Bihar Politics: सूर्य के रुख का इंतजार कर रहे पीके, जन सुराज पार्टी के आंगन में गहरा सन्नाटा, मकर संक्रांति के बाद नई यात्रा से मिलेगी संजीवनी?
2025 हार के बाद पार्टी ठप; मकर संक्रांति बाद महिलाओं पर फोकस यात्रा, धन जुटाने में लगे पीके
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी (जसुपा) में सन्नाटा पसरा हुआ है। पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) अभी बिहार से बाहर हैं और अगली रणनीति के लिए धन जुटाने में लगे हैं। पटना में पार्टी के चारों परिसरों – दो कार्यालय, एक विश्राम स्थल और कंट्रोल रूम – में गतिविधियां लगभग ठप हैं। चुनावी हार ने पार्टी को सकते में डाल दिया है। कार्यकर्ता मकर संक्रांति के बाद पीके की नई यात्रा का इंतजार कर रहे हैं, जो पार्टी को नई संजीवनी दे सकती है।
चुनावी हार के बाद पार्टी में ठहराव
यह स्थिति जन सुराज की दो साल की मेहनत के बाद आई है। 2022 में पदयात्रा शुरू की थी। 2024 में पार्टी बनाई। उपचुनाव में 10 प्रतिशत वोट मिले थे, जिससे उत्साह था। लेकिन विधानसभा चुनाव में 238 प्रत्याशी उतारने के बावजूद सिर्फ 3 प्रतिशत वोट मिले। कई सीटों पर जमानत जब्त हो गई। हार के बाद पीके ने भितिहरवा आश्रम में गांधी प्रतिमा के सामने मौन व्रत रखा। उन्होंने हार स्वीकार की और नई शुरुआत की बात कही।
पीके बिहार से बाहर, धन जुटाने में लगे
पीके अभी बिहार से बाहर हैं। सूत्र बताते हैं कि वे धन संग्रह में लगे हैं। पार्टी को चलाने के लिए फंड की जरूरत है। पीके ने अपनी 90 प्रतिशत संपत्ति और आने वाले 5 साल की 90 प्रतिशत कमाई पार्टी को दान करने की घोषणा की है। लेकिन बड़े अभियान के लिए और पैसा चाहिए। मकर संक्रांति के बाद पीके की नई यात्रा शुरू होने की संभावना है। इसे बिहार नवनिर्माण संकल्प यात्रा या बिहार संकल्प यात्रा कहा जा सकता है। यह डेढ़ साल तक चल सकती है।
नई यात्रा का फोकस और रणनीति
यात्रा का फोकस महिलाओं पर होगा। सरकार की 10 हजारी योजना की हकीकत जांचेंगे। जीविका दीदियों से मिलेंगे। महिलाओं को 2 लाख रुपये देने का वादा पूरा कराने की लड़ाई लड़ेंगे। पीके ने कहा है कि जब तक सरकार सभी महिलाओं को 2 लाख नहीं दे देती, राजनीति नहीं छोड़ेंगे। यह राजनीतिक पैंतरा है, जो चल सकता है। यात्रा से 1.18 लाख वार्डों तक पहुंच बनाई जाएगी।
चुनावी परिणाम से मिली सीख
जन सुराज को 3 प्रतिशत वोट मिले हैं। 35 सीटों पर जीत के अंतर से ज्यादा वोट लेकर स्पॉइलर की भूमिका निभाई। कई सीटों पर तीसरे नंबर पर रही। यह मद्धिम लेकिन आशा की किरण है। हार से सीख लेकर नई रणनीति बनाई जा रही है।
जन सुराज का भविष्य और चुनौतियां
जन सुराज अब नई रणनीति पर काम कर रही है। हार से हतोत्साहित नहीं होना है। पीके का दावा है कि नीतीश और लालू की राजनीति खत्म होने वाली है। जन सुराज नई पीढ़ी की राजनीति लाएगी। लेकिन फंड और संगठन की मजबूती जरूरी है।
Bihar Politics: नई यात्रा से उम्मीद
बिहार की राजनीति में जन सुराज तीसरा विकल्प बनना चाहती है। चुनावी हार के बाद सन्नाटा है, लेकिन मकर संक्रांति के बाद नई यात्रा से उम्मीद जागेगी। पीके की मेहनत और रणनीति पर नजर रहेगी। जन सुराज का भविष्य इस यात्रा पर टिका है।



