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करें चुनाव- फाइलेरिया या बचाव? राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन

सिविल सर्जन ने मीडिया से प्रचार-प्रसार में सहयोग का किया अनुरोध

Sheikhpura: राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन- आईडीए अभियान के तहत आज
सिविल सर्जन कार्यालय स्थित सभागार में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। सिविल सर्जन डॉ पृथ्वी राज की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में इस अभियान की सफलता में मीडिया की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई।

लोगों को जागरूक करने हेतु मीडिया से प्रचार-प्रसार को अपील
इस मौके पर सिविल सर्जन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इस जिले में इस बीमारी से ग्रस्त रोगियों की संख्या अधिक है। 21 दिसम्बर से घर-घर जाकर स्वास्थ्यकर्मियों के द्वारा जिले के शत-प्रतिशत लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी।

इसके तहत जिले के सभी प्रखंडों के 124325 घरों में निवास करने वाले कुल 688182 लोगों को दवा खिलाने के लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिये कुल 315 टीम का गठन किया गया है, वहीं इसकी निगरानी के लिये 33 सुपरवाइजर की तैनाती भी की गई है। उन्होंने मीडियाकर्मियों से इसका प्रचार-प्रसार कर जिलेवासियों को इसके प्रति जागरूक करने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से इस अभियान में सहयोग की अपील भी की है।

कार्यशाला में शामिल अधिकारी व मीडिया कर्मी

बीमारी का कारण और बचाव
वहीं जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ अशोक कुमार ने बताया कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है। जिसे सामान्यतः हाथीपांव के नाम से जाना जाता है। पैरों व हाथों में सूजन एवं अंडकोष का सूजन इसका मुख्य लक्षण है। किसी भी व्यक्ति में संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 5 से 15 वर्ष तक का समय लग सकता है।

उन्होंने बताया कि पहले इस बीमारी के लिए ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर मार्गदर्शिका के अनुसार डीएपी व एल्बेंडाजोल दवाई दी जाती थी। परन्तु अब इसमें एक नई दवाई आईवर्मेक्टीन को भी जोड़ा गया है। जिससे इस बीमारी को जल्द से जल्द दूर करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही आईवर्मेक्टीन खुजली, पेट की कृमि और जूं जैसी समस्याओं को भी खत्म करता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि एम डी ए की खुराक 89 सेंटीमीटर से कम लंबाई वाले एवं 2 साल से कम उम्र वाले को नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा गंभीर रूप से बीमार एवं गर्भवती महिलाओं को भी यह दवा नहीं दिया जाएगा। बाकी सभी लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा घर-घर जाकर यह दवा खिलाई जाएगी।

इस मौके पर पर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रविशंकर, पीआईसी से अशोक सोनी, डब्ल्यूएचओ के डॉ शांतनु एवं अभिषेक, यूनिसेफ से प्रतिमा झा सहित चिकित्सा विभाग के कई अन्य अधिकारी व कर्मी भी मौजूद थे।

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