पटनाबिहार
Trending

Bihar News: बिहार में किसानों को बड़ी राहत, सीएम नीतीश कुमार ने 2 लाख 2 हजार बाढ़ प्रभावित किसानों के खातों में 113 करोड़ 16 लाख रुपये ट्रांसफर किए, कृषि इनपुट अनुदान योजना से मिली मदद

सीएम नीतीश कुमार ने बाढ़ और 'मोन्था' तूफान से प्रभावित बिहार के 2.02 लाख किसानों को DBT के जरिए 113.16 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की।

Bihar News: बिहार सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों को मजबूत संबल देते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत वर्ष 2025 में बाढ़ और ‘मोन्था’ तूफान से प्रभावित 2 लाख 2 हजार से अधिक किसानों के बैंक खातों में कुल 113 करोड़ 16 लाख रुपये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे ट्रांसफर किए। यह राशि पटना के 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प सभागार’ से रिमोट बटन दबाकर जारी की गई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह सहायता किसानों को आगामी फसलों की तैयारी में मदद करेगी और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देगी। राज्य सरकार की यह पहल किसानों की आर्थिक सुरक्षा और पारदर्शी वितरण की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब बिहार के किसान लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं। 2025 में भारी बारिश, बाढ़ और मोन्था तूफान ने कई जिलों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। सरकार ने त्वरित राहत पहुंचाने के लिए DBT सिस्टम का सहारा लिया, जिससे कोई लीकेज या देरी नहीं हुई।

13 जिलों के 53 प्रखंडों और 493 पंचायतों के किसान हुए लाभान्वित

bihar news
bihar news

वर्ष 2025 में अतिवृष्टि और मोन्था तूफान के कारण राज्य के 13 जिलों में फसल क्षति हुई थी। इन जिलों में बेगूसराय, भोजपुर, दरभंगा, गया, कैमूर, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और सुपौल शामिल हैं। इन जिलों के कुल 53 प्रखंडों और 493 पंचायतों में रहने वाले किसानों की फसलें प्रभावित हुईं। कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे, जिनकी जांच और सत्यापन के बाद अनुदान राशि जारी की गई।

कृषि विभाग के अनुसार, फसल क्षति 33 प्रतिशत से अधिक होने पर ही अनुदान दिया जाता है। असिंचित भूमि के लिए प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये और सिंचित भूमि के लिए 17,000 रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि तक यह लाभ मिलता है। इस योजना से किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक जैसे कृषि इनपुट खरीदने में आसानी हुई है, जिससे वे अगले सीजन की तैयारी कर सकें।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कार्यक्रम में कहा, “राज्य के खजाने पर बाढ़ पीड़ितों का पहला अधिकार है। हम किसानों की तरक्की के लिए लगातार काम कर रहे हैं। DBT से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है और राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंची है।” इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

कृषि इनपुट अनुदान योजना: प्राकृतिक आपदाओं में किसानों का सहारा

कृषि इनपुट अनुदान योजना बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य बाढ़, ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश या तूफान जैसी आपदाओं से प्रभावित किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करना है। योजना के तहत किसान उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और अन्य इनपुट खरीद सकते हैं, जिससे फसल उत्पादन में सुधार आता है और आय बढ़ती है।

इस योजना की खासियत DBT सिस्टम है, जो भ्रष्टाचार मुक्त वितरण सुनिश्चित करता है। प्रभावित किसान ऑनलाइन आवेदन करते हैं, फिर विभागीय टीम सत्यापन करती है। सत्यापित होने पर राशि सीधे बैंक खाते में आ जाती है। 2025 की बाढ़ में इस योजना ने हजारों किसानों को समय पर मदद पहुंचाई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं।

सभी 38 जिलों में सहायता की व्यवस्था, भविष्य में और विस्तार की योजना

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सहायता सिर्फ 13 जिलों तक सीमित नहीं है। राज्य के सभी 38 जिलों में प्रभावित किसानों को समय पर मदद पहुंचाने की पूरी व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद कृषि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों की आय में स्थिरता बनी रहे।

नीतीश कुमार ने कहा, “यह सिर्फ वित्तीय सहायता नहीं है। हम किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बेहतर बीज और प्रशिक्षण भी उपलब्ध करा रहे हैं। इससे बिहार के किसान सशक्त होंगे और राज्य की कृषि मजबूत होगी।” सरकार भविष्य में योजना को और व्यापक बनाने की तैयारी में है, ताकि हर प्रभावित किसान तक राहत पहुंच सके।

किसानों की प्रतिक्रिया: राहत से मिली नई उम्मीद

प्रभावित किसानों ने इस पहल का स्वागत किया है। बेगूसराय के एक किसान रामविलास ने बताया, “मोन्था तूफान ने हमारी पूरी फसल बर्बाद कर दी थी। अब सरकार की मदद से हम नए बीज और खाद खरीद पाएंगे। DBT से पैसे सीधे आए, कोई परेशानी नहीं हुई।” इसी तरह मधुबनी और सीतामढ़ी के किसानों ने कहा कि यह राशि उनके लिए जीवन रेखा साबित हुई है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी योजनाएं न केवल तत्काल राहत देती हैं बल्कि लंबे समय में फसल पैटर्न और उत्पादकता में सुधार लाती हैं। बिहार में जहां किसान छोटे जोत वाले होते हैं, वहां समय पर अनुदान उनकी आर्थिक स्थिति को संभालता है।

बिहार में कृषि क्षेत्र की चुनौतियां और सरकार की प्रतिबद्धता

बिहार कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन बाढ़ और तूफान जैसी आपदाएं हर साल फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं। सरकार ने पिछले वर्षों में कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे पीएम किसान सम्मान निधि के साथ राज्य स्तरीय अनुदान। कृषि इनपुट अनुदान योजना इनमें से एक प्रमुख है।

यह कदम किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि गुणवत्ता युक्त इनपुट और समय पर सहायता से उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

अंत में, यह पहल बिहार की किसान-केंद्रित नीतियों का उदाहरण है। जहां एक तरफ आपदाएं चुनौती देती हैं, वहीं सरकार की त्वरित कार्रवाई से उम्मीद की किरण बनी रहती है। किसान अब आगामी रबी फसल के लिए तैयार हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका मजबूत होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button