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कुर्मी चेतना रैली के 30 साल पूरा होने पर नायक को किया सम्मानित, कहा- समाज नहीं भूलेगा इनका योगदान

Desk: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज जिस कुर्सी पर बैठे हैं, उसको हासिल करने में कुर्मी चेतना रैली का बहुत बड़ा योगदान है। 30 साल पहले राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित इसी रैली से नीतीश कुमार ने नारा दिया था “भीख नहीं हिस्सेदारी चाहिए, जो सरकार हमारे हितों को नजरअंदाज करती है वो सरकार सत्ता में रह नहीं सकती।” उसके बाद कदम-कदम के साथी लालू यादव और नीतीश कुमार की राहें जुदा हुई और बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ।

30वीं वर्षगाँठ के इस मौके पर आज कुर्मी चेतना रैली के नायक व संयोजक व सूर्यगढ़ा व अस्थावां विधानसभा के पूर्व विधायक सतीश कुमार को सम्मानित किया गया। बरबीघा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी व शेखपुरा के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ राकेश रंजन ने उन्हें अंगवस्त्र व बुके देकर सम्मानित किया। उनके साथ दीपक पटेल, अरुण कुमार सिन्हा, सुरेश प्रसाद सत्यप्रकाश राजीव कुमार संतोष कुमार सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस रैली के आयोजन का सबसे बड़ा श्रेय सतीश बाबू को जाता है। जिन्होंने कुर्मी व कुशवाहा जाति को न सिर्फ बिहार की राजनीति में उनका हक दिलाया। बल्कि जातीय हिंसा की आग में जल रहे बिहार को भी मुक्ति मिली। समाज ने एकजुट होकर नीतीश कुमार को अपना नेता चुना और उनको मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि पिछड़ों व अतिपिछड़ों को आज राजनीति में आज जो सम्मान मिल रहा है उसका श्रेय सतीश बाबू को भी जाता है। सतीश कुमार के इस योगदान को समाज कभी नहीं भूलेगा।

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