धर्म और आस्थाशेखपुरा

कड़ी सुरक्षा के बीच हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत पर ताजिये के साथ निकाला मातमी जुलूस

Sheikhpura: मुहर्रम का महीना इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है। ये महीना शिया और सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कहते हैं इसी महीने पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत हुई थी।

इसको लेकर आज बरबीघा में मुस्लिम कौम के लोगों के द्वारा ताजिया के साथ मातमी जुलूस निकाला गया, जिसमें सभी धर्म के लोग शामिल हुए। ढोल-ताशों पर मातमी धुनें बजाई गई, वहीं युवाओं ने तलवार, जंजीर व लाठी से कई तरह के हैरतअंगेज करतब भी दिखाए।

शहर के फैजाबाद एवं पुरानी शहर मोहल्ले से सतरंगी ताजिया निकाला गया, वहीं महल्लापर से तिरंगे के रंग में लगा ताजिया निकाला गया। अकीदतमंदों का भारी हुजूम इस जुलूस में शामिल हुआ। भारी संख्या में मुस्लिम महिलाएं भी ताजिये का दर्शन करने पहुंची। सभी ने ताजियों का दीदार कर अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।

सुरक्षा में जुटे बरबीघा थानाध्यक्ष व पुलिस के जवान

इस दौरान पुलिस-प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध भी देखने को मिला। बरबीघा थानाध्यक्ष सह पुलिस निरीक्षक सुनील दत्त के नेतृत्व में बरबीघा व मिशन ओपी के जवान सुरक्षा व शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम को सम्पन्न कराने में जुटे रहे।बताते चलें कि इस्लाम धर्म की मान्यताओं के अनुसार, करीब 1400 साल पहले अशुरा के दिन कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन का सिर कलम कर दिया था और उनकी याद में जुलूस और ताजिया निकालने की रिवायत है। इससे पहले दो साल कोरोना महामारी के कारण ताजियों का जुलूस नहीं निकाला जा सका था।

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