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मात्र सवा लाख रुपये के अभाव में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग नहीं ले रहा होनहार दिव्यांग खिलाड़ी, देश के लिए गोल्ड लाने का सपना लेकर मदद की अपील

Sheikhpura: नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड जीता तो पूरा देश झूम उठा। सरकार के साथ सारे राजनीतिज्ञ, समाजसेवी, संस्थान, मीडिया व आम जनता ने बधाइयों व शुभकामनाओं की बौछार कर दी। पर ऐसे ही कितने खिलाड़ी हमारे आस-पास भी मौजूद हैं, जो देश के लिये मेडल लाने की खातिर कड़ी मेहनत कर रहे हैं, पर आर्थिक अभाव में उनका ये सपना अधूरा ही रह गया है। ऐसी ही एक कहानी है देश के लिए मेडल लाने का ख्वाब देख रहे बरबीघा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नं 21 नारायणपुर के पैरा ओलंपिक खिलाड़ी मुनचुन कुमार कुमार की। इन्होंने कृत्रिम पैर से वो कर दिखाया जो शायद किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा।

कैसे खोया पैर, किसने दिया हौसला
उमाशंकर पंडित के इस होनहार सुपुत्र का बायां पैर बचपन में ही एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था। इस दुर्घटना में उनका बायां पैर घुटने से अलग हो गया। इसके बाबजुद इन्होंने औरों से कुछ अलग करने की उम्मीद नहीं छोड़ी। इस कार्य में उनके बचपन के एक मित्र ने इनका पूरा सहयोग किया। उसी मित्र ने इन्हें पैरा ओलंपिक में भाग लेने का परामर्श दिया और मुनचुन का हौसला भी बढ़ाया। गरीब होने के बाबजुद अपने हौसले को टूटने नहीं दिया और पूरे जुनून से जुट गए। कृत्रिम पैर के साथ जिला स्तर से राज्य स्तर तक होने वाले टूर्नामेंट में भाग लेकर स्वर्ण, रजत सहित कई पुरस्कार भी जीता। केंद्र व राज्य सरकार से कई बार पुरस्कृत इस खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए भी ट्रायल दिया। पर कृत्रिम कार्बन फाइबर ब्लेड के अभाव में उसका ये सपना आज तक अधूरा है।
स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने नहीं की मदद
इस बाबत बात करते हुए उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्होंने कई बार प्रयास किया। पूर्व जिलाधिकारी योगेन्द्र सिंह ने तबादला होने से पहले इसके लिए आश्वासन भी दिया था, पर उनके तुरन्त तबादले के कारण बात वहीं रुक गई। फिर उन्होंबे स्थानीय विधायक सुदर्शन कुमार से इस बाबत मदद मांगी। कई बार उनके पैतृक गांव व पटना स्थित निवास पर जाकर मिला, पर सन 2019 से लेकर अबतक खोखले वादों के सिवा कुछ नहीं मिल सका।
ब्लेड के लिए कितने रुपयों की है दरकार
उसके बाद इस खिलाड़ी की राज्य सरकार ने मदद की। पर राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान के मुताबिक ब्लेड में खर्च होने वाली राशि का 75% ही राज्य सरकार देती है। बाकी का 25% इन्हें खुद वहन करना होगा। उन्होंने बताया कि कार्बन फाइबर ब्लेड लगाने में कुल 5 लाख की लागत है। उसके मुताबिक 1 लाख 25 हजार इन्हें खुद वहन करना होगा। पहले से आर्थिक तंगी का शिकार इनका परिवार के पास इतना रुपया भी नहीं है कि वो इसे ब्लेड रनर दिला सकें। उन्होंने इसके लिए मदद की अपील करते हुए कहा है कि ब्लेड लगाने में इनकी मदद करें, ताकि वो भी देश के लिये गोल्ड जीत सके।
कहाँ-कहाँ जीता पदक
मुनचुन वर्तमान में शेखपुरा जिला निर्वाचन विभाग के ब्रांड अम्बेसडर हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर से जिला स्तर के टूर्नामेंट में भाग लेकर उन्होंने अपने सफर की शुरुआत की। जहां 100 मीटर दौड़ स्पर्द्धा में उन्होंने गोल्ड जीतकर जिले का गौरव बढ़ाया। इसके बाद पाटलिपुत्र स्टेडियम में गोल्ड, गया में रजत और खगड़िया में भी गोल्ड हासिल किया। राष्ट्रीय स्तर पर इन्होंने राजस्थान के जयपुर, गुजरात के गांधीनगर एवं हरियाणा के पंचकूला में भाग लिया। जहां गांधीनगर में उन्होंने बिहार के लिए रजत पदक जीतकर पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में भाग लेने हेतु इन्होंने देश की राजधानी दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में ट्रायल दिया। जहां ब्लेड का अभाव में उनका चयन नहीं हो सका। जयपुर व पंचकूला में भी ब्लेड की कमी के कारण ही उन्हें हार का मुंह देखना पड़ गया। मगही न्यूज़ इनके जज्बे को सलाम करते हुए आम लोगों से इनकी मदद के लिए आगे आने की अपील करता है। ताकि ये एथलीट जिले के साथ-साथ देश का गौरव भी बढ़ा सके।
मुनचुन कुमार 
पंजाब नेशनल बैंक, बरबीघा
Ac.    0555001510020792
IFSC. PUNB00055500

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