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बिना ear टैगिंग वाले पशुओं के मालिकों को नहीं मिल पायेगा सरकारी योजनाओं का लाभ, ईयर टैगिंग है पशुओं का आधार कार्ड

राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पूरे भारत में टैगिंग कार्य जारी है। शेखपुरा जिले के सभी प्रखण्डों में भी पशुपालन विभाग के द्वारा पशुओं को ईयर टैगिंग करने का कार्य जारी है। गाय भैंस व उसके छह माह उम्र के उपर के बच्चे के साथ साढ़ व भैंसा का भी टैगिंग किया जाना है। इसके बाद फिर भेड़ बकरियों का भी किया जायेगा। इस बात की जानकारी देते हुए बरबीघा पशु अस्पताल में कार्यरत्त पशु चिकित्सक डॉ मनजीत कुमार ने कहा है ग्रामीण इलाकों के पशुपालक अपने पशुओं की ear टैगिंग करवाने से कतराते हैं। यहाँ तक कि कई जगहों पर ear टैगिंग करने वाले कर्मियों को भगा दिया जाता है। उन्हें ये वाहियात लगता है।

क्या है Ear tagging और इसके क्या हैं फायदे ?

मनुष्य की तरह ईयर टैगिंग पशुओं का आधार कार्ड है। जिसमें पशुओं का विवरण पोर्टल पर अपलोड होगा। पशुओं को वज्रपात, बिजली व अगलगी आदि एक्सिडेंटल केश में मौत होने पर पशुपालकों को 30 हजार रुपये मुआवजा राशि के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी। इसके अलावे पोस्टमार्टम कराने में किसी तरह की समस्या उत्पन्न नहीं होगी। इसके साथ हाट में वैसै पशुओं की खरीद बिक्री प्रतिबंधित रहेगी जिनके कान में टैग नहीं रहेगा। इससे पशु तस्करी पर भी लगाम लगेगा।

यहां तक कि पशुओं की चोरी होने या खो जाने पर पशुपालकों को सहजता से पत्ता चल जायेगा। इतना ही अब सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ उन्हीं पशुपालकों को मिलेगा, जिनके पशु का ईयर टैगिंग हुआ रहेगा। सरकार द्वारा चलाये जा रहे पशु टीकाकरण का लाभ भी टैगिंग हुए पशुओं को ही मिलेगा। जो पशुपालक पशु टैगिंग योजना की अनदेखी कर रहें हैं, भविष्य में यह उन्हें काफी महंगा पड़ेगा।

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