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डीजल और पेट्रोल की कीमत में हुई बृद्धि , कृषि और रोजगार पर पड़ेगा असर,मंहगाई की सम्भावनाओं से नही किया जा सकता है इंकार- रालोसपा

शेखपुरा: बेतहाशा बढ़ रही डीजल-पेट्रोल की कीमतों से बिहार जैसे गरीब राज्यों का संकट बढ़ेगा। एक अनुमान के अनुसार किसानों को जुताई, पटवन, दौनी और ढुलाई में सीधे करीब 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान अनुदान के बाद भी होने की आशंका है। यह बात रालोसपा के राष्ट्रीय महासचिव राहुल कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि बात सिर्फ किसानों की नहीं है। बात इससे आगे की है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी है और पेट्रो उत्पादों की कीमतें कम की जा रही हैं। तब भारत में पिछले 18 दिनों में डीजल की कीमतों में 10-11 रुपए से अधिक की बढ़ोतरी न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि आर्थिक तौर पर भी नुकसानदेह साबित होगा। सरकार सिर्फ अपना खजाना भरने पर लगी है। रालोसपा नेता ने कहा कि डीजल का दाम बढ़ने से फसल उत्पादन की लागत बढ़ेगी। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर मंहगे डीजल की वजह से उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतों को बढाने का दवाब रहेगा। मतलब एक तरफ बिहार की बड़ी आबादी की लागत बढ़ जाएगी व आमदनी घटेगी और दूसरी तरफ रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ जाएंगे। इससे लोगों की खरीदारी क्षमता बुरी तरह प्रभावित होगी। रालोसपा नेता ने कहा कि कोविड-19 की वजह से पहले ही किसानों, ट्रक मालिकों, फैक्ट्री मालिकों और बस संचालकों की हालत बेहद दयनीय हो गई है। ऐसे में सिर्फ टैक्स वसूली के उद्देश्य से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बढ़ाना समझदारी नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रकों से ढुलाई महंगा होगा। इसका खामियाजा आखिर आम लोगों को ही भुगतान पड़ेगा। सरकार को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए खपत बढाने पर जोर देना चाहिए न कि जेब पर परोक्ष और सीधे तौर पर डाका डालना चाहिए। राहुल कुमार ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि चप्पल वालों की सरकार होने का दावा करने वाले हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले एटीएफ पर चुप हो जाते हैं। गौरतलब है कि एटीएफ का दाम 31 रुपए प्रति लीटर की दर से पिछले दस साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं पेट्रोल और डीजल का दाम 78-79 रुपए प्रति लीटर है।

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