Bihar Politics: 32 साल पुराने मामले में गिरफ्तार सांसद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ी, कोर्ट में पेशी के बाद जमानत याचिका दायर
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद तबीयत बिगड़ी, IGIMS से PMCH शिफ्ट, अब IGIC में रेफर
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने। 1995 के एक पुराने मामले में पुलिस ने शुक्रवार रात उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें पहले IGIMS में भर्ती किया गया, फिर PMCH शिफ्ट किया गया। आज सुबह सिविल कोर्ट में पेशी हुई। पप्पू यादव ने जमानत याचिका दायर की है। उनकी सेहत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष ने इसे साजिश बताया है।
गिरफ्तारी कैसे हुई
पुलिस ने शुक्रवार रात पटना स्थित आवास पर छापा मारा। सांसद को हिरासत में लिया गया। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय कई पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में थे। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया सही नहीं थी। सांसद ने अपनी खराब तबीयत का हवाला देकर विरोध किया। लेकिन पुलिस उन्हें ले गई।
यह मामला 1995 का है। उस समय पप्पू यादव पर कुछ आरोप लगे थे। वे पहले जमानत पर थे। वकील शिवनंदन भारती का कहना है कि बेल टूटने के बाद पुलिस ने नोटिस जानबूझकर दबाए। धारा 82 की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। सीधे धारा 83 के तहत कुर्की और गिरफ्तारी हुई। यह कानून के खिलाफ है।
अस्पतालों में शिफ्टिंग और इलाज पर विवाद
गिरफ्तारी के बाद पुलिस सांसद को IGIMS ले गई। वहां रात भर इलाज चला। पप्पू यादव के फेसबुक पेज और निजी सचिव ने दावा किया कि IGIMS में बेड नहीं मिला। उन्हें स्ट्रेचर पर रखा गया। इलाज में लापरवाही हुई। आज सुबह उन्हें PMCH शिफ्ट किया गया। वहां से IGIC में रेफर किया गया।
समर्थकों का कहना है कि अस्पतालों में ठीक से देखभाल नहीं हुई। उनकी जान को खतरा है। सांसद ने नीट छात्रा के समर्थन में आवाज उठाई थी। इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। यह साजिश है।
कोर्ट में पेशी और जमानत याचिका
आज सिविल कोर्ट में पप्पू यादव को पेश किया गया। उनकी कानूनी टीम ने जमानत याचिका दायर की। कोर्ट अब फैसला सुनेगा। अगर जमानत मिली तो रिहाई हो सकती है। अगर नहीं मिली तो जेल जाना पड़ सकता है। लेकिन उनकी तबीयत को देखते हुए अस्पताल के कैदी वार्ड में रखने का विकल्प भी है।
कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह फैसला न सिर्फ पप्पू यादव के भविष्य को तय करेगा। बिहार की सियासत पर भी असर डालेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप
विपक्ष ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। कई नेताओं ने कहा कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। पप्पू यादव के समर्थक सोशल मीडिया पर एकजुट हुए हैं। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। कहा गया कि सांसद के साथ साजिशन व्यवहार किया जा रहा है। उनकी जान को खतरा है।
दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई हुई है। पुराना मामला है। अदालत के आदेश पर गिरफ्तारी हुई। कोई साजिश नहीं है।
मामला क्या है
1995 का मामला पटना से जुड़ा है। उस समय पप्पू यादव पर कुछ आरोप लगे थे। केस लंबा चला। वे जमानत पर थे। लेकिन हाल में बेल टूट गई। पुलिस ने नोटिस जारी किए। सांसद ने कहा कि नोटिस उन्हें नहीं मिले। इसलिए वे कोर्ट नहीं पहुंचे। पुलिस ने धारा 82 और 83 के तहत कार्रवाई की।
वकील का दावा है कि प्रक्रिया में गड़बड़ी है। धारा 82 की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। बिना घोषित भगोड़ा बताए गिरफ्तारी नहीं हो सकती।
Bihar Politics: बिहार की सियासत में असर
पप्पू यादव बिहार की राजनीति में चर्चित नाम हैं। वे कई बार सांसद रहे। पूर्णिया से जीते। उनकी गिरफ्तारी से राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। समर्थक सड़कों पर उतर सकते हैं।
सांसद की तबीयत भी चिंता का विषय है। अस्पताल में भर्ती होने से मामला संवेदनशील हो गया है। कोर्ट का फैसला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को प्रभावित करेगा।
अभी सबकी नजरें कोर्ट पर हैं। जमानत मिलती है या नहीं, यह साफ होगा। पप्पू यादव की सेहत भी सुधार की उम्मीद है।



