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Bihar News: बिहार में जल्द होगी 46 हजार शिक्षकों की मेगा भर्ती, दिव्यांगों के लिए नए स्कूल और सामाजिक योजनाओं का विस्तार

46 हजार पद, मार्च में विज्ञापन। दिव्यांग बच्चों के लिए 6 नए विशेष विद्यालय, महिला-दिव्यांग अभ्यर्थियों को आर्थिक सहायता।

Bihar News: बिहार सरकार शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में बड़े कदम उठा रही है। राज्य में शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने के लिए चौथे चरण की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इसमें कुल 46 हजार पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिसका विज्ञापन मार्च में जारी किया जा सकता है। साथ ही, दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को मजबूत करने के लिए नए विशेष विद्यालय खोले जा रहे हैं। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ाया जा रहा है और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल दिव्यांग तथा महिला अभ्यर्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। ये पहलें राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होंगी।

चौथे चरण में बंपर अवसर

बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने शिक्षकों की कमी को देखते हुए चौथे चरण की भर्ती की तैयारी पूरी कर ली है। शिक्षा विभाग ने 44,500 से अधिक रिक्त पदों की सूची तैयार की है, जिसमें प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के शिक्षक शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, मार्च में विज्ञापन जारी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह भर्ती न केवल युवाओं को रोजगार देगी बल्कि विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात को भी बेहतर बनाएगी।

पिछले चरणों में हुई भर्तियों से सबक लेते हुए इस बार प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने पर जोर दिया जा रहा है। उम्मीदवारों को प्रतियोगी परीक्षा से गुजरना होगा, जिसमें उनकी शैक्षणिक योग्यता और विषय ज्ञान की जांच की जाएगी। राज्य के लाखों बेरोजगार युवा इस अवसर का इंतजार कर रहे हैं, जो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारेगा बल्कि बिहार की शिक्षा गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा।

माध्यमिक स्तर पर सबसे अधिक जरूरत

शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, रिक्त पदों का बंटवारा विभिन्न स्तरों पर किया गया है। प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) पर लगभग 10,500 पद खाली हैं। यह स्तर बच्चों की बुनियादी शिक्षा का आधार होता है, जहां खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया होती है। इन पदों पर योग्य शिक्षकों की नियुक्ति से प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत होगी और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी।

मध्य विद्यालय स्तर (कक्षा 6 से 8) पर स्थिति थोड़ी नियंत्रण में है, लेकिन यहां भी 9,500 पदों की आवश्यकता है। इस स्तर पर छात्र विषयों की बारीकियों से परिचित होते हैं, इसलिए विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से छात्रों का विकास प्रभावित होता है। भर्ती के बाद इन कक्षाओं में बेहतर शिक्षण संभव होगा, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए तैयार करेगा।

सबसे बड़ी चुनौती माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 से 12) पर है, जहां करीब 25,000 पद रिक्त हैं। यह कुल रिक्तियों का आधा हिस्सा है। बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस स्तर पर विषय विशेषज्ञों की जरूरत होती है। विज्ञान, गणित, भाषा जैसे विषयों में कमी से छात्रों के परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। नई भर्ती से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में भी सुधार आएगा, जहां शिक्षकों की अनुपस्थिति सबसे अधिक समस्या है।

नए विद्यालयों की सौगात

बिहार विधानसभा में समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने दिव्यांग बच्चों के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। राज्य के छह प्रमंडलों तिरहुत, सारण, कोशी, पूर्णिया, मुंगेर और मगध में दृष्टिहीन तथा मूक-बधिर विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक विद्यालय में 500 बच्चों की क्षमता होगी और यहां 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान में केवल पटना, दरभंगा और भागलपुर में ऐसे स्कूल हैं, जो आठवीं तक सीमित हैं। अब इनमें भी विस्तार किया जाएगा।

यह कदम दिव्यांग बच्चों के अधिकारों को मजबूत करेगा। विशेष शिक्षण विधियों जैसे ब्रेल लिपि और सांकेतिक भाषा का उपयोग होगा। साथ ही, विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती पर फोकस किया जा रहा है। इससे न केवल शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा बल्कि दिव्यांग बच्चों को समाज में बराबरी का मौका मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

रोगियों और बच्चों को सहारा

समाज कल्याण विभाग ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और मजबूत किया है। राज्य में एड्स से प्रभावित 72,704 व्यक्तियों को 1,500 रुपये की सहायता दी जा रही है। इसी तरह, 14,461 कुष्ठ रोगियों को भी मासिक आर्थिक मदद प्रदान की जाती है। ये योजनाएं इन लोगों को आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक सम्मान देती हैं।

इसके अलावा, 1,15,064 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 39,55,000 बच्चों को पूरक पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। ये केंद्र न केवल पोषण प्रदान करते हैं बल्कि प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य जांच का भी माध्यम हैं। कुपोषण से लड़ाई में ये केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित होता है।

दिव्यांग और महिलाओं को प्रोत्साहन

सरकार ने दिव्यांग और महिला अभ्यर्थियों को प्रशासनिक सेवाओं में बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं शुरू की हैं। यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए 1 लाख रुपये की सहायता मिलेगी। बीपीएससी के लिए यह राशि 50,000 रुपये है।

महिला विकास निगम के तहत महिलाओं को भी समान लाभ दिया जाएगा। यूपीएससी प्रारंभिक उत्तीर्ण करने पर 1 लाख और बीपीएससी के लिए 50,000 रुपये। यह पहल महिलाओं और दिव्यांगों को कोचिंग तथा अध्ययन सामग्री के लिए आर्थिक मदद प्रदान करेगी, जिससे वे उच्च पदों पर पहुंच सकें। समाज के कमजोर तबकों को मुख्यधारा में लाने का यह प्रयास सराहनीय है।

Bihar News: शिक्षा व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव

46 हजार शिक्षकों की भर्ती से बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा। वर्तमान में कई स्कूलों में एक शिक्षक कई कक्षाएं संभालते हैं, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है। नई नियुक्तियां शिक्षक-छात्र अनुपात को आदर्श स्तर पर लाएंगी, विशेषकर माध्यमिक स्तर पर जहां विशेषज्ञों की कमी है।

ग्रामीण इलाकों में सुधार से शहरी-ग्रामीण असमानता कम होगी। बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बेहतर होंगे और छात्र उच्च शिक्षा तथा रोजगार के लिए बेहतर तैयार होंगे। दिव्यांग विद्यालयों और सामाजिक योजनाओं से समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, ये कदम बिहार को शिक्षा और कल्याण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में हैं। राज्य सरकार की ये पहलें न केवल तात्कालिक राहत देंगी बल्कि दीर्घकालिक प्रगति का आधार भी तैयार करेंगी।

 

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