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मौत के सौदागर बन गए हैं डॉक्टर साहब, 10 दिनों में दूसरी मौत, कब होगी कार्रवाई?

Sheikhpura: बरबीघा नगर परिषद क्षेत्र के एक डॉक्टर आजकल मौत का सौदागर बन बैठे हैं। पिछले 10 दिनों के अंदर उनके क्लीनिक में आज शुक्रवार को अत्यधिक रक्तस्राव के कारण दूसरी मौत हो गई। दरअसल डॉक्टर साहब के क्लीनिक में सभी अबैध चिकित्सीय कार्य खूब धड़ल्ले से होता है। गर्भपात से ऑपरेशन तक। बिना किसी बेहतर तकनीक एवं सुविधा के। क्लीनिक के अंदर जाकर कोई भी इस बात का सुबूत ले सकता है। इस इलाके में ऐसे और भी बहुत सारे क्लीनिक हैं, जहां ऐसा खेल खेला जाता है।

लापरवाही के कारण एक और मरीज की गई जान
ताजा मामला बरबीघा नगर परिषद क्षेत्र के नर्सरी मोहल्ले का है। जहां शंकर मल्लिक की पत्नी 40 वर्षीय पत्नी गीता देवी की डॉ श्रवण कुमार के क्लीनिक में अबैध रूप से गर्भपात कराने के बाद मौत हो गई। इसके बाद मरीज के परिजन काफी संख्या में जमा होकर उग्र प्रदर्शन करने लग गए। क्लीनिक में तोड़ फोड़ मचाकर मुख्य सड़क को भी जाम कर दिया।

क्लीनिक में तोड़फोड़ एवं विरोध में लगा जाम

घटना की सूचना मिलते ही बरबीघा थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह की अगुवाई में पुलिस के कई अधिकारी व जवान मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने में जुट गए। मामला बिगड़ता देख प्रखण्ड विकास पदाधिकारी भरत कुमार सिंह भी मौके पर पहुंच कर स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश में लग गए। काफी देर चले हंगामे और प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के समझाने के बाद परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही लाश लेकर चले गए।

घटना का बाद सड़क पर लगा हुजूम

रूपये के लोभ में परिजन कर लेते हैं मांडवली
मिली जानकारी के मुताबिक बरबीघा में एक एक्सपर्ट कंपाउंडर हैं, जो कई क्लीनिकों में ऑपरेशन करते हैं। बिना सुरक्षात्मक तरीके से किये गए ऑपरेशन के कारण कई बार मरीज की जान चली जाती है। बाद में डॉक्टर साहब अपने पैसे और रसूख के बल पर बात को दबा देते हैं और मामला मैनेज हो जाता है। दरअसल इन डॉक्टरों के यहाँ इलाज कराने वाले लोग अनपढ़ और गरीब ही होते हैं। मरीज के मरने के बाद पैसे के लोभ में ये थाने में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं करवा पाते। प्राथमिकी दर्ज नहीं होने का कारण पुलिस और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर पाती। जिसके कारण ऐसे मौत के सौदागरों का मनोबल और बढ़ जाता है। जिला प्रशासन को ऐसे मौत के सौदागरों पर कड़ी निगरानी बनाने की जरूरत है। जिले में बड़े पैमाने पर स्थापित इस उद्योग की सिरे से जांच कर बेहतर संस्थानों को लाइसेंस देने की जरूरत है। ताकि फिर से दुबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो सके।

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