खेलशेखपुरा

आत्मरक्षा की ट्रेनिंग हर किसी के लिए जरूरी, शारीरिक फिटनेस के साथ बढ़ता है आत्मविश्वास- मार्शल आर्ट ट्रेनर राजकुमार

मिक्स मार्शल आर्ट के तहत जुडो-कराटे, चाइनीज कुंगफू, चाइनीज बॉक्सिंग, किक-बॉक्सिंग, जिम्नास्टिक, ताइक्वांडो किक आदि विधाओं में पारंगत बनाते हैं।

Sheikhpura: आज के इस हिंसात्मक दौर में जहां मार-पीट, खून-खराबा, हत्या व अन्य अपराधिक घटनाएं दिन-दहाड़े घटित हो रही हैं। लड़कियों के साथ छेड़खानी, बलात्कार जैसी घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। वैसी स्थिति में सभी के लिए आत्मरक्षा का गुर सीखना सबसे ज्यादा जरूरी है, ताकि वे सम्भावित खतरों से खुद की सुरक्षा कर सकें। खासकर लड़कियों के लिए तो ये और भी ज्यादा जरूरी है। ये आपको फिट रखने के साथ-साथ खुद की सुरक्षा भी प्रदान करती है।

बिगत 5 सालों से बरबीघा में बच्चों को मिक्स मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रहे राजकुमार बताते हैं कि आत्मरक्षा का गुण जानना हर इंसान के लिये जरूरी है। खासकर लड़कियों को तो हर हाल में आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लेनी चाहिये, ताकि वे निडर होकर कहीं भी आ-जा सकें। इन 5 सालों में क्षेत्र के करीब 500 बच्चों को वे मिक्स मार्शल आर्ट सीखा चुके हैं। राज राजेश्वर उच्च विद्यालय सहित कई अन्य स्कूल के बच्चों को भी उन्होंने ट्रेनिंग दिया है। उनका मानना है कि इस ट्रेनिंग के बाद बच्चों का आत्मविश्वास भी दुगुना हो जाता है। जिससे वे किसी भी क्षेत्र में झंडा गाड़ सकते हैं।

देश के पहले शाओलिन मास्टर शिफू कनिष्क शर्मा के साथ

राजकुमार के गुरु पटना के मशहूर ट्रेनर पंकज काम्बली हैं। इसके अलावे वे राजस्थान के जयपुर में देश के पहले शाओलिन मास्टर शिफू कनिष्क शर्मा से भी ट्रेनिंग ले चुके हैं। बताते चलें कि शिफू कनिष्क शर्मा अक्षय कुमार जैसे बॉलीवुड स्टार के साथ-साथ भारतीय आर्मी को भी ये तकनीक सिखाया है। मिक्स मार्शल आर्ट के पारंगत राजकुमार का ट्रेनिंग सेंटर बरबीघा नगर के श्रद्धानंद स्मारक विद्यालय के पास स्थित है। जहां वे बच्चों को मिक्स मार्शल आर्ट के तहत जुडो-कराटे, चाइनीज कुंगफू, चाइनीज बॉक्सिंग, किक-बॉक्सिंग, जिम्नास्टिक, ताइक्वांडो किक आदि विधाओं में पारंगत बनाते हैं।

इस बाबत उन्होंने बताया कि छोटा शहर होने एवं कोरोना संक्रमण की बजह से अभी 20 के लगभग बच्चे ही ट्रेनिंग सेंटर पहुँच रहे हैं। धीरे-धीरे जब लोगों के बीच इसकी जानकारी फैलेगी और कोरोना का खतरा कम होगा, तब बच्चों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। राजकुमार कहते हैं कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं हैं, पर छोटा कस्बा होने के कारण लोग इस ओर ध्यान नहीं देते। मां-बाप अपने बच्चों को सिर्फ आत्मरक्षा के लिहाज मार्शल आर्ट सीखने भेजते हैं। वे उन्हें बाहर जाने देना नहीं चाहते हैं, जिसके चलते आज तक इनके सेंटर का कोई भी बच्चा जिलास्तर की प्रतियोगिता में भी शामिल नहीं हो सका है। वे कहते हैं कि उनके यहां सीखने वाले कई बच्चे काफी होनहार थे। पर अभिभावकों के फैसले के कारण वो इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पाए, इस बात का उन्हें काफी मलाल भी है।

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