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बाल श्रम कानून के तहत बिगत तीन महीनों में नहीं हुई कोई भी कार्रवाई तो बैठक में जिलाधिकारी हो गए नाराज

Sheikhpura: जिलाधिकारी सावन कुमार ने आज अपने वेश्म में जिला बाल संरक्षण समिति, बाल कल्याण समिति, जिला स्तरीय मानव व्यापार विरोधी समिति एवं जिला निरीक्षण समिति से संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक किया। जिसमें उन्होंने सभी विभागों के कार्यों की समीक्षा भी की। इस दौरान उन्होंने सभी अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश देते हुए पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने को कहा।

जिलाधिकारी ने पिछले 3 माह में एक भी बाल श्रमिक को भी विमुक्त नहीं कराये जाने पर अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए श्रम अधीक्षक को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बालकों के संरक्षण तथा उसके लिए चलाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता के लिए सार्वजनिक स्थलों पर वॉल पेंटिंग कराएं। इस दौरान आरक्षी उपाधीक्षक मुख्यालय को निर्देश दिया गया कि जिले के सभी थाना में चाइल्ड फ्रेंडली माहौल बनाने के लिए चाइल्ड फ्रेंडली कक्ष बनाया जाए। ताकि बालकों को आम कैदियों की तरह लॉकअप में रखने के बजाय चाइल्ड फ्रेंडली कक्ष में ही रखा जा सके।

वहीं जिलाधिकारी ने बाल कल्याण समिति के कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि यथाशीघ्र देख-रेख एवं संरक्षण वाले बालकों को उसके परिवार तक पहुंचाने की कार्यवाही की जाए। इसके अलावे सुरक्षित स्थान मटोखर के आधारभूत संरचना में सुधार एवं सौंदर्यीकरण करने व अधिक सतर्कता बरतने को भी कहा। ताकि किसी भी तरह का संदेहास्पद पदार्थ गृह में प्रवेश ना हो। मौके पर सिविल सर्जन, श्रम अधीक्षक, चेयर पर्सन (बाल कल्याण समिति), सहायक (जिला बाल संरक्षण इकाई) एवं समाजसेवी आदि मौजूद थे।

बता दें कि जिले के कई छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों में सैकड़ों बाल श्रमिक कार्य कर रहे हैं। जिनको दिखाई न देता हो वो एक बार अकेले जिले के बिभिन्न बाजारों का चक्कर लगा सकते हैं। परन्तु इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यदा-कदा दो-एक दुकानों में छापेमारी कर वरीय अधिकारियों को दिखावा किया जाता है। परन्तु कार्रवाई के नाम पर इस मामले में कुछ नहीं होता।

इतना ही नहीं इसको लेकर जिले में एनजीओ भी कार्यरत्त हैं। जिनके कांधे पर जिलेवासियों को जागरूक करने की जिम्मेदारी है। ये अधिकारियों के सामने तो बड़े-बड़े दावे करते हैं। परन्तु उनकी भी जमीनी हकीकत ढाक के तीन पात वाली है। दो दिन मीडिया बाजी के बाद सब कुछ बन्द हो जाता है। ऐसे में जिले के लोगों को इसके प्रति जागरूक कर बाल मजदूरी को खत्म करने की सरकार की ये पहल महज फाइलों तक ही सीमित रह जाती है।

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