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Bihar News: बिहार परिवहन विभाग का ई-चालान अभियान, हर महीने 6 करोड़ रुपये की वसूली

बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों पर कड़े नियमों का सख्ती से पालन हो रहा है, जिससे वाहन मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है।

Bihar News: बिहार परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर ई-डिटेक्शन सिस्टम (e-detection system) लागू करके वाहन नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध एक कठोर अभियान शुरू किया है। इस प्रणाली के माध्यम से हर महीने औसतन छह करोड़ रुपये के चालान काटे जा रहे हैं, जिससे राज्य में सड़क सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को बनाए रखने में सफलतापूर्वक सहायता मिल रही है।

प्रणाली का कार्यप्रणाली – हाई-टेक निगरानी

ई-डिटेक्शन सिस्टम राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के तकनीकी सहयोग से संचालित होता है, जो वाहन पंजीकरण और दस्तावेजों का केंद्रीय डेटाबेस बनाए रखता है। जब कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है, तो हाई-रेजोल्यूशन कैमरे स्वचालित रूप से उसकी नंबर प्लेट और फास्टैग की स्कैनिंग करते हैं।

इसके पश्चात सिस्टम केंद्रीय डेटाबेस से मिलान करता है कि वाहन के फिटनेस, बीमा और प्रदूषण प्रमाण-पत्र अद्यतन हैं या नहीं। यदि कोई भी आवश्यक दस्तावेज अद्यतन नहीं पाया जाता है, तो सिस्टम तुरंत संबंधित प्रावधानों के तहत ई-चालान जारी कर देता है।

41 टोल प्लाजा पर लागू प्रणाली

राज्य परिवहन विभाग ने 32 टोल प्लाजाों पर ई-डिटेक्शन सिस्टम स्थापित किए हैं, और शेष 9 टोल प्लाजाों पर भी इसे स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। अगस्त 2024 में शुरू हुई यह प्रणाली अब तक लाखों वाहन मालिकों को नियमों के प्रति जागरूक करने में सफल रही है।

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक एक लाख 49 हजार 490 चालान जारी किए जा चुके हैं, जिसके तहत वाहन मालिकों पर करीब 80 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, इसमें से केवल एक चौथाई चालान ही जमा हो पाए हैं, जो नियमों के प्रति लोगों की प्रारंभिक असहजता को दर्शाता है।

वित्तीय प्रभाव और वसूली की चुनौतियां

ई-चालान प्रणाली से उत्पन्न वित्तीय प्रभाव सराहनीय है। एक महीने में छह करोड़ रुपये का चालान कटना राज्य के खजाने के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है। हालांकि, वसूली की दर अभी भी चिंताजनक है। केवल 25% चालान का जमा होना यह संकेत देता है कि वाहन मालिक नियमों को गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता बनी हुई है।

परिवहन विभाग ने चालान न भरने वाले वाहन चालकों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों (डीटीओ) को दिए हैं।

वाहन मालिकों के लिए चेतावनी

परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ई-चालान प्रणाली केवल राजस्व वसूली का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा और पर्यावरणीय संरक्षण सुनिश्चित करने का एक गंभीर प्रयास है।

  • दस्तावेज: फिटनेस, बीमा और प्रदूषण प्रमाण-पत्र अनिवार्य हैं।

  • जुर्माना: नियमों की उपेक्षा पर भारी वित्तीय दंड।

  • कार्रवाई: बार-बार उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस रद किया जा सकता है।

सड़क सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव

ई-चालान प्रणाली के लागू होने से सड़क सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। अद्यतन फिटनेस प्रमाण-पत्र वाले वाहनों के सड़क पर चलने की संभावना अधिक होती है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम कम होता है। प्रदूषण प्रमाण-पत्रों की अनिवार्य जांच से पर्यावरणीय प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी सहायता मिल रही है।

भविष्य की चुनौतियां और समाधान

यद्यपि ई-चालान प्रणाली प्रभावी सिद्ध हो रही है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ वाहन चालकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्प डेस्क स्थापित कर रहा है।

Bihar News: निष्कर्ष

बिहार में ई-चालान प्रणाली का सफल कार्यान्वयन शासन में प्रौद्योगिकी के उपयोग की एक उत्कृष्ट मिसाल है। यह प्रणाली न केवल राजस्व वसूली में सहायक है, बल्कि सड़क सुरक्षा और पर्यावरणीय संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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