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एक गांव ऐसा भी! जहां आज भी कंधे पर बैठकर दूल्हा जाता है शादी करने, 4 बजे के बाद महिलाओं का आना-जाना रहता है बन्द

Sheikhpura: नवगठित शेखोपुरसराय नगर पंचायत में शामिल एक ऐसा गांव भी है, जहां आज तक सड़क नहीं बन सका है। पंचायती राज्य व्यवस्था में वर्षों रहने के बाद भी ग्रामीण सड़क का निर्माण नहीं कराया जा सका है। जी हम बात कर रहे हैं, वर्षों से ये फजीहत झेलने वे नीमी पंचायत के बहिकट्टा गांव की। जो बिहार सरकार के आदेशानुसार अब नगर पंचायत में शामिल किया जा चूका है। इस गांव का हाल ऐसा है कि यहां संध्या चार बजते ही आवागवन बन्द हो जाता है।

इस बाबत जानकारी देते हुए ग्रामीण शिक्षा सेवक के पद कार्यरत उमेश रजक ने बताया कि गांव में सड़क निर्माण को लेकर कई बार स्थानीय विधायक सुदर्शन कुमार के दरवाजे को खटखटाया गया। हर बार उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त कराया कि गांव में जल्द ही सड़क निर्माण कराया जायेगा। परन्तु उनके आश्वासन के बाद भी इस कार्य को पूरा नहीं कराया जा सका। इस बार भी जब वो विधानसभा चुनाव में वोट मांगने गांव पहुंचे थे, तो ग्रामीणों ने एक जुट होकर सड़क निर्माण कराने की मांग को उनके सामने रखा था। उस वक़्त उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि सत्ता में आने पर हमारी पहली प्राथमिकता इस गांव में सड़क निर्माण का ही होगा। पर जीत के बाद विधायक ने अबतक इस गांव में दुबारा पलट कर देखना भी मुनासिफ नहीं समझा है।

ग्रामीणों ने बताया बताया कि गांव में प्रवेश करने का एक मात्र मार्ग पगडंडी है, जहां से गुजरना महिलाओं के लिए एक भयंकर समस्या हो जाती है। दरअसल संध्या के समय अक्सर पगडंडियों के किनारे लगे ताड़ के पेड़ के पास नशेड़ी पार्टी करते हैं। ग्रामीण रघुनंदन यादव, सुरेश कुमार, मनोज, मोनिका देवी, सारो देवी ने बताया कि शादी-विवाह के लिये भी बारात को बहीकट्टा मोड़ पर उतर जाना पड़ता है और दूल्हे को कंधे पर बिठाकर दरवाजे तक लाया जाता है। जबकि बरसात के दिनों में इस गांव में जाना भी दूभर हो जाता है।

नवगठित नगर पंचायत में शामिल होने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी
इस बाबत जब मीडिया कर्मियों ने ग्रामीणों से बातचीत किया तो तमाम ग्रामीणों ने नगर पंचायत में गांव को शामिल कर दिए जाने पर नाराजगी जाहिर किया। उन्होंने कहा कि हमें कभी भी उम्मीद नहीं था कि विकास से कोसों पीछे रह रहे गांव और गांव में मजदूरी कर के जीवन यापन करने वाले गांव के 1000 महादलित समुदाय के ग्रामीणों को नगर पंचायत में शामिल किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि बिहार सरकार पंचायती राज्य में गांव के विकास हेतू जो राशि पंचायत को मुहैया कराती है। उसका जमीनी स्तर तक जांच नहीं होता है। नगर पंचायत में शामिल किए जाने के बाद आज तक किसी अधिकारी के द्वारा इस गांव का मुआयना नहीं किया जा सका है।

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