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Bihar News: खुशखबरी, सकरी और रैयाम चीनी मिलें होंगी पुनर्जीवित, 2401 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों का पुनरुद्धार, मधुबनी-दरभंगा के 2401 गांवों को गन्ना आपूर्ति आरक्षित, हजारों किसानों को लाभ

Bihar News: मिथिलांचल के किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। बिहार सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को फिर से चालू करने का निर्णय लिया है। सहकारिता विभाग ने इन दोनों चीनी मिलों के पुनर्जीवन की जिम्मेदारी संभाल ली है। शुक्रवार को गन्ना उद्योग विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मधुबनी और दरभंगा जिलों के कुल 2401 गांवों को इन मिलों को गन्ना आपूर्ति के लिए आरक्षित कर दिया है। यह निर्णय न केवल क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों को सीधा लाभ पहुंचाएगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।

दशकों की प्रतीक्षा का अंत

मधुबनी जिले की सकरी चीनी मिल और दरभंगा जिले की रैयाम चीनी मिल मिथिलांचल की औद्योगिक धरोहर रही हैं। ये मिलें एक समय क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ थीं, जहां हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता था। लेकिन विभिन्न प्रशासनिक, वित्तीय और संरचनात्मक समस्याओं के कारण ये मिलें धीरे-धीरे बंद हो गईं।

सकरी मिल लगभग दो दशक से बंद पड़ी थी, जबकि रैयाम मिल भी पिछले कई वर्षों से अकार्यशील थी। इन मिलों के बंद होने से क्षेत्र के गन्ना किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्हें अपना गन्ना दूर-दराज के क्षेत्रों में बेचना पड़ता था, जिससे परिवहन खर्च बढ़ता था और उचित मूल्य नहीं मिल पाता था।

स्थानीय किसानों ने बार-बार इन मिलों को फिर से चालू करने की मांग की थी। विभिन्न किसान संगठनों ने प्रदर्शन किए और सरकार से गुहार लगाई। अब नीतीश कुमार सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए इन मिलों के पुनरुद्धार का निर्णय लिया है, जो क्षेत्र के किसानों के लिए दशकों की प्रतीक्षा का अंत है।

उच्चस्तरीय समिति का गठन

बिहार सरकार ने बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने और राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई है। इस उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति बंद मिलों की स्थिति का आकलन करने, उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक निवेश की गणना करने और क्रियान्वयन की रणनीति तैयार करने का कार्य कर रही है।

सकरी और रैयाम चीनी मिलों का पुनरुद्धार इसी समग्र योजना का हिस्सा है। समिति ने इन मिलों की तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता का अध्ययन किया और पाया कि उचित निवेश और प्रबंधन के साथ इन्हें लाभकारी इकाइयों में बदला जा सकता है।

सहकारिता विभाग को इन मिलों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपना एक सोची-समझी रणनीति है। सहकारी मॉडल में किसान सीधे भागीदार होते हैं, जिससे उन्हें न केवल गन्ने का उचित मूल्य मिलता है, बल्कि मिल के लाभ में भी हिस्सेदारी मिलती है। यह मॉडल गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बेहद सफल रहा है।

सकरी चीनी मिल: 1383 गांवों का आधार

मधुबनी जिले की सकरी चीनी मिल को मधुबनी और दरभंगा दोनों जिलों के कुल 1383 गांवों से गन्ने की आपूर्ति होगी। इसमें मधुबनी जिले के 686 गांव और दरभंगा जिले के 697 गांव शामिल हैं।

  • मधुबनी जिले के आरक्षित क्षेत्र: सकरी मिल के लिए मधुबनी जिले के 12 प्रखंडों के गांव आरक्षित किए गए हैं। इनमें अंध्राथाढ़ी, बबुरही, घोघाडीहा, झंझारपुर, लडनिया, लखनउर, लौकहां, लौकही, माधेपुर, पंडौर, फुलपरास और राजनगर प्रखंड शामिल हैं।

  • दरभंगा जिले के आरक्षित क्षेत्र: दरभंगा जिले के 13 प्रखंडों के 697 गांव सकरी मिल को गन्ना आपूर्ति करेंगे। इनमें बरही, मनिगांछी, टारडीह, अलिनगर, बेनीपुर, बिरौल, धनश्यामपुर, गौराबौराम, किरातपुर, कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान पूर्वी और दरभंगा प्रखंड शामिल हैं।

इन गांवों में अनुमानित रूप से लगभग 15,000 से 20,000 गन्ना किसान हैं जो सीधे तौर पर इस मिल को लाभान्वित होंगे।

रैयाम चीनी मिल – 1018 गांवों का समर्थन

दरभंगा जिले की रैयाम चीनी मिल को दरभंगा और मधुबनी दोनों जिलों के कुल 1018 गांवों से गन्ना प्राप्त होगा। इसमें दरभंगा जिले के 580 गांव और मधुबनी जिले के 438 गांव शामिल हैं।

  • दरभंगा जिले के आरक्षित क्षेत्र: रैयाम मिल के लिए दरभंगा जिले के 6 प्रखंडों के 580 गांव निर्धारित किए गए हैं। इनमें बहादुरपुर, हायाघाट, हनुमाननगर, जाले, सिंघवारा और कोइरी प्रखंड शामिल हैं।

  • मधुबनी जिले के आरक्षित क्षेत्र: मधुबनी जिले के 9 प्रखंडों के 438 गांव रैयाम मिल को गन्ना देंगे। इनमें बासोपट्टी, बेनीपट्टी, बिस्फी, हरलाखी, जयनगर, कलुहीं, खजौली, रहिका और माधवापुर प्रखंड शामिल हैं।

किसानों के लिए क्या होंगे फायदे

इन चीनी मिलों के पुनरुद्धार से क्षेत्र के गन्ना किसानों को कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ होंगे:

  • सुनिश्चित बाजार: किसानों को अब गन्ने के लिए नजदीकी बाजार मिलेगा।

  • उचित मूल्य: सरकारी नियंत्रण वाली मिलें राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (SAP) पर खरीद करेंगी।

  • समय पर भुगतान: बिहार सरकार ने भुगतान में देरी न होने देने का आश्वासन दिया है।

  • परिवहन लागत में कमी: नजदीकी मिल होने से खर्च कम होगा और शुद्ध लाभ बढ़ेगा।

  • सहकारी लाभांश: किसान मिल के सदस्य बनकर लाभ में हिस्सेदारी प्राप्त कर सकेंगे।

रोजगार सृजन की संभावनाएं

चीनी मिल एक श्रम प्रधान उद्योग है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दोनों मिलें मिलकर लगभग 5,000 से 7,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेंगी। इसमें तकनीकी कर्मचारी, प्रशासनिक स्टाफ के साथ-साथ गन्ना परिवहन और मशीनरी रखरखाव में लगे लोग भी शामिल होंगे।

Bihar News: चुनौतियां और समाधान

सरकार के सामने बुनियादी ढांचे की मरम्मत, तकनीकी उन्नयन और वित्तीय व्यवहार्यता जैसी चुनौतियां हैं। मुख्य सचिव की समिति इन सभी पहलुओं पर काम कर रही है ताकि इन मिलों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

यह पहल मिथिलांचल के आर्थिक पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसे सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो यह पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देगा।

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