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Bihar News: डेहरी-ऑन-सोन की 150 साल पुरानी पश्चिमी मुख्य नहर का 518 करोड़ से आधुनिकीकरण, 18.5 किमी हिस्सा बनेगा पक्का

150 साल पुरानी डेहरी-ऑन-सोन की नहर का 18.5 किमी हिस्सा पक्का होगा, रोहतास के किसानों को बड़ा लाभ, BWSIMP परियोजना के तहत कार्य शुरू

Bihar News: रोहतास जिले के डेहरी-ऑन-सोन में स्थित ऐतिहासिक पश्चिमी मुख्य नहर अब आधुनिक रूप धारण करने वाली है। ब्रिटिश काल में 1872 में बनी इस डेढ़ शताब्दी पुरानी नहर का 18.50 किलोमीटर लंबा हिस्सा 518 करोड़ रुपये की लागत से पक्का किया जाएगा। यह कार्य बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना (BWSIMP) के तहत हो रहा है, जिससे हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और सिंचाई व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा।

परियोजना का विस्तार और महत्व

पश्चिमी मुख्य नहर सोन नहर प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सोन नदी से पानी लेकर रोहतास और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई करती है। लंबे समय से रखरखाव की कमी के कारण नहर जर्जर हो चुकी थी, जिससे पानी का रिसाव बढ़ गया और सिंचाई क्षमता घटी। अब बिहार सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने का फैसला लिया है।

परियोजना के तहत डेहरी फाल (शून्य किलोमीटर) से शुरू होकर 18.50 किलोमीटर तक नहर का पक्कीकरण होगा। इसमें पहले हिस्से में डेहरी फाल से 7.10 किलोमीटर और दूसरे में आगे 11.40 किलोमीटर (कुल 18.50 किमी) शामिल है। इस आधुनिकीकरण से नहर की जल संचयन क्षमता बढ़ेगी, रिसाव रुकेगा और पानी की बर्बादी कम होगी। किसानों को समय पर और पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, यह परियोजना राज्य की बड़ी सिंचाई योजनाओं में से एक है। सोन कमांड क्षेत्र में लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। नहर के आधुनिक होने से न केवल रोहतास बल्कि पड़ोसी जिलों में भी कृषि उत्पादकता बढ़ेगी। यह योजना बिहार की ‘हर खेत को पानी’ मुहिम को मजबूती देगी और जल संकट से जूझ रहे किसानों के लिए वरदान साबित होगी।

टेंडर प्रक्रिया और निर्माण की तैयारी

परियोजना को दो भागों में बांटा गया है ताकि कार्य तेजी से पूरा हो सके। पहले भाग में डेहरी फाल से 7.10 किलोमीटर और दूसरे में आगे का हिस्सा शामिल है। टेंडर प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। तकनीकी बोली में एक दर्जन से अधिक एजेंसियों के प्रस्ताव स्वीकार किए गए हैं। वित्तीय बोली 23 फरवरी 2026 को खोली जाएगी।

इसके बाद चयनित ठेकेदार को कार्यादेश जारी किया जाएगा और निर्माण कार्य तुरंत शुरू हो जाएगा। विभाग ने समयबद्ध तरीके से परियोजना पूरी करने का लक्ष्य रखा है। मुख्य अभियंता अजय कुमार सिंह ने बताया कि सीमेंट कंक्रीट लाइनिंग से नहर मजबूत और टिकाऊ बनेगी। नहर के तल और दोनों किनारों पर उच्च गुणवत्ता वाली लाइनिंग की जाएगी, जिसमें सीमेंट, बालू और अन्य सामग्री का सही अनुपात रखा जाएगा।

यह विधि न केवल पानी बचाएगी बल्कि नहर का जीवनकाल कई गुना बढ़ा देगी। रखरखाव की लागत भी कम होगी, जिससे सरकार को लंबे समय में फायदा होगा।

ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान चुनौतियां

1872 में एनिकट सोन बराज के साथ बनी यह नहर ब्रिटिश इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। तब यह क्षेत्र की कृषि क्रांति का आधार बनी। लेकिन दशकों से उचित मरम्मत न होने से नहर में दरारें, रिसाव और जमा गाद की समस्या बढ़ गई। टेल एंड तक पानी नहीं पहुंच पाता था, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता था।

अब आधुनिकीकरण से ये सभी समस्याएं दूर होंगी। पानी का रिसाव 30-40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इससे नहर की क्षमता बढ़ेगी और अधिक भूमि सिंचित हो सकेगी। किसान संगठनों ने इस योजना का स्वागत किया है। एक स्थानीय किसान ने कहा, “पहले पानी की कमी से फसलें सूख जाती थीं। अब उम्मीद है कि हर खेत तक पानी पहुंचेगा।”

किसानों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ रोहतास के किसानों को मिलेगा। क्षेत्र में गेहूं, चावल, दलहन और सब्जियां उगाई जाती हैं। बेहतर सिंचाई से उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेगा और प्रवास कम होगा।

पर्यावरण की दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है। पानी की बचत से भूजल स्तर स्थिर रहेगा और सूखे की समस्या कम होगी। नहर लाइनिंग से मिट्टी का कटाव रुकेगा और नहर की संरचना मजबूत बनेगी।

बिहार सरकार की जल सुरक्षा योजना के तहत यह एक हिस्सा है। राज्य में अन्य नहरों का भी आधुनिकीकरण चल रहा है। विश्व बैंक सहायता से चल रही BWSIMP परियोजना कुल 4,415 करोड़ की है, जिसमें सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन शामिल है। पश्चिमी मुख्य नहर का यह हिस्सा उसकी शुरुआत है।

Bihar News: भविष्य की संभावनाएं

विभाग की योजना है कि सोन नहर प्रणाली के अन्य हिस्सों का भी जीर्णोद्धार किया जाए। भविष्य में पूरी नहर प्रणाली डिजिटल मॉनिटरिंग से जुड़ेगी, जिससे पानी का बेहतर वितरण होगा। किसानों को मोबाइल ऐप से पानी की जानकारी मिल सकेगी।

यह परियोजना बिहार की कृषि को नई दिशा देगी। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि राज्य का लक्ष्य है कि हर खेत तक पानी पहुंचे और बाढ़ से राहत मिले। रोहतास जैसे क्षेत्रों में यह योजना विकास का नया अध्याय लिखेगी।

स्थानीय लोग उत्साहित हैं। निर्माण शुरू होने पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कुल मिलाकर, 518 करोड़ का यह निवेश बिहार की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करेगा और किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाएगा।

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