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हड़ताल के बहाने पूरे नगर को नरक में लाने की निंदा, स्वच्छता के साथ खिलवाड़ उचित नहीं

शेखपुरा नगर परिषद के सफाई कर्मी इन दिनों हड़ताल पर हैं। मजदूरी बढाने की मांग है। लोकतंत्र में आंदोलन मूल अधिकार है, आंदोलन उचित भी है। लेकिन आंदोलन की आड़ में जो गंदगी पूरे शहर और चौक चौराहों पर फेंका गया है इसकी निंदा भी जरूरी है। इस तरह के ओछे आंदोलन की भर्त्सना होनी चाहिए। जब पूरा देश में कोरोना को लेकर स्वच्छता का ख्याल रखा जा रहा है और हाईकोर्ट ने भी कोरोना काल में हड़ताल पर नहीं जाने की सलाह दी है। वैसी स्थिति में सफाईकर्मीयों द्वारा हड़ताल पर जाना गैर जिम्मेदाराना हरकत माना जा सकता है।आंदोलन के बहाने पूरे सिस्टम और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है। आंदोलन में तालाबंदी, धरना, प्रदर्शन, अनशन बाजिव है लेकिन शहर के मुख्य चैराहों, गलियों में गन्दगी फेंक कर पूरे शहर को नरक में बनाना क्रूर मजाक है। दूसरी तरफ नगर परिषद प्रशासन का भी दायित्व है कि हड़ताल पर गए सफाईकर्मीयों से वार्ता कर न्याय संगत मांग पर विचार करे। बहरहाल आवश्यकता यह है कि सफाई कर्मी किसी के बहकावे में नहीं आ कर स्वच्छता का ख्याल रखते हुए अपनी मांग को भी सही प्लेटफार्म पर रखे।

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