Bihar News: बक्सर में गंगा किनारे विकास की नई उम्मीद, अहिल्या घाट से जेल घाट तक 6.5 किमी लंबा रिवर फ्रंट बनेगा
बक्सर में गंगा किनारे अहिल्या घाट से जेल घाट तक 6.5 किमी रिवर फ्रंट, पक्के घाट, वॉकवे, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
Bihar News: बिहार के बक्सर जिले के निवासियों के लिए खुशखबरी है। गंगा नदी के किनारे अहिल्या घाट से जेल घाट तक लगभग 6.5 किलोमीटर लंबा क्षेत्र अब शानदार रिवर फ्रंट के रूप में विकसित होगा। बिहार सरकार के नगर विकास विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) इस काम को संभाल रहा है और इसके लिए एजेंसी का चयन करने की निविदा प्रक्रिया चल रही है।
यह परियोजना बक्सर के गंगा घाटों को न केवल सुंदर बनाएगी बल्कि पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा में बड़ा बदलाव लाएगी। अब तक ज्यादातर विकास कार्य रामरेखा घाट और सती घाट तक सीमित रहे हैं, लेकिन नई योजना से जिले के सभी प्रमुख घाटों को जोड़ा जाएगा। इससे रामरेखा घाट पर त्योहारों के दौरान भीड़ का दबाव कम होगा और अन्य घाट भी आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
बुडको की प्रारंभिक योजना के अनुसार इस रिवर फ्रंट में पक्के घाट, वॉकवे (पाथवे), पीसीसी रोड और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। करीब 1.25 किलोमीटर क्षेत्र में पक्के घाट बनाए जाएंगे, जबकि पूरा पाथवे बक्सर नगर परिषद क्षेत्र के सामने गंगा तट को कवर करेगा। इससे घाटों पर आने-जाने में आसानी होगी और श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से गंगा स्नान कर सकेंगे।
मुख्य घाटों जैसे मठिया मुहल्ला, सिद्धनाथ घाट, गोला घाट, सती घाट, रानी घाट, बंगला घाट आदि पर पक्की सीढ़ियां और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। ठोरा नदी के संगम तक का पूरा किनारा इस परियोजना का हिस्सा होगा। इससे बक्सर का गंगा तट एक आधुनिक रिवर फ्रंट जैसा दिखेगा, जहां लोग शाम की सैर, व्यायाम और धार्मिक गतिविधियां कर सकेंगे।
डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया
बुडको ने डीपीआर तैयार करने के लिए एजेंसी चुनने की निविदा जारी की है। चयनित एजेंसी को तीन महीने के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। डीपीआर में लागत अनुमान, डिजाइन, पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन और निर्माण चरण शामिल होंगे। रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। यह परियोजना बिहार सरकार की शहरी विकास और पर्यटन बढ़ावा देने की नीतियों का हिस्सा है।
बक्सर में गंगा घाट धार्मिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक भी हैं। रामरेखा घाट वह स्थान है जहां भगवान राम, लक्ष्मण और विश्वामित्र ने गंगा पार की थी। अहिल्या उद्धार आश्रम, ताड़का वध स्थल और सिद्धाश्रम जैसे स्थल रामायण से जुड़े हैं। रिवर फ्रंट विकसित होने से इन स्थलों तक पहुंच आसान होगी और पर्यटक अधिक समय यहां बिता सकेंगे।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
बक्सर गंगा के किनारे बसा होने से पहले से ही पर्यटन की क्षमता रखता है। रामरेखा घाट पर पंचकोशी परिक्रमा मेला, दशहरा और अन्य त्योहारों में लाखों श्रद्धालु आते हैं। लेकिन सीमित सुविधाओं के कारण भीड़ प्रबंधन मुश्किल होता है। नया रिवर फ्रंट घाटों को जोड़कर भीड़ बांटेगा और अन्य घाटों को भी लोकप्रिय बनाएगा।
स्थानीय व्यापारियों, नाविकों, होटल और कैफेटेरिया संचालकों को फायदा होगा। पर्यटन बढ़ने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बक्सर के लोग लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। अब ठोस कदम उठने से उम्मीद जगी है कि बक्सर पटना, भागलपुर जैसे शहरों की तरह गंगा रिवर फ्रंट का आकर्षण बनेगा।
Bihar News: चुनौतियां और उम्मीदें
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण, बाढ़ प्रभाव और स्थानीय लोगों की सहमति महत्वपूर्ण होगी। गंगा के किनारे अतिक्रमण और प्रदूषण जैसी समस्याएं हैं, जिन्हें दूर करना होगा। सरकार ने बुडको को तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। यदि समय पर डीपीआर तैयार हो और फंडिंग मिले तो निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सकता है।
यह परियोजना बिहार में गंगा किनारे विकास की नई कड़ी है। इससे बक्सर न केवल धार्मिक केंद्र बनेगा बल्कि पर्यटन हब के रूप में उभरेगा। स्थानीय निवासी और श्रद्धालु इस बदलाव का इंतजार कर रहे हैं।



