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हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं, हमेशा लटका रहता है ताला, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

Sheikhpura: एक तरफ जहां बिहार सरकार के द्वारा लगातार राज्य के सभी नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एक तरफ जहां सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बदला जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ इन केंद्रों में लटका ताला स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल रहा है।

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में लटका रहता है ताला
कुछ ऐसा ही मामला है शेखपुरा सदर प्रखंड के औधे स्वास्थ्य उपकेंद्र व हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का। बरबीघा-शेखपुरा मुख्य सड़क स्थित इस अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण हमेशा ताला लटका रहता है। जिसके कारण यहां के स्थानीय मरीजों को इलाज के लिए निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है। मुख्य सड़क पर आए दिन दुर्घटना होती रहती है। ऐसे में अस्पताल बन्द रहने से घायलों को प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाता। कई बार शेखपुरा या बरबीघा ले जाने के क्रम में घायल मौत का शिकार हो गए हैं। जिसको लेकर यहां के स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त है।

मुख्य सड़क स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र में लटका ताला

ग्रामीणों ने जताया आक्रोश
इस संबन्ध में स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह अस्पताल हमेशा बन्द रहता है। कई बार इसको लेकर विभाग को सूचित किया गया है, पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यदा-कदा ही गांव के कुछ लोग इस अस्पताल का ताला खुला देखते हैं। लोगों को इलाज मिलना तो दूर कई महीनों से अस्पताल परिसर की सफाई नहीं हुई है। इसके परिसर में पड़ी गंदगी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। ग्रामीणों ने बताया कि जब कोरोना या प्लस पोलियो का अभियान होता है तो इस अस्पताल में कार्यरत्त स्वास्थ्य कर्मी गांव में नजर आती हैं।

स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण है बन्द
वहीं दूसरी तरफ यहां कार्यरत्त एएनएम कुमारी निशा ने बताया कि यहाँ वो अकेले ड्यूटी पर हैं। कोरोना टीकाकरण के साथ अन्य कार्यों में ड्यूटी लगी होने के कारण अस्पताल बन्द रहता है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत के तहत इस उपकेंद्र को हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर बनाने की घोषणा हो गयी है। बाहर से रंग-रोगन भी कर दिया गया है। पर अंदर का स्ट्रक्चर अभी तक पुराना ही है। साथ ही यहां अकेले बस उन्हीं की ड्यूटी लगी है। उन्होंने यह भी बताया कि करीब एक साल पहले अस्पताल में ताला तोड़कर अज्ञात चोर कुर्सी, टेबल सहित दवाइयां भी चुराकर ले गए थे। जिसकी प्राथमिकी भी स्थानीय हथियावां ओ पी में दर्ज है।

एक महीने में दूर हो जाएगी समस्या
इस बाबत शेखपुरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक ने बताया कि इस बारे में विभाग को पूरी जानकारी है। एक एएनएम के ड्यूटी पर होने के कारण इस तरह की समस्या आ रही है। एक महीने के अंदर इस समस्या को निपटा लिया जाएगा। वहीं गुप्त सूत्रों की मानें तो इस जिले के सभी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी है। पूर्व में कई बार विभाग के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में बिहार के कोने-कोने में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का सरकार का दावा महज घोषणाओं तक ही सिमटता दिखाई पड़ रहा है।

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