Bihar Politics: नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं? पटना में जदयू कार्यकर्ताओं का तीखा विरोध, सीएम हाउस के बाहर रो-रोकर लगाए नारे
पटना में CM हाउस के बाहर जदयू कार्यकर्ताओं का तीखा प्रदर्शन, रोते-रोते लगाए नारे- नीतीश बाबू बिहार मत छोड़िए, ललन सिंह-सं जय झा पर 'जयचंद' जैसे आरोप
Bihar Politics: बिहार की सियासी गलियारों में एक बार फिर हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलें तेज होते ही जदयू कार्यकर्ताओं ने पटना के मुख्यमंत्री आवास के बाहर भारी प्रदर्शन किया। सैकड़ों कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए सड़क पर उतर आए। कुछ तो भावुक होकर फूट-फूटकर रो पड़े। उनका साफ कहना था- “नीतीश बाबू बिहार मत छोड़िए, दिल्ली जाना बंद कीजिए।” यह दृश्य देखकर राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं कि आखिर पार्टी के अपने कार्यकर्ता ही इतने बेचैन क्यों हैं।
कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूटा, नारेबाजी से गूंजा सीएम हाउस
मुख्यमंत्री आवास के गेट के बाहर सुबह से ही जदयू के कार्यकर्ता जमा होने शुरू हो गए थे। जैसे-जैसे राज्यसभा नामांकन की खबर फैली, भीड़ बढ़ती गई। कार्यकर्ता हाथों में प्लेकार्ड लिए खड़े थे। कुछ ने तो नीतीश कुमार की तस्वीरें थाम रखी थीं और जोर-जोर से नारे लगा रहे थे- “नीतीश बाबू लौट आइए, बिहार आपका इंतजार कर रहा है।”
माहौल इतना गर्म था कि कई कार्यकर्ता भावुक होकर रोने लगे। एक कार्यकर्ता ने रोते हुए कहा, “हमने घर-घर जाकर नीतीश कुमार के नाम पर वोट मांगा। जनता ने नीतीश पर भरोसा किया, किसी और पर नहीं। अगर वे चले गए तो हमारा क्या होगा?” उनके इस बयान ने पूरे प्रदर्शन को भावुक मोड़ दे दिया। महिलाएं भी सड़क पर बैठकर विरोध जता रही थीं। पुलिस को भारी बल तैनात करना पड़ा, लेकिन कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से ही अपना गुस्सा जता रहे थे।
ललन सिंह और संजय झा पर भड़के कार्यकर्ता, लगे ‘जयचंद’ जैसे नारे
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं का गुस्सा खासतौर पर दो नेताओं पर फूटा- केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और जदयू नेता संजय झा। कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “ललन सिंह मुर्दाबाद”, “संजय झा मुर्दाबाद” और सबसे तीखा नारा- “ललन सिंह जयचंद है”। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी के कुछ शीर्ष नेता ही नीतीश कुमार को बिहार से दिल्ली भेजने की साजिश रच रहे हैं।
वे बार-बार कह रहे थे कि नीतीश कुमार ने जदयू को खड़ा किया, विकास किया, लेकिन कुछ नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए उन्हें राज्यसभा भेजना चाहते हैं। इस नारेबाजी ने पूरे घटनाक्रम को और तनावपूर्ण बना दिया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त फोर्स बुलाई, लेकिन कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
विधायक प्रेम मुखिया की गाड़ी घेरी, हाथापाई तक की नौबत
प्रदर्शन चरम पर था तभी जदयू विधायक प्रेम मुखिया अपनी गाड़ी में मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। जैसे ही उनकी कार नजर आई, कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया। कुछ ने गाड़ी पर हाथ भी मारे। विधायक को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला। आखिरकार उन्हें मजबूरन वापस लौटना पड़ा। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि विधायक भी उन्हीं नेताओं की लाइन पर चल रहे हैं जो नीतीश को दिल्ली भेजना चाहते हैं। एक कार्यकर्ता ने चिल्लाते हुए कहा, “सभी नेता एक हो गए हैं, लेकिन हम जनता के सवाल पूछेंगे।” यह दृश्य बिहार की सियासत में असंतोष की गहराई को दिखा रहा था।
रोते-रोते कार्यकर्ता बोले- नीतीश नहीं तो हम कहां जाएंगे
प्रदर्शन में शामिल कई कार्यकर्ता इतने भावुक हो गए कि वे फूट-फूटकर रो पड़े। एक वरिष्ठ कार्यकर्ता राजीव ने कहा, “मैं 20 साल से जदयू के साथ हूं। नीतीश कुमार ने बिहार को नई पहचान दी। सड़कें बनीं, बिजली आई, अपराध कम हुआ। हमने उन्हीं के नाम पर वोट मांगे। अब अगर वे चले गए तो जनता हमें क्या कहेगी?”
