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बिना मर्जी के गर्भाशय निकालने के मामले में पीड़ित महिलाओं को सालों बाद मिला न्याय, हाई कोर्ट के आदेश पर मिला मुआबजा

Sheikhpura: महिलाओं का गर्भाशय निकाल कर सरकारी राशि निकालने के मामले में कई सालों बाद पीड़ित महिलाओं को न्याय मिला है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित महिलाओं को 84 लाख रुपए का मुआबजा दिया है। समाहरणालय के मंथन सभागार में आज एक विशेष कार्यक्रम के तहत जिलाधिकारी सावन कुमार के द्वारा पीड़ित महिलाओं के बीच चेक का वितरण किया गया। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ पृथ्वीराज सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

इस बाबत सिविल सर्जन ने बताया कि कुल 34 महिलाओं के बीच राशि का वितरण किया गया है। जिसमें से ऑपरेशन के वक्त 40 वर्ष से कम आयु की 20 महिलाओं को दो लाख जबकि 40 वर्ष से ऊपर की 14 महिलाओं को एक लाख रुपये दिया गया। उन्होंने बताया गया कि सभी महिलाओं को पूर्व में भी 50-50 हजार रुपये मुआबजा के तौर पर दिया जा चुका है।

ज्ञात हो कि साल 2016 एवं उससे पूर्व स्वास्थ्य विभाग की एक योजना के तहत जिले के बिभिन्न गांवों की कुल 34 महिलाओं का बिना उनकी मर्जी के गर्भाशय निकालने का मामला प्रकाश में आया था। इसको लेकर महिलाओं ने कोर्ट का दरबाजा खटखटाया था।

पीड़ित महिलाओं को चेक प्रदान करते सिविल सर्जन

कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए तत्कालीन सरकार को अनुदान देने का निर्देश दिया था। जिसके बाद सभी को 2017 में 50-50 हज़ार रुपए की क्षतिपूर्ति राशि दी गई थी। फिर दुबारा हाई कोर्ट के द्वारा 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को ढाई लाख जबकि 40 से अधिक उम्र की महिलाओं को डेढ़ लाख मुआबजा का निर्देश सरकार को दिया गया। इस आदेश के बाद आज सभी महिलाओं को मुआबजे की राशि प्रदान की गई।

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