Bihar Census 2027: पहली बार पूरी तरह डिजिटल, मोबाइल ऐप से घर बैठे स्व-गणना; 33 सवालों से बनेगा परिवार का पूरा प्रोफाइल
डिजिटल बिहार की नई पहचान, 2027 में होगी पहली पेपरलेस जनगणना, घर बैठे ऐप से कर सकेंगे 'स्व-गणना'।
Bihar Census 2027: बिहार में भारत की जनगणना 2027 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। राज्य सरकार ने इस बार की जनगणना को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है, जो देश में पहली ऐसी जनगणना होगी। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट किया कि कागजी प्रक्रिया अब पूरी तरह खत्म हो जाएगी। नागरिक मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल के जरिए घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिसे ‘स्व-गणना’ कहा जा रहा है। यह कदम डेटा संग्रह को तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक बनाने में मदद करेगा।
राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य सचिव ने बताया कि ‘सेंसस मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (CMMS) और मोबाइल ऐप के माध्यम से पूरी प्रक्रिया संचालित होगी। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सटीक डेटा बेहद जरूरी है। बिहार में यह डिजिटल क्रांति प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
स्व-गणना का विकल्प: घर बैठे जानकारी अपलोड करें

जनगणना 2027 में सरकार ने नागरिकों को ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) की सुविधा दी है। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर से सुरक्षित तरीके से अपनी और परिवार की डिटेल्स ऑनलाइन दर्ज कर सकता है। यह सुविधा डेटा में त्रुटियां कम करेगी और प्रक्रिया को तेज बनाएगी।
स्टेट कोऑर्डिनेटर सीके अनिल ने जानकारी दी कि स्व-गणना का दौर 17 अप्रैल 2027 से 1 मई 2027 तक चलेगा। इस दौरान परिवार के सदस्य अलग-अलग मकानों की जानकारी भी अलग-अलग दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 2 मई से 31 मई 2027 तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे, ताकि सभी डेटा की पुष्टि हो सके। यह प्रक्रिया बिहार में डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने वाली होगी, जहां नागरिक सक्रिय रूप से भाग लेंगे।
33 सवालों से बनेगा परिवार और घर की पूरी तस्वीर
जनगणना के पहले चरण में नागरिकों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। ये सवाल मकान की स्थिति, परिवार के सदस्यों की संख्या, बुनियादी सुविधाओं, घरेलू उपकरणों और जीवन स्तर से जुड़े होंगे। सीके अनिल ने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की सरकारी योजनाएं, विकास नीतियां और बजट आवंटन तय होते हैं। इसलिए जानकारी सही और पूर्ण देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
कुछ प्रमुख सवालों की श्रेणियां इस प्रकार हैं:
- मकान का निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत का मुख्य मटेरियल)
- मकान का उपयोग (रहने के लिए, दुकान, आदि) और उसकी स्थिति
- परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार का मुखिया
- पीने के पानी का मुख्य स्रोत, बिजली, शौचालय, स्नानघर की उपलब्धता
- रसोईघर, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, इंटरनेट एक्सेस
- घरेलू उपकरण जैसे टीवी, मोबाइल, स्मार्टफोन, वाहन आदि
- मुख्य अनाज (जैसे चावल, गेहूं) और अन्य सुविधाएं
ये सवाल घरेलू स्तर पर जीवन की गुणवत्ता को मापने में मदद करेंगे। केंद्र सरकार ने पहले चरण के लिए ये 33 सवाल अधिसूचित किए हैं, जो 2011 की जनगणना से थोड़े अलग और अपडेटेड हैं।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना
जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का है, जो स्व-गणना और फिजिकल वेरिफिकेशन से पूरा होगा। दूसरा चरण 9 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा, जिसमें जनगणना कर्मी घर-घर जाकर आबादी की अंतिम सूची तैयार करेंगे।
इसके बाद रिवीजन पीरियड भी होगा, ताकि कोई छूट न जाए। पूरे अभियान की निगरानी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल और जनगणना निदेशालय के निदेशक एम. रामचंद्रुडू करेंगे।
डिजिटल जनगणना से क्या फायदे?
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जोर देकर कहा कि जनगणना सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करना नहीं, बल्कि राष्ट्र और राज्य की नीतियों की नींव है। डिजिटल प्रक्रिया से:
- समय की काफी बचत होगी
- त्रुटियां और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी
- रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी
- डेटा अधिक विश्वसनीय और उपयोगी बनेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्य में यह बदलाव प्रशासनिक डेटा सिस्टम को मजबूत करेगा। नागरिकों को भी इसमें भागीदारी का मौका मिलेगा, जो लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा।
जनगणना अधिनियम के तहत अनिवार्य
जनगणना अधिनियम 1948 के अनुसार, जानकारी देना अनिवार्य है और यह गोपनीय रहेगी। कोई भी डेटा व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यह सिर्फ नीति निर्माण और विकास के लिए होगा।
बिहार सरकार ने सभी जिलाधिकारियों, प्रमंडलीय आयुक्तों और अन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया है। हाई-टेक ऐप्स के इस्तेमाल से यह अभियान सफल होगा।
निष्कर्ष: विकास की नई नींव
2027 की जनगणना बिहार के लिए डिजिटल परिवर्तन की मिसाल बनेगी। स्व-गणना, मोबाइल ऐप और CMMS जैसी तकनीकों से राज्य आधुनिक भारत की ओर बढ़ेगा। सटीक आंकड़े योजनाओं को प्रभावी बनाने और गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं के समाधान में मदद करेंगे। नागरिकों से अपील है कि वे सही जानकारी दें और इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भाग लें। यह न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के विकास की कुंजी है।



