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जिलाधिकारी ने अपील कर कहा- बन्द करें पराली जलाना, स्वास्थ्य के साथ खेतों को भी होता है नुकसान

Sheikhpura: खेतों में पराली जलाना हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। किसानों को इससे बचने की आवश्यकता है। इसे रोकने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाने की जरूरत है। शनिवार को जिला पदाधिकारी इनायत खान की अध्यक्षता में जिला स्तर पर अंतर्विभागीय कार्य समूह का बैठक किया गया। जिसमें पराली जलाने से रोकने के लिये व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया। बैठक में फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी के अलावे इसे मिट्टी में मिलाने पर खेतों को मिलने वाले पोषक तत्वों के बारे में भी बताया गया। साथ ही पदाधिकारियों को किसानों को जागरूक करने के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश भी दिया गया।

इस बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्त्ता, जिला सहकारिता पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, प्रधान सह वरीय वैज्ञानिक (कृषि विज्ञान केन्द्र, अरियरी), आत्मा के परियोजना निदेशक, जिला कृषि पदाधिकारी ने भाग लिया।

क्या होता है नुकसान

  • फसल अवशेष जलाने से मिट्टी के पोषक तत्वों की क्षति होती है।
  • मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की क्षति होती है।
  • जमीन में पाये जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणुओं का सफाया हो जाता है।
  • फसल अवशेष जलाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है।
  • इससे एरोसॉल के कण निकलते हैं, जो हवा को प्रदूषित करते हैं।

एक टन पुआल जलाने से निम्न हानिकारक तत्व निकलते हैं-

  • 3 किलोग्राम पार्टिकुलेट मैटर
  • 60 किलोग्राम कार्बन मोनो ऑक्साइड
  • 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड
  • 199 किलोग्राम राख
  • 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड

पराली जलाने से स्वास्थ्य पर असर

  • सांस लेने में समस्या
  • आँखों में जलन
  • नाक में समस्या
  • गले की समस्या

एक टन पुआल को जमीन में मिलाने से लाभ

  • नाइट्रोजन 10 से 15 किलोग्राम
  • सल्फर 5 से 7 किलोग्राम
  • पोटाश 30 से 40 किलोग्राम
  • ऑर्गेनिक कार्बन 600 से 800 किलोग्राम

फसल अवशेष प्रबंधन हेतु उपयोगी मशीनरी

  • हैप्पी सीडर– यह मशीन पुआल को काटकर मल्चर के रूप में जमीन में मिला देती है, जो जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है। उस खेत में जीरोटिलेज से गेहूँ की बुआई कर अच्छा पैदा लिया जा सकता है। हैप्पी सीडर का अनुमाणित मूल्य 1.50 से 1.75 लाख तक है। इसकी खरीददारी पर कृषि विभाग के द्वारा 80% अनुदान भी उपलब्ध है।
  • रोटरी मल्चर– यह मशीन धान के पुआल एवं खर पतवारों को काटकर मिट्टी में मिला देता है। जिससे वह जैविक खाद में परिवर्तित हो जाता है। इसका अनुमानित मूल्य 1.50से 1.75 लाख तक है, इसपे भी कृषि विभाग द्वारा 80% अनुदान उपलब्ध है।
  • स्ट्रा बेलर– यह मशीन खेतों में बिखरे पुआल को एकत्रित कर ठोस वर्गाकार गाँठ बना देता है। जिसे एक जगह से दूसरे जगह आसानी से ले जाया जा सकता है एवं लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसका अनुमानित मूल्य लगभग 3 लाख रू है। साथ ही कृषि विभाग द्वारा 80% अनुदान भी उपलब्ध है।

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