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प्याज की खेती अब घाटे का सौदा, नहीं मिल रहे खरीददार, कैसे होगा किसान की बेटी का ब्याह और कैसे चुकाएंगे महाजन का कर्ज

Sheikhpura: टाल क्षेत्र के कई गांव के किसानों की जीविका प्याज की खेती पर निर्भर है। जिले में एकसारी, डीहकुसुम्भा, घाटकुसुम्भा, बाउघाट, भदौसी, बेलौनी, चांदी, वृंदावन सहित दर्जनों गाँवों में वृहद पैमाने पर प्याज़ की खेती की जाती है। परन्तु इस बार इसकी खेती करने वाले किसानों के लिए यह घाटे का सौदा साबित हो रहा है। एक ओर जहां इसकी खेती को प्रकृति की मार झेलनी पड़ी है। तो वहीं मेहनत से उगाई गयी फसल का खरीददार नहीं मिलने से जिले के प्याज़ उत्पादक किसानों की बेचैनी बढ़ी हुई है।

बारिश ने 50 फीसदी फसल को किया बर्बाद
इस संबंध में किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष अक्टूबर महीने तक बारिश होती रही। खेतों में नमी ज्यादा होने की वजह से प्याज़ का बिछड़ा देर से गिरा। फलस्वरूप प्याज़ की रोपाई में भी पन्द्रह दिन से एक महीने तक की देर हो गई। रही-सही कसर फरवरी महीने के पहले सप्ताह हुई जोरदार बारिश ने पूरी कर दी। जिससे किसानों को न सिर्फ प्याज़ में बल्कि अन्य फसलों में भी भारी नुकसान झेलना पड़ा। फरवरी महीने की बारिश में अधिकांश किसानों के खेत पानी में डूब गए। जिससे प्याज पूरी तरह पीले पड़ने लगे थे।

किसानों ने अपनी गाढ़ी कमाई प्याज़ की फसल बचाने में गंवा दी। बारिश की मार का सीधा असर प्याज़ की फसलों पर अब साफ दिखने लगा है। बहुतेरे किसानों के प्याज़ की फसल में प्याज बन ही नहीं पाए। उनके पौधे ज्यों की त्यों खेतो में ही रह गए। जिले के किसानों की माने तो जिले में लगभग 50 फीसदी किसानों की फसल तैयार ही नहीं हुई। जिससे उनकी पूरी पूंजी खेतों में ही धरी रह गयी।

बारिश के कारण बर्बाद फसल

खेत में फसल तैयार पर नहीं मिल रहे खरीददार
जिन किसानों की फसल तैयार होकर कट गई, उनकी तैयार फसल खेतों में रखी हुई है। कोई व्यापारी प्याज़ की फसल को खरीदने को तैयार नहीं हो रहा है। जिससे खेतों में रखे प्याज़ के खराब होने के डर ने इन किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जिन किसानों की फसल तैयार होकर पहले कट चुकी थी, उनके प्याज़ बाजारों में बिक चुके हैं। लेकिन पिछले दस दिनों से किसान अपनी प्याज़ की फसल खेतों में रखकर व्यापारियों की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। लेकिन कोई खरीदार न मिलने से उनकी सारी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। बहुतों किसानों को प्याज़ बेचकर अपनी बेटियों को ब्याहना है तो किसी को अपने कर्जे चुकाने हैं। अधिकांश किसानों ने ऊंची कीमत पर पट्टे लेकर प्याज़ की खेती की है। अगर प्याज़ की बिक्री समय पर नहीं हुई तो उन्हें फिर से कर्ज लेकर खेतों के पट्टे चुकाने होंगे।

खेतों में पड़ा है प्याज

सस्ते प्याज़ की आवक बढ़ने से बढ़ी परेशानी
बीते 15 दिनों पहले प्याज़ में थोड़ी तेजी देखी गयी थी और व्यापारी किसानों के खेत तक पहुंचने लगे थे। लेकिन जिले के बाजारों में बंगाल के सस्ते प्याज़ की आवक बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों ने किसानों के खेतों से प्याज़ की खरीदारी ही बंद कर दी। प्याज़ के व्यापार से जुड़े शेखपुरा भिठ्ठा पर निवासी अमरेश मेहता ने बताया कि जिले में बड़े पैमाने पर बंगाल से सस्ते दर पर प्याज़ की आवक बढ़ गयी है। जिससे स्थानीय किसानों की प्याज़ की खरीदारी नहीं हो पा रही है। स्थानीय व्यापारी लोकल प्याज़ का स्टॉक जमा कर उनको बिहार, बंगाल, बांग्लादेश सहित अन्य प्रदेशों की मंडियों में भेजते थे। इन व्यापारियों के पास अभी पूरा स्टॉक जमा है। लेकिन बाहर कोई खरीदार न मिलने से यहां का प्याज बाहर नहीं जा पा रहा है। जिसकी वजह से स्थानीय किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिन व्यापारियों ने अपना स्टॉक खाली रखा है। वैसे व्यापारी अभी भी स्थानीय किसानों के खेतों तक जाकर प्याज की खरीदारी करने में लगे हुए हैं। जब तक जिले में बाहरी प्याज़ की आवक बन्द नहीं होगी, तब तक स्थानीय किसानों के प्याज़ की बिक्री पर स्थिरता बनी रहेगी।

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