शेखपुरास्वास्थ्य

गैर-संचारी रोगियों के पहचान में अब जीविका दीदियां करेंगी सहायता, ट्रेनिंग कम वर्कशॉप का हुआ आयोजन

Sheikhpura: गैर-संचारी रोग से ग्रसित मरीजों के समुचित इलाज हेतु मरीजों की पहचान के अब आशा दीदियों की मदद के अब जीविका दीदियों की सहायता भी ली जाएगी। ये घर-घर जाकर गैर संचारी मरीजों की पहचान करेंगे ताकि उनका उचित इलाज हो सके। इसके लिये आज सोमवार को सदर अस्पताल में ट्रेनिंग कम वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ बिरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जीविका के डीपीएम सहित कई अन्य स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मी मौजूद थे।

अब जीविका की सहायता से पूरा होगा कार्य
इस बाबत जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी ने बताया कि पहले से भी आशा दीदियों की मदद से जिले में यह अभियान जारी है। पर मैन पॉवर की कमी के कारण इसमें अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। इसलिए विभाग के निर्देशानुसार अब इस कार्य मे जीविका की सहायता भी ली जाएगी। इनकी मदद से गांव-गांव जाकर 30 वर्ष से अधिक उम्र के गैर संचारी रोग से ग्रस्त व्यक्तियों की पहचान की जाएगी। इनकी मदद से सभी परिवारों की सामान्य जानकारी के साथ-साथ समुदाय आधारित मूल्यांकन प्रपत्र भरा जाएगा। इसमें परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य संबंधित जानकारी रहेगी। सी-बैक फॉर्म के आधार पर चिह्नित मरीजों की एएनएम द्वारा स्क्रीनिग की जाएगी। फिर एएनएम के द्वारा उनका डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए सभी को टैब उपलब्ध करा दिया गया है।

बैठक में शामिल अधिकारी

जानकारी इकट्ठा करने के बाद होगा समुचित इलाज
पूरी जानकारी इकट्ठा करने के बाद पीएचसी स्तर पर मरीजों का चेकअप होगा और जरूरत हुई तो उपचार किया जाएगा। ऐसे मरीजों को नियमित फॉलोअप के लिए भी बुलाया जाएगा। साथ ही अगर आवश्यकता हुई तो उच्च मेडिकल संस्थान रेफर भी किया जाएगा। गैर-संचारी रोगियों की स्क्रीनिग और उसकी रिपोर्टिंग की जाएगी। साथ ही सभी स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में भी ऐसे रोगियों की पहचान और जांच होगी। उन्होंने बताया कि गैर-संचारी रोग से होने वाली मौतों में कमी लाने के लिए यह सर्वे अभियान शुरू किया गया है। गैर-संचारी रोग के कारण बड़ी संख्या लोगों की मौत हो जाती है। मधुमेह, रक्तचाप आदि बीमारियों को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। गैर-संचारी रोगों कैंसर, डाइबिटीज, टीबी, कुष्ठ आदि की पहचान प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर की जाएगी। उसकी जानकारी भी पोर्टल पर अपलोड होगी।

जानें क्या कहता है आंकड़ा
बताते चलें कि भारत में प्रत्येक एक हजार की आबादी पर 116 लोग गैर संचारी रोगों से ग्रस्त होते हैं। गैर संचारी रोग को गैर संक्रामक बीमारी या पुरानी बीमारी भी कहा जाता है। 35 साल की उम्र पार करने के बाद इन बीमारियों के पीड़ितों की संख्या और भी बढ़ जाती है। ये दावा एक रिसर्च में किया गया है और संचारी रोगों के खतरों में वायु प्रदूषण को प्रमुख कारक के तौर पर पहचाना गया है। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) की भारत में गैर संचारी रोगों का बोझ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में, हाई ब्लड प्रेशर, पाचन तंत्र संबंधी बीमारियों और डायबिटीज को तीन प्रमुख गैर संचारी रोग बताया गया है, जबकि कैंसर सबसे कम प्रचलित बीमारी है।

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