद के एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने पलटवार करते हुए जदयू पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान सुनील सिंह ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया कि जदयू ने एक कंपनी से 24 करोड़ रुपये का चंदा लिया, जिसका सालाना टर्नओवर महज 27 करोड़ रुपये है। इस विवाद ने बिहार की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है और दोनों दलों के बीच विश्वास की कमी को उजागर किया है।
विवाद की शुरुआत और जदयू के आरोप
विवाद की शुरुआत जदयू के मुख्य प्रवक्तक नीरज कुमार के बयान से हुई, जिसमें उन्होंने राजद पर शराब कंपनियों से अवैध चंदा लेने का आरोप लगाया था। नीरज कुमार ने दावा किया था कि राजद ने चुनावी फंडिंग के लिए शराब माफिया से पैसे लिए और यह राशि पार्टी के खाते में नहीं दिखाई गई। इस आरोप ने महागठबंधन के अंदर तनाव पैदा कर दिया, क्योंकि दोनों दल बिहार सरकार में साझेदार हैं। जदयू ने इसे राजनीतिक हमला करार देते हुए राजद से स्पष्टीकरण की मांग की थी।
सुनील सिंह का पलटवार और दस्तावेजी दावे
राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए जदयू पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जदयू से बड़ा भ्रष्टाचारी दल कोई नहीं है।” सुनील सिंह ने दस्तावेज दिखाते हुए आरोप लगाया कि जदयू ने किंग महेंद्र की कंपनी से इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए पांच वर्षों तक भारी राशि ली। खासकर ए2बीएस इंफ्रास्ट्रक्चर नामक कंपनी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 27 करोड़ रुपये है, लेकिन इसने जदयू को 24 करोड़ रुपये का चंदा दिया।
सुनील सिंह ने सवाल उठाया कि जिस कंपनी की कुल संपत्ति दस हजार रुपये से अधिक नहीं बताई जाती, उससे इतनी बड़ी राशि चंदे के रूप में कैसे स्वीकार की गई? उन्होंने इसे स्पष्ट भ्रष्टाचार का मामला करार दिया और कहा कि जदयू ने ढाई सौ करोड़ रुपये से अधिक का चंदा वैध तरीके से प्राप्त किया है।
स्मार्ट मीटर और तबादला-पोस्टिंग पर गंभीर आरोप
सुनील सिंह ने आगे आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर परियोजना के नाम पर भी जदयू ने कंपनियों से करोड़ों रुपये लिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार “हिरण का चोला पहनकर भेड़िया की तरह काम कर रही है।” इसके अलावा, उन्होंने राज्य में तबादला-पोस्टिंग को लेकर भी बड़ा दावा किया। सुनील सिंह का कहना था कि बिना पैसे के कोई स्थानांतरण नहीं होता, चाहे विभाग कोई भी हो। उन्होंने दावा किया कि जदयू शासित विभागों में यह सिलसिला जारी है और लाखों-करोड़ों रुपये के लेन-देन के बिना कोई अधिकारी अपनी पसंद का स्थान नहीं पा सकता।
राजद का बचाव और पारदर्शिता का दावा
सुनील सिंह ने राजद का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी ने जो भी चंदा लिया है, वह पूरी तरह विधिवत खाते में दर्ज है और चुनाव आयोग के सामने सार्वजनिक रूप से घोषित किया गया है। उन्होंने जदयू पर आरोप लगाया कि उनकी फंडिंग में पारदर्शिता की कमी है और इलेक्टोरल बॉन्ड के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। राजद नेता ने कहा कि जदयू के आरोप राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं और पार्टी इन आरोपों का मुकाबला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर करेगी।
राजनीतिक प्रभाव और महागठबंधन पर असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में महागठबंधन की सरकार चल रही है और लोकसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। जदयू और राजद के बीच इस तरह का खुला आरोप-प्रत्यारोप गठबंधन की एकता पर सवाल उठा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंदा विवाद से दोनों दलों की छवि को नुकसान पहुंच सकता है और विपक्षी दल बीजेपी इसे मुद्दा बनाकर हमला कर सकती है।
जदयू की ओर से अभी तक इस पलटवार पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी जल्द ही दस्तावेजों के साथ जवाब देगी। इस बीच, बिहार विधानसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा होने की संभावना है।
Bihar Politics: आगे क्या?
अब सारी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जदयू इस आरोपों का क्या जवाब देता है। यदि दस्तावेजों का खुलासा हुआ या चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज हुई, तो मामला और उलझ सकता है। बिहार की सियासत में चंदा और भ्रष्टाचार के मुद्दे हमेशा गर्म रहते हैं, और इस बार यह महागठबंधन के अंदर ही फूट का कारण बन सकता है। दोनों दलों को अब पारदर्शिता साबित करने की चुनौती है, अन्यथा जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।
यह विवाद बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रहा है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।



