Bihar News: नीट छात्रा मौत मामले में हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने फैसला 11 मार्च तक सुरक्षित रखा, जेल अधीक्षक को जारी किया नोटिस
नीट छात्रा मौत मामले में मनीष रंजन की जमानत याचिका खारिज, फैसला 11 मार्च तक सुरक्षित, जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी
Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के चर्चित मामले में एक बार फिर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग के मालिक मनीष कुमार रंजन की नियमित जमानत याचिका पर सोमवार को विशेष न्यायाधीश की अदालत में लंबी सुनवाई हुई। करीब दो घंटे तक चली बहस के बाद कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया और फैसला 11 मार्च तक सुरक्षित रख लिया। साथ ही, जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह मामला जनवरी 2026 से सुर्खियों में है, जब पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही एक 18 वर्षीय छात्रा (जहानाबाद निवासी) को बेहोश हालत में पाया गया था। शुरुआत में पुलिस ने इसे सुसाइड या स्लीपिंग पिल्स ओवरडोज बताया, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सेक्सुअल असॉल्ट के संकेत मिले। फोरेंसिक जांच में भी रेप की पुष्टि हुई, जिसके बाद मामला पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया। छात्रा की मौत 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में हो गई थी।
सुनवाई में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप
सोमवार को पाक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। आरोपी के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं। केस डायरी में उनकी कोई संलिप्तता नहीं दिखती, किसी गवाह ने उनका नाम नहीं लिया और न ही कोई शंका जताई गई है।
इसके विपरीत, सूचक (मृतका के परिवार) के वकील और विशेष लोक अभियोजक ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मृतका की मां ने अदालत में विरोध याचिका दाखिल की है। मुख्य आरोपी मनीष रंजन को मास्टरमाइंड बताया गया। अगर वे गैरकानूनी तरीके से हिरासत में हैं, तो उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करें।
पीड़ित परिवार के वकील ने सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाए। कहा कि जांच सही ढंग से नहीं हो रही और परिवार को धमकियां मिल रही हैं। इस संबंध में थाने में आवेदन दिया गया, लेकिन सीबीआई ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर सीबीआई के वकील ने कहा कि जमानत सुनवाई में जांच पर बहस का अधिकार नहीं है। दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक हुई, जिसके बाद न्यायाधीश 10 मिनट के लिए चैंबर में चले गए।
सीबीआई और एसआईटी की स्थिति, कागजात सौंपने की मांग
दोबारा सुनवाई शुरू होने पर सीबीआई ने आवेदन दाखिल कर कहा कि एसआईटी को बचे हुए कागजात सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया जाए और केस को सीबीआई के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में स्थानांतरित किया जाए।
सीबीआई ने यह भी कहा कि अगर जमानत दी जाती है, तो कुछ शर्तें लगाई जा सकती हैं। लेकिन अदालत ने पूछा कि अगर अवैध हिरासत है, तो जमानत की जरूरत क्यों? एसआईटी के अनुसंधानकर्ता ने बताया कि केस सीबीआई को सौंप दिया गया है, इसलिए आरोपी की जरूरत नहीं है। सीबीआई ने भी यही कहा कि फिलहाल आरोपी की जरूरत नहीं।
अदालत ने जेल अधीक्षक से पूछा कि आरोपी को कितनी बार अदालत में पेश किया गया। जवाब न दे पाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और 11 मार्च तक जवाब मांगा गया।
मामले का बैकग्राउंड और जांच की स्थिति
9 जनवरी 2026 को चित्रगुप्त नगर थाने में मृतका के पिता के बयान पर मामला दर्ज हुआ। शुरुआत में पटना पुलिस और एसआईटी जांच कर रही थी, लेकिन बाद में केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। मनीष रंजन को 14 जनवरी को गिरफ्तार किया गया और वे बेउर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
पिछली सुनवाइयों में भी कोर्ट ने जांच एजेंसियों से सवाल किए थे। पीड़ित पक्ष ने जांच में लापरवाही और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं। परिवार को धमकियों की शिकायत है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यह मामला बिहार में शिक्षा और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। नीट जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली छात्राओं के हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
Bihar News: आगे क्या?
अगली सुनवाई 11 मार्च को सीबीआई के मजिस्ट्रेट कोर्ट में होगी। तब जमानत पर अंतिम फैसला आ सकता है। साथ ही, जेल अधीक्षक का जवाब और केस ट्रांसफर पर फैसला होगा। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में है, जबकि आरोपी पक्ष निर्दोष होने का दावा कर रहा है।
यह मामला न केवल कानूनी प्रक्रिया बल्कि छात्राओं की सुरक्षा और जांच एजेंसियों की जवाबदेही पर भी रोशनी डाल रहा है। बिहार में ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर तेजी से कार्रवाई की मांग बढ़ रही है।



