Bihar News: बिहार में चीनी उद्योग को नई ऊर्जा, 9 बंद मिलें चालू और 25 नई मिलों की स्थापना का लक्ष्य, गन्ने की खेती में पौने दो लाख हेक्टेयर विस्तार का प्लान
9 बंद चीनी मिलें चालू, 25 नई मिलों की स्थापना, गन्ने की खेती में 2 लाख हेक्टेयर विस्तार, लाखों किसानों और युवाओं को लाभ
Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य के चीनी उद्योग को मजबूत बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर गन्ना उद्योग विभाग ने 9 बंद पड़ी चीनी मिलों को जल्द चालू करने और 25 नई चीनी मिलों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया है। ‘सात निश्चय-3’ के अंतर्गत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ संकल्प के तहत यह योजना चल रही है। इससे राज्य में करीब एक करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य पूरा करने में मदद मिलेगी।
सरकार का मुख्य फोकस गन्ने की खेती के रकबे को बढ़ाने पर है। वर्तमान में राज्य में लगभग 2.50 लाख हेक्टेयर में गन्ना उगाया जा रहा है। नई और पुरानी मिलों को पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने के लिए इसे पौने दो लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की तैयारी है। गन्ना उद्योग विभाग ने संबंधित जिलों में गन्ना क्षेत्र विस्तार के लिए कार्य योजना मांगी है।
बंद मिलों का पुनरुद्धार और नई मिलों की स्थापना
बिहार में कई वर्षों से बंद पड़ी 9 चीनी मिलों को चालू करने की प्रक्रिया तेज है। इनमें पश्चिम चंपारण के चनपटिया, पूर्वी चंपारण के बाराचकिया और मोतिहारी, गोपालगंज के सासामूसा, सारण के मढ़ौरा, मुजफ्फरपुर के मोतिपुर, समस्तीपुर की समस्तीपुर मिल, तथा दरभंगा के सकरी और रैयाम मिल शामिल हैं। सासामूसा मिल को सबसे पहले चालू करने की तैयारी है।
इसके साथ ही 25 नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए 25 जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक मिल के लिए कम से कम 100 एकड़ भूमि चिह्नित करने का काम चल रहा है। अधिकांश जिलों में भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या अंतिम चरण में है। नई मिलों के लिए गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक संबंधित क्षेत्र में 5 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त गन्ना खेती का लक्ष्य रखा गया है।
गन्ना क्षेत्र विस्तार के लिए विशेष निर्देश
गन्ना उद्योग विभाग ने बगहा, बेतिया, मोतिहारी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी और सीवान जैसे प्रमुख जिलों के सहायक निदेशकों और चीनी मिलों के महाप्रबंधकों को पत्र भेजकर शीघ्र कार्य योजना उपलब्ध कराने को कहा है। इन जिलों में गन्ना किसानों को प्रोत्साहित करने, बीज वितरण, सिंचाई सुविधा और तकनीकी सहायता पर फोकस रहेगा।
कुछ प्रमुख मिलों के लिए गांवों को आरक्षित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। उदाहरण के लिए सकरी मिल के लिए मधुबनी जिले के अंधराथाढ़ी, बबुरही, घोघाडीहा, झंझारपुर आदि प्रखंडों के कुल 686 गांवों को शामिल किया गया है। रैयाम मिल के लिए दरभंगा और मधुबनी के कई प्रखंडों के 580-580 गांव चिह्नित हैं। इससे मिलों को नियमित और पर्याप्त गन्ना मिलेगा, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा।
किसानों और युवाओं के लिए फायदे
यह योजना बिहार के गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। बंद मिलों के चालू होने से गन्ने की खरीद बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। नई मिलों से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। युवा पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार पासवान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को उचित मूल्य, समय पर भुगतान और युवाओं को स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराना है। पिछले पेराई सत्र में 10 चालू मिलों ने 427 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा था और किसानों को 1395 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। नई योजना से उत्पादन और भुगतान दोनों में कई गुना वृद्धि की उम्मीद है।
Bihar News: चुनौतियां और सरकार की रणनीति
बिहार में चीनी उद्योग का पुनरुद्धार आसान नहीं है। पुरानी मिलों में मशीनरी अपडेट, फंडिंग और पर्यावरण मानकों का पालन जरूरी है। नई मिलों के लिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और निवेशकों को आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण है। सरकार ने टास्क फोर्स गठन और उच्च स्तरीय बैठकों के माध्यम से इन पर नजर रखने की व्यवस्था की है।
यह फैसला बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। गन्ना किसान, मजदूर और युवा इस बदलाव का इंतजार कर रहे हैं। यदि समय पर क्रियान्वयन हुआ तो राज्य चीनी उत्पादन में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।



