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Bihar Budget Session: बिहार विधानसभा में रामविलास पासवान पर विवाद, 'बेचारा' टिप्पणी से भड़की राजनीतिक आग

बिहार बजट सत्र में आरजेडी विधायक ने रामविलास पासवान को 'बेचारा' कहा, लोजपा (रामविलास) ने सदन में हंगामा, धरना और माफी की मांग की, दलित सम्मान का मुद्दा गरमाया

Bihar Budget Session: बिहार की राजनीति में एक बार फिर दलित सम्मान का मुद्दा गरमा गया है। दिवंगत केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान को ‘बेचारा’ कहने पर विधानसभा परिसर में हंगामा मच गया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायकों और नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, धरना दिया और माफी की मांग की। यह घटना बजट सत्र के दौरान हुई, जिसने सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

मामला करीब एक सप्ताह पहले शुरू हुआ जब बोधगया से आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने विधानसभा में बोलते हुए रामविलास पासवान की प्रतिमा पटना के किसी प्रमुख चौराहे पर लगाने की मांग की। उन्होंने पासवान की राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए उन्हें ‘बेचारा’ शब्द से संबोधित किया। उनका इरादा शायद पासवान की संघर्षपूर्ण जिंदगी को रेखांकित करना था, लेकिन इस एक शब्द ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया।

सत्तापक्ष के खासकर लोजपा (रामविलास) के विधायकों ने इसे तुरंत अपमानजनक करार दिया। सदन में नारेबाजी शुरू हो गई, जिसमें ‘आरजेडी दलित विरोधी है’ जैसे नारे गूंजे। स्पीकर प्रेम कुमार ने शांति की अपील की, लेकिन हंगामा कुछ देर तक जारी रहा और सदन स्थगित करना पड़ा।

लोजपा (रामविलास) का गुस्सा और प्रदर्शन

लोजपा (रामविलास) ने इस टिप्पणी को न सिर्फ अपने संस्थापक का अपमान माना, बल्कि पूरे दलित और वंचित समाज की भावनाओं पर चोट बताया। पार्टी के विधायकों ने रामविलास पासवान को ‘दूसरा अंबेडकर’ और ‘दलित-पिछड़ों का मसीहा’ करार देते हुए कहा कि उन्होंने 50 साल से अधिक समय तक बेदाग राजनीति की। गरीबों, दलितों और हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में उनका योगदान अतुलनीय है।

रविवार को पटना के करगिल चौक पर पार्टी के सांसद अरुण भारती, प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी, गन्ना मंत्री संजय पासवान सहित कई नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। यहां तक कि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का पुतला भी जलाया गया। चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह टिप्पणी करोड़ों वंचितों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सदन में सार्वजनिक माफी नहीं मांगी गई तो आंदोलन और तेज होगा।

मंगलवार को विधानसभा परिसर में फिर धरना दिया गया। लोजपा विधायकों ने पोस्टर और बैनर लहराए, नारे लगाए और राजद पर दलित विरोधी राजनीति का आरोप लगाया। उनका कहना था कि आरजेडी की संस्कृति में दलित नेताओं का अपमान बार-बार होता रहा है।

आरजेडी का पक्ष और जवाब

आरजेडी ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। कुमार सर्वजीत ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा अपमान करना नहीं था। वे पासवान की प्रतिमा लगाने की मांग कर रहे थे ताकि उनकी सामाजिक न्याय की लड़ाई को सम्मान मिले। पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि ‘बेचारा’ शब्द संदर्भ में इस्तेमाल हुआ था, जो सहानुभूति जताने के लिए था, न कि तिरस्कार के लिए।

आरजेडी ने सत्ता पक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि वे खुद दलितों के हितों के लिए लड़ते रहे हैं और सामाजिक न्याय उनकी मूल विचारधारा है। विपक्ष ने बजट सत्र में आरक्षण बढ़ोतरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा, लेकिन यह विवाद मुख्य फोकस बन गया।

रामविलास पासवान की विरासत और राजनीतिक महत्व

रामविलास पासवान बिहार की राजनीति के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने कई दशकों तक केंद्र और राज्य स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। वे कई बार केंद्रीय मंत्री रहे और लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना कर दलित-पिछड़े वर्ग की आवाज बुलंद की। उनकी मृत्यु के बाद भी उनका प्रभाव बिहार की सियासत में दिखता है। चिराग पासवान के नेतृत्व में लोजपा (रामविलास) एनडीए का हिस्सा है और यह घटना गठबंधन की एकजुटता को भी परख रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ एक शब्द का नहीं, बल्कि दलित वोट बैंक पर कब्जे की लड़ाई है। बिहार में दलित और महादलित समुदाय निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पासवान की स्मृति को अपमानित दिखाना राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है।

Bihar Budget Session: सदन में स्थिति और आगे क्या?

विधानसभा में हंगामा होने के बाद स्पीकर ने सदन स्थगित किया। लोजपा (रामविलास) ने मांग की है कि आरजेडी विधायक सदन में माफी मांगें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है। इस बीच बजट सत्र के अन्य मुद्दे जैसे आरक्षण, विकास और शराबबंदी पर चर्चा प्रभावित हुई है।

यह घटना बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ सकती है। क्या ‘बेचारा’ जैसे शब्द अपमानजनक हैं या संदर्भ पर निर्भर? राजनीतिक दल इसे कैसे संभालते हैं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल, पटना की सियासत में तापमान बढ़ा हुआ है और दलित सम्मान का मुद्दा फिर से सुर्खियों में है।

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