जन-समस्याशेखपुरा

यात्री बस स्टैंड में नहीं हैं मूलभूत सुविधाएं, महिलाओं को हो रही भारी परेशानी

Sheikhpura: बरबीघा! कहने को तो ये बिहार केसरी श्री बाबू की जन्मभूमि है। उस हिसाब से यहां विकास की गंगा बहनी चाहिए थी। परन्तु यहां के लोग विकास के नाम पर हमेशा ही ठगे गए हैं। ये शहर हमेशा से ही उपेक्षा का शिकार रहा है। तभी तो आज तक यहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। जी हाँ, सही सुना आपने! विश्वास न हो तो बरबीघा-शेखपुरा रोड स्थित बस स्टैंड आ जाइये। यहां से हजारों यात्री रोजाना सफर करते हैं। महिलाएं, बच्चे बुजुर्ग सभी यहां आते हैं। रोजाना हजारों की कमाई देने वाले इस बस स्टैंड से सरकार को हर साल राजस्व मिलता है, जो यात्रियों से ही वसूला जाता है। पर सुविधाओं के नाम और उन्हें कुछ नहीं मिलता।

यात्री बस स्टैंड में मूलभूत सुविधाओं का है अभाव
न यहां बरसात और धूप से यात्रियों को बचाने हेतु यात्री शेड है, न ही पीने के शुद्ध पानी के लिए चापाकल है और न ही शौचालय है। हल्की बारिश हो जाये तो यात्री बगल के दुकान का सहारा लेते हैं, पीने के लिए 20 से 22 रुपया में 1 लीटर पानी खरीदते हैं। जबकि टॉयलेट जाने के लिये लोग दीवार का सहारा लेते हैं। हद तो तब होता है जब किसी महिला यात्री को टॉयलेट जाना होता है। पता है उस वक़्त क्या होता है, आपको स्थिति देख के लज्जा आएगी। दिन के उजाले में उन महिलाओं को बस के टायर के पास छुप के टॉयलेट जाना पड़ता है। अब हजारों यात्रियों में से कितनों के साथ ये समस्या आती होगी, इसका अंदाजा आप खुद लगा लीजिये। हमने कई यात्रियों एवं बसों के स्टाफ से इस बाबत बात की तो उन्होंने एक ही बात बोला। क्या कर सकते हैं? मजबूरी है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
समस्याएं यहीं नहीं रुकतीं बस संचालकों को भी अलग समस्या है। पूरे बस स्टैंड परिसर में बड़े-बड़े गड्ढे हैं। अगर गलती से कोई बस उन गड्ढों में फंस जाए तो बिना किसी टोचन के बाहर नहीं निकलती, और ऐसा लगभग रोज ही होता है। इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विजय कुमार ने इसकी जानकारी से इंकार करते हुए बताया कि इस समस्या का जल्द ही इसका कोई न कोई उचित समाधान निकाल लिया जाएगा। वहीं यात्रियों ने इस समस्या के लिए जिला प्रशासन से पहल की अपील की है।

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