दूसरे कार्यकर्ता ने जोड़ा, “नीतीश बाबू बिहार की पहचान हैं। उनके बिना जदयू अधूरी है। हम दिल्ली नहीं जाने देंगे।” इन भावुक अपीलों ने पूरे प्रदर्शन को एक अलग ही रंग दे दिया। सोशल मीडिया पर भी वीडियो वायरल हो रहे हैं जहां कार्यकर्ता नीतीश कुमार की तस्वीरें दिखाकर रो रहे हैं।
ललन सिंह का बड़ा बयान- नीतीश का फैसला सभी को मानना होगा
इस पूरे हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता ललन सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जदयू पार्टी नीतीश कुमार जी ने बनाई है। जो फैसला वे लेंगे, वह सभी को स्वीकार करना होगा।” ललन सिंह ने नीतीश कुमार की बिहार में की गई विकास योजनाओं की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि नीतीश का विकास कार्य ऐतिहासिक है और पार्टी उनके हर फैसले के साथ खड़ी है।
हालांकि ललन सिंह के इस बयान से कार्यकर्ताओं का गुस्सा कम नहीं हुआ। वे कह रहे थे कि नेता ऊपर की बातें करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
राज्यसभा नामांकन की तैयारी?
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। चर्चा है कि वे बिहार विधानसभा पहुंचकर नामांकन पत्र भरेंगे। इस मौके पर भाजपा के कुछ बड़े नेता भी उनके साथ नजर आ सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी संभव है।
यह कदम नीतीश कुमार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बिहार में गठबंधन की राजनीति को देखते हुए यह फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है।
अमित शाह का पटना दौरा, सियासी हलचल बढ़ी
इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पटना आना भी चर्चा का विषय बन गया है। वे दोपहर करीब 12 बजे पटना पहुंच रहे हैं। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बताया कि शाह का दौरा राज्यसभा नामांकन से जुड़ा हो सकता है। उनकी मौजूदगी में नामांकन कार्यक्रम और भी अहम हो जाता है।
अमित शाह के इस दौरे को बिहार की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। विपक्षी दल भी इस पर नजर रखे हुए हैं।
सीएम आवास पर बुलाई गई अहम बैठक, रणनीति पर मंथन
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच बुधवार शाम मुख्यमंत्री आवास पर महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी शामिल थे। बैठक में मौजूदा सियासी स्थिति और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
सूत्र बताते हैं कि बैठक में नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने और पार्टी की एकता को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। हालांकि बैठक के बाद कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
बिहार की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। उन्होंने कई बार गठबंधन बदले, लेकिन विकास पर हमेशा फोकस रखा। अब जब राज्यसभा जाने की बात चल रही है, तो कार्यकर्ताओं में बेचैनी स्वाभाविक है। वे डरते हैं कि नीतीश के बिना पार्टी कमजोर हो जाएगी।
दूसरी ओर, कुछ विश्लेषक इसे रणनीतिक कदम मान रहे हैं। राज्यसभा में रहकर नीतीश राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका बढ़ा सकते हैं। लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाएं साफ हैं- वे नीतीश को मुख्यमंत्री के रूप में ही देखना चाहते हैं।
Bihar Politics: जनता की प्रतिक्रिया और आगे क्या?
प्रदर्शन की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर बिहारवासी अपनी राय रख रहे हैं। कुछ नीतीश के फैसले का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ कार्यकर्ताओं के साथ खड़े हैं। विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सवाल उठाए हैं।
अभी स्थिति साफ नहीं है, लेकिन एक बात तय है- नीतीश कुमार का कोई भी फैसला बिहार की सियासत पर गहरा असर डालेगा। कार्यकर्ताओं का यह विरोध सिर्फ एक शुरुआत है। आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।



