Bihar News: लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, राबड़ी, तेजस्वी समेत 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा शुरू
राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू, राबड़ी, तेजस्वी, मीसा समेत 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी
Bihar News: लैंड फॉर जॉब घोटाले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और बेटी मीसा भारती समेत कुल 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। स्पेशल जज विशाल गोग्ने ने 9 जनवरी को दिए आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। आज की सुनवाई में कोर्ट ने औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए। अब इस मामले में नियमित ट्रायल चलेगा।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘आपराधिक गिरोह की तरह काम’
कोर्ट ने लालू परिवार और अन्य आरोपियों पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहा था। रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने सरकारी नौकरी को सौदेबाजी का हथियार बनाया। इसका उद्देश्य अपने परिवार के लिए अचल संपत्तियां हासिल करना था। कोर्ट ने CBI की चार्जशीट और दस्तावेजों पर विचार करते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश तथ्यों से गंभीर आरोप सामने आते हैं। नौकरी और जमीन के बीच कथित लेन-देन के संकेत स्पष्ट हैं।
जांच का दायरा: जमीन ट्रांसफर और कारोबारी लेन-देन
अदालत ने यह भी कहा कि यह केस सिर्फ अनियमित नियुक्तियों तक सीमित नहीं है। जमीन के ट्रांसफर, कीमतों में गड़बड़ी, परिवार और करीबियों के नाम संपत्तियां और उनसे जुड़े कारोबारी लेन-देन—इन सभी का आपसी संबंध जांच का विषय है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है। बचाव पक्ष को ट्रायल के दौरान CBI के साक्ष्यों को चुनौती देने का पूरा अवसर मिलेगा।
क्या है पूरा मामला? (2004-2009 की साजिश)
CBI के मुताबिक यह पूरी साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई थी। उस समय लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। अलग-अलग रेलवे जोनों में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां की गईं और बदले में जमीनें लालू परिवार के नाम कराई गईं। जांच एजेंसी ने लालू यादव के साथ-साथ राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की है। आरोप है कि नाम मात्र की कीमत पर जमीन ट्रांसफर कराई गई।
52 लोग हुए बरी, 41 पर चलेगा केस
कोर्ट ने 52 लोगों को बरी कर दिया था। लेकिन लालू परिवार सहित 41 लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने के बाद मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है। आज की सुनवाई में कई आरोपियों के कोर्ट में पेश होने की संभावना है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को बचाव का पूरा मौका मिलेगा।
Bihar News: लंबी कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया
यह मामला लंबे समय से चल रहा है। CBI ने 2022 में पहली चार्जशीट दायर की थी। उसके बाद कई सप्लीमेंट्री चार्जशीट आईं। कोर्ट ने सभी दस्तावेजों और सबूतों पर गौर करने के बाद फैसला सुनाया है। अब ट्रायल में गवाहों के बयान, दस्तावेजों की जांच और क्रॉस-एग्जामिनेशन होगा। अंतिम फैसला सबूतों और कानूनी दलीलों के आधार पर आएगा।
लालू यादव के पास लोअर कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का विकल्प है। राजद नेताओं का कहना है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध है। वहीं एनडीए नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीत बताया है। यह मामला बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।



