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सामाजिक दुर्भावना और डर है कोरोना का दोस्त, कोरोना से डरें नहीं लड़ें – डॉ फैसल अरशद

कोरोना के बढ़ते प्रकोप का सबसे बड़ा कारण मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करना है। वहीं कोरोना से जल्द ठीक न होने का कारण कारण मरीजों के अंदर कोरोना से डर और सामाजिक दुर्भावना है। ये बातें कहीं है बरबीघा अस्पताल के कोरोना वारियर्स और प्रशासनिक अधिकारी डॉ फैसल अरशद ने। बताते चलें कि बरबीघा रेफरल अस्पताल की व्यवस्था इनके पदस्थापना के बाद बेहद दुरुस्त हो गया है। इनके मरीजों के प्रति दोस्ताना व्यवहार के सभी कायल हैं। उन्होंने कहा कि किसी कोरोना पॉजिटिव मरीज का हौसला नहीं तोड़ना है और आज स्थिति ये है कि लोग पॉजिटिव सुनते ही मरीजों से दूर भागने लगते हैं, जबकि वो खुद पहले से डरा होता है। ऐसे समय में समाज के लोगों को मरीज से उचित दूरी रखते हुए उसका हौसला अफजाई करते रहने से इस बीमारी से लड़ने में ताकत मिलती है। डर से स्ट्रेस होता है और स्ट्रेस से मरीज की बीमारी से लड़ने की ताकत कम होती है और वायरस उसपे हावी होने लगता है। जिससे कि मरीजों की स्थिति बिगड़ जाती है। ऐसे में जरूरत है कोरोना पॉजिटिव मरीजों का हौसला बढ़ाया जाय। जिससे वह जल्द से जल्द ठीक हो सके। साथ ही ये भी कहा कि मरीजों को भी चाहिये कि वो अपनी सोच पॉजिटिव रखें, पॉजिटिव सोच से इम्युनिटी स्तर मजबूत रहता है जो बीमारी से लड़ने में सहायक होता है। कोरोना से डरें नहीं इससे लड़ें।

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