Bihar Bhawan in Mumbai: मुंबई में बिहार भवन नहीं बनने देंगे, मुंबई के इस नेता ने नीतीश सरकार को दी धमकी
30 मंजिला भवन के निर्माण को लेकर बढ़ा विवाद, मनसे नेता ने किया विरोध का ऐलान
Bihar Bhawan in Mumbai: महाराष्ट्र में एक बार फिर बिहार भवन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक वरिष्ठ नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को धमकी भरी चेतावनी देते हुए कहा है कि वे मुंबई में बिहार भवन नहीं बनने देंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तर्ज पर मुंबई में भी 30 मंजिला बिहार भवन बनाने की योजना को हाल ही में मंजूरी दी है।
मनसे नेता का यह बयान महाराष्ट्र और बिहार के बीच फिर से तनाव पैदा कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में राज ठाकरे और उनकी पार्टी ने कई बार बिहार और उत्तर भारत से आने वाले प्रवासियों को लेकर विवादास्पद बयान दिए हैं। अब बिहार भवन के निर्माण को लेकर दिया गया यह बयान एक नई बहस को जन्म दे सकता है।
30 मंजिला होगा मुंबई का बिहार भवन
बिहार सरकार की योजना के अनुसार, मुंबई में बनने वाला बिहार भवन 30 मंजिला होगा। यह एक भव्य और आधुनिक इमारत होगी जो दिल्ली स्थित बिहार भवन की तरह कई सुविधाएं प्रदान करेगी। इस भवन में बिहार से मुंबई आने वाले लोगों के लिए आवास की व्यवस्था होगी। साथ ही बिहार सरकार के विभिन्न कार्यालय और प्रशासनिक सुविधाएं भी यहां होंगी।
विशेष रूप से इस भवन में मरीजों के लिए खास इंतजाम किए जाने की योजना है। बिहार से चिकित्सा उपचार के लिए मुंबई आने वाले मरीज और उनके परिजनों को यहां रुकने की सुविधा मिलेगी। मुंबई में कई बड़े और विशिष्ट अस्पताल हैं जहां बिहार से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। उनकी सुविधा के लिए यह भवन महत्वपूर्ण होगा।
नीतीश कुमार की सरकार ने पिछले दिनों इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी दी थी। बिहार सरकार का मानना है कि मुंबई जैसे महत्वपूर्ण शहर में बिहार भवन होना आवश्यक है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में बिहारी रहते हैं और काम करते हैं। यह भवन उनकी जरूरतों को पूरा करने में मददगार होगा।
मनसे का विरोध और राजनीतिक पृष्ठभूमि
मनसे के नेता का विरोध कोई नई बात नहीं है। राज ठाकरे की पार्टी ने अतीत में भी उत्तर भारत, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश से आने वाले प्रवासी मजदूरों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मनसे का तर्क रहा है कि बाहर से आने वाले लोग महाराष्ट्र के स्थानीय लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं। हालांकि इस तर्क की आलोचना भी व्यापक रूप से हुई है और इसे संकीर्ण राजनीति बताया गया है।
2008 और उसके बाद के वर्षों में मुंबई में उत्तर भारतीयों, खासकर बिहारियों और उत्तर प्रदेश के लोगों को निशाना बनाकर कई घटनाएं हुई थीं। मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा ट्रेनों में बैठे उत्तर भारतीयों की पिटाई की घटनाएं हुई थीं। इससे देशभर में मनसे की कड़ी आलोचना हुई थी। कई राजनीतिक दलों और नागरिक समाज ने इसे देश की एकता और अखंडता के खिलाफ बताया था।
हालांकि हाल के वर्षों में मनसे की राजनीति में कुछ बदलाव आया है। राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से हाथ मिलाया था। लेकिन अब फिर से बिहार भवन को लेकर दिया गया यह बयान पुरानी राजनीति की ओर लौटने का संकेत हो सकता है।
Bihar Bhawan in Mumbai: संविधान और कानूनी पहलू
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी राज्य सरकार को दूसरे राज्य में अपना भवन बनाने का पूरा अधिकार है। यह भारतीय संविधान की मूल भावना के अनुरूप है। हर राज्य को देश के किसी भी हिस्से में अपनी सुविधाएं स्थापित करने की स्वतंत्रता है। दिल्ली में लगभग सभी राज्यों के भवन हैं और यही व्यवस्था अन्य प्रमुख शहरों में भी है।
मुंबई भारत का वित्तीय और व्यावसायिक केंद्र है। यहां देश के सभी हिस्सों से लोग रहते और काम करते हैं। ऐसे में बिहार सरकार का अपने नागरिकों की सुविधा के लिए भवन बनाना पूरी तरह उचित है। किसी भी राजनीतिक दल को इसका विरोध करने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि प्रवासी मजदूरों और अन्य राज्यों से आने वाले लोगों के खिलाफ ऐसी राजनीति देश की एकता के लिए खतरनाक है। भारत एक संघीय देश है जहां सभी नागरिकों को देश के किसी भी हिस्से में रहने, काम करने और बसने का पूरा अधिकार है। इस अधिकार में किसी भी तरह की बाधा डालना असंवैधानिक है।
बिहार सरकार ने अभी तक मनसे के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन संभावना है कि बिहार सरकार अपनी योजना पर अडिग रहेगी। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या यह विवाद आगे बढ़ता है या शांत हो जाता है।



