धर्म और आस्थाशेखपुरा

अक्षय नवमी पर स्त्रियों ने की आंवला बृक्ष की बिधि-बिधान से की पूजा

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी के रूप में मनाया जाता है। आज यानि की 23 नवबंर को आंवली नवमी मनाया जा रहा है। इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है। शेखपुरा जिले में भी महिलाओं ने खूब भक्ति भाव से पूजा किया। इस दिन महिलाएं परिवार की सुख और शांत के लिए आंवला वृक्ष की परिक्रमा लगाकर पूजा करती है। आंवला वृक्ष के नीचे पकवानों का भोग लगाया जाता है और उन्हीं पकवानों से अपना व्रत खोलती हैं। आंवला नवमी के के दिन आंवला वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।

शेखपुरा में पूजा करती महिलाएं

क्या है मान्यताएं

इस अवसर पर महिलाओं द्वारा सामूहिक पूजन, वृक्ष परिक्रमा सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा पूर्वक संपन्न किये जाते हैं। महिलाएं आंवला वृक्ष की 108 परिक्रमा लगाकर पूजा करती है। अहले सुबह स्नान करने के बाद आंवला पेड़ पर कच्चा दूध, हल्दी, रौली लगाया जाता है। इसके बाद आंवला पेड़ की परिक्रमा कर व्रती मौली बांधती है। आंवला के पेड़ पर दूध चढ़ाएं और सिंदूर, चंदन से तिलक कर शृंगार का सामान चढ़ाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अक्षय नवमी पर मां लक्ष्मी ने पृथ्वी लोक में भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा आंवले के रूप में की गयी थी और इसी पेड़ के नीचे बैठकर भोजन ग्रहण किया था।

आंवला नवमी की पूजा करती भाजपा नेत्री डॉ पूनम शर्मा

पूजा का महत्व

यह भी कहा जाता है कि आंवले के पेड़ के नीचे श्री हरि विष्णु के दामोदर स्वरूप की पूजा की जाती है। यह भी मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन आंवला के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है और आंवला नवमी की पूजा करने से श्रीहरि विष्णु का सानिध्य प्राप्त होता है। आंवला नवमी की कथा मां लक्ष्मी से जुड़ी होने के कारण इस दिन सबसे पहले मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इस दिन पूजा करने से मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु और शिवजी की कृपा भी प्राप्त होती है। मान्यता है कि आंवला के सेवन करने मात्र से ही श्री हरि प्रसन्न होते हैं।

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