शेखपुरा

चर्चित सिपाही वेतन घोटाले में बड़े अधिकारियों की फंसी गर्दन, डीआईजी ने पुलिस मुख्यालय को भेजा रिपोर्ट

Sheikhpura : चर्चित सिपाही वेतन घोटाले में बड़े अधिकारियों की संलिप्तता उजागर हुई है। लेखापाल मनोरमा देवी ने अक्टूबर 2018 में इस घोटाले को उजागर किया था। उसके बाद अब मुंगेर डीआईजी मो. शफीउल हक के द्वारा इस घोटाले में तत्कालीन एसपी दयाशंकर और डीएसपी अमित शरण की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए जांच रिपोर्ट राज्य पुलिस मुख्यालय को सौंपा गया है। जिसमें डीआईजी ने तत्कालीन एसपी एवं डीएसपी पर आश्चर्यजनक रूप से गलत तथ्यों के आधार पर जांच कर इस घोटाले में आरोपी सिपाहियों को क्लीन चिट देने और विभागीय कार्रवाई में निर्दोष साबित कर उन्हें बचाने का आरोप भी लगाया है। इन दोनों अधिकारियों के साथ ही तत्कालीन लेखापाल, खाता में इंट्री करने वाले और ऑडिट टीम को भी दोषी करार देते हुए डीआईजी ने कार्रवाई की अनुशंसा की है।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर ईमानदारी से इस मामले की फिर से जांच कराई जाय तो रकम और आरोपी दोनों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस घोटाले का मास्टरमाइंड सिपाही व कंप्यूटर ऑपरेटर मंटू कुमार था। उसने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर जनवरी 2015 से अक्टूबर 2018 की अबधि में करीब 58 लाख रुपए का गबन किया। सिपाहियों को सिर्फ उनका मूल वेतन ही दिया गया, जबकि बढ़े हुए वेतन की राशि का गबन कर लिया गया। उसने ऑफ लाइन बिल सही बनाया लेकिन ऑनलाइन में बड़ी सफाई से राशि को कई बार में अपने सहयोगियों के खाते में ट्रांसफर करवा लिया। इन सहयोगियों में हवलदार शकील अख्तर, सिपाही सहदेव चौधरी, संजीत सिंह, देवधारी सिंह, जितेंद्र सिन्हा एक महिला सिपाही सुमित्रा देवी भी शामिल हैं। बताते चलें कि एसपी दयाशंकर अभी पूर्णिया के एसपी हैं, वहीं डीएसपी अमित शरण पटना सिटी में पदस्थापित हैं।

Back to top button
error: Content is protected !!