Bihar Farmer Registry: बिहार फार्मर रजिस्ट्री अभियान का 50 प्रतिशत लक्ष्य हासिल, केंद्र से मिलेंगे 450 करोड़ रुपये
43 लाख+ किसानों का पंजीकरण पूरा, केंद्र से 450 करोड़ मिलेंगे, वैशाली ने मारी बाजी, शत-प्रतिशत लक्ष्य जल्द।
Bihar Farmer Registry: बिहार सरकार ने किसानों के लिए चलाए जा रहे महत्वपूर्ण फार्मर रजिस्ट्री अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रभारी विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की कि अभियान के तहत 50 प्रतिशत से अधिक किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है। इस उपलब्धि से राज्य को केंद्र सरकार से 450 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है, जो किसानों की विभिन्न योजनाओं को और मजबूत करेगी। यह कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में डिजिटलीकरण को भी बढ़ावा देगा।
अभियान की शुरुआत और उद्देश्य
बिहार फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत केंद्र सरकार की पीएम किसान योजना से जुड़ी हुई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी किसानों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है, ताकि वे सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा सकें। पहले किसानों को विभिन्न दस्तावेजों और प्रक्रियाओं से जूझना पड़ता था, लेकिन अब रजिस्ट्री के माध्यम से उनकी जमीन, फसल और अन्य विवरणों को ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है। इससे न केवल सब्सिडी और सहायता राशि सीधे उनके खाते में पहुंचेगी, बल्कि फसल बीमा, ऋण और बाजार सुविधाओं में भी पारदर्शिता आएगी।
राज्य सरकार ने इस अभियान को मिशन मोड में चलाया है, जिसमें जिला प्रशासन, राजस्व कर्मी और कृषि अधिकारी सक्रिय रूप से शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने बताया कि तय समय से पहले यह लक्ष्य हासिल करना टीम वर्क का नतीजा है। उन्होंने किसानों के सहयोग की भी सराहना की, जिन्होंने शिविरों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अभियान से बिहार कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत कर रहा है, जहां डिजिटल इंडिया की अवधारणा को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाया जा रहा है।
उपलब्धि के आंकड़े और प्रभाव
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बिहार में कुल 85 लाख से अधिक पीएम किसान लाभार्थी हैं। इनमें से अब तक 43 लाख से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रीकरण पूरा हो चुका है, जो कुल लक्ष्य का 50.3 प्रतिशत है। यह आंकड़ा न केवल प्रभावशाली है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है। इस सफलता से केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली इंसेंटिव राशि की दूसरी किस्त जारी होगी, जो 450 करोड़ रुपये की होगी। यह राशि किसानों के लिए नई योजनाओं, जैसे उन्नत बीज वितरण, सिंचाई सुविधाएं और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी में खर्च की जाएगी।
अभियान के दौरान विभिन्न जिलों में शिविर लगाए गए, जहां किसानों को आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज और अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर रजिस्ट्री की गई। इससे न केवल समय की बचत हुई, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता भी फैली। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रजिस्ट्री भविष्य में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, इससे फर्जी लाभार्थियों को रोका जा सकेगा, जो पहले की योजनाओं में एक बड़ी समस्या थी।
जिलों का प्रदर्शन: वैशाली ने मारी बाजी
अभियान में कुछ जिलों ने असाधारण प्रदर्शन किया है। वैशाली जिला राज्य भर में अव्वल रहा, जहां 102 प्रतिशत की उपलब्धि दर्ज की गई। इसका मतलब है कि लक्ष्य से अधिक किसानों का पंजीकरण हुआ, जो स्थानीय प्रशासन की मेहनत को दर्शाता है। इसके अलावा, शिवहर, बेगूसराय, कटिहार और बक्सर जैसे जिलों ने भी लक्ष्य के करीब या उससे अधिक प्रगति की। इन जिलों में विशेष अभियान चलाए गए, जहां मोबाइल वैन और डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से किसानों तक पहुंचा गया।
उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने इन जिलों के अधिकारियों को बधाई दी और कहा कि उनका प्रदर्शन अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बनेगा। वहीं, कुछ पिछड़े जिलों में अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वहां अतिरिक्त शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य जल्द हासिल हो सके। यह अभियान न केवल संख्या बल्कि गुणवत्ता पर भी फोकस कर रहा है, जहां हर रजिस्ट्री की जांच की जा रही है।
किसानों के लिए लाभ और चुनौतियां
फार्मर रजिस्ट्री से किसानों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे। सबसे पहले, पीएम किसान योजना की राशि अब बिना किसी देरी के उनके खाते में आएगी। इसके अलावा, फसल क्षति के मामले में बीमा क्लेम आसान हो जाएगा। जमीन संबंधी विवादों में भी यह रजिस्ट्री प्रमाण के रूप में काम करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभियान बिहार की कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां डेटा एनालिसिस के माध्यम से फसल पैटर्न और बाजार ट्रेंड का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी और डिजिटल साक्षरता की समस्या से कुछ किसान पीछे छूट सकते हैं। सरकार ने इसके लिए मोबाइल ऐप और हेल्पलाइन शुरू की है, लेकिन और प्रयास की जरूरत है। साथ ही, महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है, क्योंकि वे कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अभियान के दौरान कई महिला किसानों ने रजिस्ट्री कराई, जो लिंग समानता की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
भविष्य की योजनाएं और केंद्र सरकार की भूमिका
अब अभियान का अगला चरण शेष 50 प्रतिशत किसानों का रजिस्ट्रीकरण है। विभाग ने इसके लिए समयबद्ध योजना बनाई है, जिसमें हर जिले को टारगेट दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा, जिससे बिहार देश के अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगा। केंद्र सरकार की भूमिका यहां अहम है, क्योंकि इंसेंटिव राशि से राज्य की योजनाओं को गति मिलेगी।
इसके अलावा, रजिस्ट्री को पीएम किसान से लिंक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। अब तक 26 प्रतिशत से अधिक किसानों की लिंकिंग हो चुकी है, जो सब्सिडी वितरण को और पारदर्शी बनाएगी। भविष्य में इस डेटाबेस को अन्य विभागों जैसे जल संसाधन और पर्यावरण से जोड़ा जाएगा, ताकि सतत विकास सुनिश्चित हो। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, जहां कृषि जीडीपी का बड़ा हिस्सा है।
Bihar Farmer Registry: समाज और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
यह अभियान न केवल किसानों बल्कि पूरे समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, और शहरों की ओर पलायन रुकेगा। साथ ही, डिजिटलीकरण से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, जो पहले सरकारी योजनाओं में एक बड़ी बाधा था। बिहार जैसे राज्य में, जहां बाढ़ और सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाएं आम हैं, यह रजिस्ट्री राहत वितरण को आसान बनाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने अपील की कि बाकी किसान जल्द से जल्द रजिस्ट्री कराएं, ताकि वे किसी योजना से वंचित न रहें। सरकार की ओर से हेल्पडेस्क और ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध हैं, जहां कोई भी किसान सहायता ले सकता है। यह अभियान बिहार के विकास की नई कहानी लिख रहा है, जहां किसान केंद्र में हैं।
इस सफलता से बिहार अन्य राज्यों को प्रेरित कर रहा है, और केंद्र सरकार भी ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दे रही है। कुल मिलाकर, फार्मर रजिस्ट्री अभियान राज्य की कृषि क्रांति का प्रतीक बन चुका है, जो आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव लाएगा।
(नोट: यह रिपोर्ट राज्य सरकार के आधिकारिक आंकड़ों और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए विभागीय वेबसाइट देखें।)



